Pyar bhara Zehar - 10 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार भरा ज़हर - 10

एपिसोड 10 ( लाल रौशनी का पिच्छा ! )

राघव सिर्फ काश्वी को कॉलेज तक छोड़ने ही आया था | फिर उसके बाद  , ड्राईवर ने गाड़ी ऑफिस की ओर मोड़ दी | ऑफिस की बिल्डिंग देख , हर कोई हैरान रह जाता था | जब राघव गाड़ी से उतरा , तो सारे एम्प्लोइएस दोनो तरफ लाइन में खड़े होकर , अपना सर झुकाए , खड़े थे | ओर रागाह्व का असिस्टेंट , ओर उसका में बॉडी गार्ड उस के साथ चल रहे थे | ये सीन देख , कोई भी राघव की अमीरी का अंदाज़ा लगा सकता था | तभी राघव की नजरों में मानो कुछ आया | ओर वो गुस्से में अपनी जगह पर ही रुक गया | राघव की आँखों में गुस्सा देख , वहां खड़ा हर एक इंसान अंदर तक कांप गया था | 

राघव किसी डेविल से कम नहीं लग रहा था | वहां खड़ा हर इंसान अंदर तक काँप रहा था | राघव ने गुस्से में अपनी मुथियन भिंची , ओर बिल्डिंग के अंदर देखते हुए , अपनी गुस्से भरी सर्द आवाज़ में बोला | 

राघव : "जिसके भी जुते  गंदे हैं , आज ऑफिस से उसकी छुट्टी |" राघव ने खुद को इतना ज्यादा कंट्रोल क्या हुआ था , की हर कोई  वहां खड़ा हैरान रह गया | सब को पता था , की राघव को सफाई कितनी पसंद है | ओर जरा सी गन्दगी भी , राघव को राक्षश बना सकती थी | पर आज , आज राघव ने कुछ किया नहीं | उसने सिर्फ , बोल के बात को जाने दिया | 

राघव के ही पास में खड़े आदमी ने अपने जुते देखे , ओर  जल्दी से राघव की नजरों से दूर हो गया | फिर वो अपनी लाल हुई आँखों से राघव को ऑफिस के अंदर जाते देखता रहा | ओर मन ही मन भगवान् को दुआ करने लगा | 

"आपका बहुत धन्यवाद भगवान् , आज इस हैवान से बचा लिया |" राघव कोई आम इंसान नहीं था | जैसा की मैंने आपको बताया की , राघव  भी एक इच्छाधारी नाग है | वो भी कोई आम नाग नहीं | बल्कि शेष नाग | राघव का नाम ही लोगों के दिलों में खौंफ पैदा करने के लिए काफी होता था | पर लडकिय राघव की डेय्रिंग पर्सनालिटी के बावजूद भी , राघव पर फ़िदा थीं | शाम को जब राघव घर पहुंचा तो , काश्वी अभी तक घर नहीं आई थी | 

राघव अपने रूम गया , ओर आराम से सोचने लगा की काश्वी कहा जा सकती है | तभी राघव को ध्यान आया | ओर वो खुद से बोला | 

राघव :: "कहीं कल रात के सपने की वजह से तो नहीं ?" राघव को अभी तक पता नहीं चला था , की काश्वी लको क्या सपना आया था | राघव को काश्वी की ओर भी फ़िक्र हो रही थी | क्यूंकि राघव को तक्षक नाग से पता चला था , की काश्वी को कुछ समय पहले ही अपने अस्तित्व का एहसास हुआ है | तो ज़ाहिर सी बात है , की काश्वी को अपनी शक्तियों पर नियंत्रण नहीं है अभी | 

राघव आराम से बिस्तर पर बैठा , ओर अपनी आँखें बंद कर , अपनी दिव्य सक्तियों से काश्वी का पता करने लगा \ राघव क्यूंकि एक शेष नाग था , तो उसके पास कई सारी दिव्य शक्तिया थीं | उन में से एक ये भी थी , की वो अपनी शक्तियों से किसी का भी पता लगा सकता था | की कोई कहाँ है | ओर क्या कर रहा है | 

