Pyar bhara Zehar - 13 in Hindi Love Stories by Deeksha Vohra books and stories PDF | प्यार भरा ज़हर - 13

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प्यार भरा ज़हर - 13

एपिसोड 13 (  लम्बा सफ़र ! )

राघव ओर काश्वी , कुलेवी के मंदिर के लिए , निकल चुके थे | पर ना जाने क्यूँ , रंजना जी को एक अजीब सी घबराहट सी हो रही थी | काश्वी ओर राघव गाड़ी में थे | राघव ड्राइव कर रहा था | ओर काश्वी राघव की बगल वाली सीट पर  ही बैठी हुई थी | काश्वी खिड़की के बाहर देखा रही थी | तभी राघव अपनी सर का म्यूजिक सिस्टम ओन करता है | ओर एक romantic सोंग बजता है | 

निगाहों में देखो , मेरी जो है बस गया ... वो है मिलता तुमसे हुबहू ... हो .. जाने तेरी आँखें थी या बातें थी वजह ... हुए तुम जो दिल की आरजू .. तुम पास होके  भी , तुम आस होके  भी , एहसास होके  भी ,  अपने नहीं , .... ऐसे हैं , हमको गिले , उत्मसे ना जाने क्यूँ , मीलों के , हिं फासलें , तुमसे ना जाने क्यूँ ...

काश्वी ओर राघव को पता ही नहीं चला , कब दोनों ये गाना गुनगुनाने लग गये | दोनों इस गाने में इतना खो गये थे , की राघव के सामने कब एक सांप आ गया ,  उसे पता ही नहीं चला | अचानक ब्रेक लगाने से , काश्वी आगे की तरफ हुई , पर क्यूंकि उसने सीट बेल्ट लगा र्काही थी , काश्वी को सिर्फ झटका ही लगा था | पर राघव जल्दी से गाडी से उतरा | ओर गाडी के आगे गया | 

ओर उस सांप को देखने लगा | पर राघव को वो संप कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा था | राघव को परेशान देख , काश्वी भी जल्दी से गाडी से उतरी ,ओर राघव के पास आते हुए बोली | 

:: "क्या हुआ राघव , सब ठीक है न ?" तब काश्वी का ध्यान गया , की गाडी के टायर पर खून लगा है | उस खून को देख , काश्वी भी परेशान हो गई | पर काश्वी को ये समझ में नहीं आ रहा था | की वो खून है किसका | क्यूंकि वहां पर तो उन दोनों के अलावा कोई भी नहीं था | काश्वी को मानो किसी अनजान खतरे का आभास हो रहा था | वो राघव से बोली | 

"राघव मुझे नहीं लगता की , हमे यहाँ ओर देर रुकना चाहिए | फिर जैसे ही दोनों गाड़ी में बैठने के होते हैं , काश्वी बोलती है | 

काश्वी :: "रुकिए !" काश्वी के यूँ अहनक से कहने पर राघव उसे सवालिया नजरों से देखने लगता है | काश्वी जल्दी से गाड़ी की पीछे वाली सीट से पानी की बोतल निकाल कर लाती है | ओर खून से सने टायर पे उस पानी को फेंक देती है | जिससे गाड़ी से सारा खून पानी में मिलकर , बह जाता है | 

राघव को कुछ भी समझ में नहीं आता है | फिर कश्वी अपने आसपास देखने लगती है | मानो उसे इस बात का आभास हो रहा हो , की कोई तो है , जो उन दोनों पर नजर रखे हुए है | फिर काश्वी जल्दी से राघव को गाड़ी में बैठने का इशारा करती है | ओर दोनों वहां से निकल जाते है | 

पूरे रास्ते राघव ओर काश्वी किसी सोच में ही डूबे रहते हैं | वहीँ जैसे ही गाड़ी वहां से निकलती है | एक नागिन , रेंगते हुए  , उस खून के पास आती है | ओर अपनव इंसानी रूप में आते हुए , हसने लगती है | ओर फिर खुद से ही  कहती है | 

