Pyar bhara Zehar - 8 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार भरा ज़हर - 8

एपिसोड 8 ( पहली रसोइ का शगुन ! ) 

अगली सुबह जब तक काशवी उठी , तब तक राघव शायद जिम के लिए जा चुका था । ऐसा काशवी को लगा था । फिर काशवी जल्दी से उठी , और तयार होकर कमरे से निकल गई । कमरे के वोड्रोब में , काशवी ने जो कपड़े देखे थे , वो सब बहुत महंगे थे । और काशवी मन ही मन सोच रही थी।  

"हे भगवान , ये सारे कपड़े तो बहुत महंगे हैं ।" पर काशवी के पास कोई और चॉइस नहीं थी । उसने एक हरे रंग को साड़ी निकाली और जल्दी से नहा धो कर तयार हो कर किचन के लिए चली गई । जैसे ही काशवी किचन पहुंचती हैं, तो वहां पर रंजना जी को पाती है । काशवी जल्दी से अंदर जाकर , रंजना जी के पांव छूती है । और रंजना जी काशवी को आशीर्वाद देते हुए बोलती हैं । 

"सदा सुहागन रहो।" और फिर ये कहते ही रंजना जी ने काशवी को गले लगा लिया । और उसका हाल चाल पूछने लगीं । काशवी जी जैसे ही रंजना जी से दूर होती है , उसे अचानक सेबकोई जानी पहचानी सी महक आती आती है । काशवी के दिमाग में बहुत कुछ चलने लगा था । फिर उसके बाद रंजना जी काशवी से बोलीं । 

"बेटा आज रसम के तौर पर , तुम्हे मिठ्ठा बनाना है । बना लोगो न ?" काशवी ने हैं में सर हिलाया । और फिर अपना काम करने लगी । पर फिर भी , उसके दिमाग में बहुत सारी बातें चल रहीं थीं । पर फिर अचानक से काशवी के दिमाग में कुछ आया । और वो खुद से बोलती है । 

"कल रात को सपना मुझे आया था । उस सपने में भी मुझे यही महक आई थी । भला मां का उस सपने से क्या लिंक है ?" 

कश्वी को समझ में नहीं आ रहा था , की वो क्या करे । पर फिर भी जल्दी से नाश्ता बनाने के बाद , डाइनिंग हॉल में चली गई । हलवे की खुशबू पूरे घर में फैल गई थी । और रोनित और खुशी एक दूसरे की ओर देखते हुए , काशवी से बोले । 

"वाह भाभी , खुशबू तो बहुत अच्छी है ।" रोनित और खुशी को देखते ही काशवी के चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल आ गई । तब तक राघव भी वहां पर आ जाता है । और पूरे परिवार को खुश देख , उसके चेहरे पर भी स्माइल आ जाती है ।  राघव की नजर उसके बाद , काश्वी पर जाती है | जिसके हातों में हलवे का भरा हुआ बोल होता है | जल्दी से राघव काश्वी के हाथ से बोल ले लेता है | ओर उसे साथ में बैठने का इशारा करता है | 

पहले तो काश्वी को समझ में नहीं आया | पर फिर ख़ुशी काश्वी ओर राघव को परेशान करने के लिए बोलती है | 

"अरे भाभी , भाई आपको साथ में , नहीं नहीं उनके साथ बैठने के लिए बोल रहे हैं |" राघव गुस्से भरी निगाहों से ख़ुशी को देखता है | जिससे ख़ुशी अपना मुह दबा कर हसने  लगती है | ख़ुशी की बात सुन , काश्वी को शरम सी आ जाती है | तो जल्दी से राघव के बगल में बैठते हुए , काश्वी भी उन्ही के साथ खाने लगती है | 

आज का पूरा नाश्ता काश्वी ने खुद अपने हातों से बनाया था | ओर सभी को खाना बहुत पसंद आता है | रंजना जी काश्वी की तारीफ़ में बोलती हैं | 

"बहुत अच्छा नाश्ता बना है बेटा | मेरी बहू सर्व गुण सम्पन है |" फिर काश्वी उठ कर रंजना जी का आशीर्वाद लेती है | ओर रंजना जी अपने गले की पुश्तैनी चैन , निकलते हुए बोलीं | 

