Pyar bhara Zehar - 11 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार भरा ज़हर - 11

एपिसोड 11 ( गहरा ज़ख्म ! )

काश्वी घने जंगल में लाल रौशनी का पिच्छा करते करते , एक गधे में गिर जाती है | वहां गिरने के बाद , जब काश्वी खुद को संभालती है , तब जो नजारा वो देखती है , उसे देख , काश्वी का मुह खुला का खुला ही रह जाता है | काश्वी इस वक्त अपने नागिन रूम में थी | हलके नीले रंग की पोशाक , सीने पर नाग लोक का निशाँ , लम्बे घने कमर को छुट्टे हुए बाल | 

काश्वी के चारों तरफ , लाल रौशनी ही थी | सामने दो रो में लैब बनी हुई थी | जिसमें कैमिक्ल्ज़ थे |काश्वी उन कैमिक्ल्ज़ को देखते ही बता सकती थी , की ये कोई आम कैमिकल नहीं थे | बहुत ही ज़हरीले पदार्थ थे | जो इस देश को तबाह करने के लिए काफी थे | कास्ज्वी धीरे से आगे बढ़ने लगी , तो कुछ लोग वहां पर कोई काम कर रहे थे | जब उन लोगों को काश्वी के वहां पर होने का एहसास हुआ , तो एक आदमी आगे आते हुए बोला | 

"ऐ लड़की , चली जाओ यहाँ से |"  तो काश्वी गुससे में बोली | 

"क्यूँ ? ताकि तुम मेरे देश को बर्बाद क्र सको ? कभी नहीं | मेरे होते हुए  , मैं तुम्हे कभी जीतने नहीं दूंगी |" काश्वी की बात सुन , उन लोगों ने एक दुसरे की ओर देखा , ओर फिर जोर जोर से हसने लगे | कुछ पलों के लिए तो काश्वी को समझ ही नहीं आया , की क्या करे | क्यूँ वो सब हस रहे थे | फिर , उन मास्क लगाए आदमियों , काश्वी पर एक कैमिकल  से हमला किया | उस कैमिकल की बूंदें काश्वी पर गिरतीं , उससे पहले ही काश्वी वहां से अपनी दिव्य शक्तियों की मद्दत से गायब हो गई | 

ओर जिसने उस पर वार किया था , ठीक उसके पिच्छे आ गई | वो आदमी एक दम काश्वी के अचानक से उसे पिच्छे आने से डर गया | काश्वी ने , अपने सिर्फ एक वार से , उस आदमी की गर्दन ने एक डंक से उसे मौत के घात उतार दिया | तभी उस आदमी के तदपने की आवाजें , काबियों के कानो में गूंजने लगीं | 

फिर उनका मुखिया , काश्वी के सामने आते हुए , काश्वी के पेट में अचानक से चाक़ू घोप देता है | जिससे काश्वी घायल हो जाती है | ओर उसका बहुत ज्यादा खून बहने लगता है | अचानक से काश्वी , अपने नागिन रूम्मे आती है | एक नागिन का वो रूप , जिसे देख हर कोई डर जाए | विशाल , दिल देहला देने वाला रूप | काश्वी गुस्से में बोली | 

काश्वी :: "बहुत हो गया तुम्हारा , अब तुम देखोगे , मेरा वार | एक नागिन का वार |" काश्वी के रूप को देख , वो लोग अंदर तक कांप गये थे | एक के मुह से निकला | 

"ये , ये तो नागिन है |" तभी काश्वी तंज कसते हुए बोली | 

"क्यूँ क्या हुआ , डर गये | पर अब तुम्हारा समय ख़तम हो चूका |" ताभी काश्वी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए , अपने मुह से पूरी लैब में आग लगा देती है | एक जोर से धमाका होता है | जिसका शिकार वो लोग भी बन जाते है | काश्वी का खून बहुत ज्यादा बह चूका था | 