आनखेन बंद करते ही , राघव को घना जंगल दिखाई देने लगा | बड़े बड़े , लम्बे पेड़ | पर ये जंगल राघव को कुछ जाना पहचाना लग रहा था | फिर दूर से राघव को पायल की आवाज़ सुनाई दे रही थी | राघव उस पायल की पहचान को कभी नहीं भुला सकता था | क्यूंकि वो पयाल्म शेष नागिन की पयाल की  आवाज़ थी |  ओर तो ओर , राघव एक नागिन की गंध को भी पहचान सकता था | 

धीरे धीरे राघव जंगल की ओर गहराई में जाने लगा | ओर जैसे जैसे वो अंदर जा रहा था , उसे इस बात का यकीन होता जा रहा था , की काश्वी यहीं कहीं आसपास है | पर जंगल धीरे धीरे काला होता जा रहा था | समय इतनी जल्दी बीत रहा था , की राघव को देखने में दिक्कत होने लगी थी | 

जब राघव को आगे कुछ भी दिखना बंद हो गया , तो उसने अपनी आँखें खोलीं | ओर जल्दी से अपने नाग रूम में आते हुए , अपनी कमरे की खिड़की से निकल गया | 

मुंबई शेहर के घने काले अँधेरे जंगले में , एकदम बिचों बीच , एक लाल रंग की रौशनी थी | ओर काले रंग का एक नाग , तेज़ी से जंगल के अंदर जा रहा था | काश्वी भी धीरे धीरे अंदर उस लाल रौशनी की ओर ही जा रही थी | जैसे जैसे काश्वी अंदर की ओर जा रही थी, उसे वाही गंध आने लगी , जो उसे कल रात सपने में आई थी | ओर आज सुबह रंजना जी से | ओर काश्वी के मन में ये सब चल रहा था की | 

काश्वी :: "क्या ऐसा हो सकता है , की माँ यहाँ हैं ? ओर वो कुछ गलत काम ?" तभी काश्वी ने अपने विचारों पर रोक लगाई ओर , फिर खुद से कहने लगी | 

काश्वी : "नहीं काश्वी ये क्या सोच रही है तू ?" फिर आगे का रास्ता देखते हुए , जाने लगी | जैसे  ही काश्वी उन रौशनी की ओर नज़दीक पहुंच गई , काश्वी को एक दम चार पेड़ों के बीच , धरती के निचे से एक अजीब सी आवाज़ आने लगी | उस जगह पर खुदाई हो रही थी | ये जगह शेहर के बिलकुल बीचों बीच थी | जैसे ही कश्वी ने , उस गुफ्फा के अंदर देखना चाहा , उसका पैर फिसला ओर वो अंदर निचे धरती की गुफ्फा में गिर गई | 

काश्वी जोर से चीलाई :: "माँ .." ओर फिर धडाम से एक प्लेन जगह पर गिरी | पर क्यूंकि काश्वी एक नागिन थी , तो उसे कोई चोट नहीं आई | काश्वी ने जैसे ही अपने आसपास देखा , अपने आसपास का नजारा देख , उस्का  मुह तो खुल का खुल ही रह गया | काश्वी को तो समझ ही नहीं आ रहा था , की जो भी वो देख रही थी , वो सच था , या उसकी आँखों का कोई धोखा ? काश्वी की आँखें फटी की फटी ही रह गई थीं | ओर अनजाने में उसके मुह से निकला | 

काश्वी :: "हे भोलेनाथ , ये सब क्या है ?"

उस गुफ्फा में कुछ ऐसा था , जो देश दुनिया को तबाह करने के लिए  काफी होता |  ओर ये सब देख , कुछ देर के लिए तो काश्वी फ्रीज़ ही हो गई थी | उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, की क्या करे | क्या सोचे | कुछ भी नहीं | 

क्या लगता है दोस्तों , क्या था उस गुफ्फा में ? ओर क्या वो खुशबू रंजना जी का कोई राज़ छिपाए है ? ओर क्या राघव समय रहता काश्वी को ढून्ढ पायेगा ? 

जानने के लिए बने रहिये मेरे साथ | ओर जनोये कहानी के अगले भाग में क्या होता है आगे | 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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