"ये चैन , मुझे मेरी सास ने दी थी | ओर अब मैं तुम्हे दे रही हूँ | आशा करती हूँ , की मेरे घर की , इन रिश्तों को तुम अच्छे से संजो कर रखोगी |" काश्वी फिर रंजना जी का आशीर्वाद लेती है | ओर रंजना जी वो चैन कश्वी के गले में पना देती है | जैसे ही काश्वी को रंजना जी छुती हैं , काश्वी को फिर से वाही जानी पहचानी महक आती है | जो उसे अपने सपने में , ओर सुबह कित्चम में आती है | 

जिससे काश्वी किसी गहरी सोच में पद जाती है | उसके बाद , जब रोनित काश्वी से कुछ कहता है , तो काश्वी का ध्यान टूटता है | रोनित काश्वी का हाथ पकड़ते हुए बोला | 

रोनित :: "देखिये भाभी , वैसे तो आपसे रिश्ते में  छोटा हूँ | पर एक देवर ओर भाभी का रिश्ता दोस्ती जैसा होता है | मैं आज आपसे वादा करता हूँ , आपका छोटा भाई बनकर , ओर एक अच्छा दोस्त बनकर आपकी रक्षा करूँगा |" ओर ये कहते हुए , रोनित जैसे ही काश्वी की नम आँखें देखते है | वो कश्वी को गले लगा लेता है | 

देवर भाभी के बीच इतना प्यार देख , सब थोड़ी देर के लिए इमोशनल हो जाते हैं | ओर फिर ख़ुशी भी उन दोनों को गले लगाते हुए , बोली | 

"भाभी ओर मैं , मैं आपकी छोटी बहन | आपके साथ मिलकर सब की चुगलियाँ करेगे |" ख़ुशी की बात सुन , सब जोर से हसने लगते हैं | ओर राघव अपना सर हिला देता है | उसके बाद ,सब आराम से अपना नाश्ता करते हैं | नाश्ता करने के बाद , राघव काश्वी को कमरे में आने का इशारा करता है | पर जैसे ही काश्वी जाने को होती है | राजीव जी काश्वी से कहते हैं | 

"एक मिनट काश्वी बेटा |" काध्वी सवालिया नजरों से राजीव जी को देखने लगती है | ओर फिर उनके पास आते हुए बोलती है | 

"क्या हुआ पापा जी , आपको कुछ चाहिए ?" तो राजीव जी , काश्वी के सर पर हाथ रखते हुए , ओर अपने दोसरे हातों की मुट्ठी खोलते हुए , काश्वी से कहते हैं | 

"ये मेरी तरफ से , तुम्हारा शगुन |" राजीव जी के हाटों में , एक लाल पत्थर होता है | काश्वी को समझ नहीं आता की वो क्या है | पर फिर राजीव जी आगे बोलते हैं | 

"सही समय आने पर , तुम्हे पता चल जायेगा , की ये क्या है | पर एक बात याद रखना , की तुम इस पत्थर का इस्टे माल सिर्फ एक बार कर सकती हो | ओर हमेशा इसको अपने पास ही रखना |" काश्वी को राजीव जी की कोई भी बात समझ में नहीं आती है | पर फिर जैसे ही काश्वी उस पत्थर को अपने हातों में पकडती हैं | वो पत्थर काश्वी में स्म जाता है | जिससे काश्वी थोडा घबरा जाती है | ओर राजीव जी को देखने लगती है | तो राजीव जी प्यार से काश्वी के सर पर अपना हाथ रखते हुए , बोलते हैं | 

डरो मत , सब ठीक है |" उसके बाद , राजीव जी वहां से चले जाते हैं | काश्वी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था | उसके मन में बहुत सारे सवाल चल रहे थे | वो खुद से बोली | 

"तो क्या इसका मतलब ये है , की पापा को पता है की मैं इंसान नहीं , नागिन हूँ ?" इस ख्याल के मन में आते ही , काश्वी थोडा घबरा जाती है | ओर  उसे समझ में नहीं आता है , की वो क्या करे | 

क्या लगता है , क्या राज़ था उस लाल पत्थर का ? ओर क्या बात करनी थी , राघव को काश्वी से ? 

जानने के लिए बने रहिये मेरे साथ |