नागिन रूम में आते हुए , रंगते हुए , काश्वी उस सुरंग से बाहर निकली | फिर इंसानी रूप में आते हुए , अपना पेट पकड़ते हुए , काश्वी जैसे ही जाने को होती है | काश्वी की आँखों के सामने काला अँधेरे छा जाता है | ओर वो वहीँ पर बेहोश होकर जैसे ही गिरने को होती है , दो मजबूत बाहें काश्वी को थाम लेती हैं | 

वो कोई ओर नहीं ,बल्कि राघव  ही था | जो बहुत देर से काश्वी को ढून्ढ रहा था | धमाके की आवाज़ का पिच्छा करते हुए , जैसे ही राघव यहाँ पहुंचा था , काश्वी को घायल देख उसकी रूह तो बाहर ही निकल गई थी | ओर जैसे ही उसने देखा की काश्वी बेहोश हो रही थी , वो जल्दी से भाग कर , उसे थामने के लिए आगे आया | 

काश्वी को होश नहीं था | पर जैसे ही राघव ने अपने हातों में खून देखा , वो घबरा गया | ओर फिर राघव ने उस गुफ्फा की ओर देखा , जो आग की लपटों में देहक रही थी | ओर अंदर से कुछ लोगों के चीखने की आवाजें आ रही थी | पर राघव ने  ज्यादा ध्यान ना देते हुए , काश्वी को गोद में उठाया ,ओर घर ले गया | 

रूम में काश्वी को बिस्तर पर बिठाते हुए , राघव ने काश्वी की कुर्ती का पल्लू हटाया , तो देखा की जख्म तो बहुत ज्यादा गहरा है | ओर खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था | फिर राघव के पास कोई ओर चॉइस नहीं बची थी | उसने अपनी आँखें बंद की , ओर काश्वी के घाव पर अपना हाथ रखते हुए , अपनी दिव्य शक्तियों से उसके घावों को भरने की कोशिह्स करने लगा | 

पर राघव की कोशिश पूरी तरह सफल नही हो सकी | काश्वी का घाव बहुत ज्यादा गहरा था | जब राघव ने अपनी आँखें खोलीं , तो खून तो रुक चूका था , लेकिन अभी भी घाव हर ही था | फिर जल्दी से काह्स्वी के घाव की ड्रेसिंग क्र , ओर अपनी आँखों पर पट्टी बांधते हुए , राघव ने काश्वी के कपडे बदल दिए | 

राघव जनता था , की जब काश्वी को होश आएगा , वो उससे कई सारे सवाल पूछेगी | जिनके जवाब उसके पास नहीं होंगे | पर राघव के पास कोई चॉइस नहीं थी | इस वक्त राघव के लिए काश्वी की सलामती ज्यादा जरूरी थी | पूरी रात , घाव की वजह से काश्वी का बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा था | आसमान में बदल गरज रहे थे | मानो मौसम , भी अपना दुःख बयाँ कर रहा हो | काश्वी के घायल होने का | मानो कुदरत भी कुछ ब्यान कर रही हो | 

राघव ने अपनी पूरी कोशिश की , ताकि काश्वी का बुखार कम हो सके | मोटे , गर्म कम्बल काश्वी को ओढ़ाए | ठन्डे पानी का सेक दिया | दवा भी दी | लेकिन , किसी भी तरीके से काश्वी का बुखार कम नहीं हो रहा था | तो राघव ने अंदाज़ा लगाया की शायद , चाक़ू ज़हरीला होगा | वरना , काश्वी के पास जितनी शक्तियां है , उसकी हालत कभी इतनी खराब नहीं होती | 

राघव को समझ नहीं आ रहा था , की वो क्या करे | तभी उसके दिमाग में एक ख्याल आया | जिसके बाद , राघव वो करता है , जिसके बाद , शायद काश्वी उसे कभी माफ़ ना करे  | 

आखिर राघव के दिमाग में ऐसा कौन सा ख्याल आता है ? क्या करने वाला था अब राघव काश्वी के बुखार को कम करने के लिए ? क्या अगले दिन राघव काश्वी के सवालों के जवाब दे पायेगा ?

जानने के लिए बने रहिये मेरे साथ |