"हा हा हा हा , क्या लगा तुम दोनों को , की तुम दोनों को मैं आईटीआई आसानी से , मेरी सारी मेहनत पर पानी फेरने दुगी | नहीं नागरानी , बिलकुल नहीं | अभी तो आपको , एक तूफ़ान का भी सामना करना होगा | ऐसा तूफ़ान , जो आपको तो क्या इस पूरी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा | हा हा हा हा .."ये केख वो नागिन , वापिस अपने नागिन रूप में आकर , रेंगते हुए वहां से नीकल जाती है | 

काश्वी को ये की आँखों का धोखा नहीं हुआ था |वो बार बार पिच्छे मुड़ मुड़ कर देख रही थी | तो राघव बोल ही पड़ा | 

राघव :: "क्या हुआ काश्वी , किओ प्रॉब्लम है ?" काश्वी परेशान होते हुए कहती है | 

काश्वी :: "पता नहीं राघव , पर क्यूँ मुझे ऐसा लग रहा है  की ,  की कोई तो था वहां , कोई तो था जिसे हम नहीं देख पा रहे थे , पर वो हमे साफ़ साफ़ देख पा रहा था |" काश्वी की बात सुन , राघव मन ही मन खुद से बोला | 

"ये सिर्फ तुम्हे ही नहीं काश्वी , मुझे भी लग रहा है |" फिर राघव आगे कुछ भी बोला नहीं | ओर सामने देखकर , ड्राइव करने लगा | पर राघव को ये समझ में नहीं आ रहा था , की वो सांप  आखिर गया कहा | क्यूंकि उसने तो सच में सांप देखा था | रो तो तो , वो खून | फिर वो खून किसका था जिसे काश्वी ने पानी से साफ किया था | 

इन्ही सभी सवालों के साथ , दोनों मंदिर पहुंच गये | जैसे काश्वी मंदिर की सीड़ियाँ चढ़ने को हुई , राघव बोला | 

राघव :: "रुको !" काश्वी राघव की ओर सवालिया नजरों से देखने लगी | ओर उसी बोली | 

काश्वी :: "क्या हुआ राघव ?" तो राघव काश्वी को अचानक से गोद में उठाते हुए , बोला | 

राघव :: "कुछ नहीं , बस यहाँ की रस्म है , नई दुल्हन , को गोद में उठाने की |" काश्वी को समझ नहीं आ रहा था , की राघव जो कह रहा है , वो सच कैसे हो सकता था | काश्वी के लिए ये सीन , बिलकुल किसी फिल्म की तरह था | काश्वी राघव के इतने करीब थी , की राघव के कोलोन से ओ मदहोश हो रही थी | दोनों एक दुसरे की आँखों में आँखें डाले , बड़े आराम से सीड़ियाँ चढ़ रहे थे | 

आसपास के सभी लोग , उन दोनों को देख आपस में बातें कर रहे थे | 

"कितनी अच्छे लग रहे हैं न दोनों |" 

"हाँ बहन , दोनों की जोड़ी साक्षात शिव पारवती की जोड़ी लग रही है |" 

"सच बोला , बस किसी की नजर ना लगे |" 

काश्वी ओर राघव को मानो किसी की बातें भी सुनाई नहीं दे रही थी | कब दोनों मंदी में पहुंच गये , पता ही नहीं चला \ दोनों को होश आया , जब राघव ने काश्वी को निचे उतारा | काश्वी अपने आसपास देखने लगी | ओर जब उसने मुड़कर , अपने पिच्छे देखा , तो काश्वी हैरान रह गई | ओर जोर से चीखी | 

काश्वी :: "हे शिव ... राघव आप .." पर राघव को समझ नहीं आ रहा था , की काश्वी उसे ऐसे क्यूँ देख रही है , मानो उसने कोई भूत देख लिया हो |" 

क्या हुआ था काश्वी को ? ऐसा क्या देखा था काश्वी ने ? ओर आखिर किसका खून था , जो राघव की गाड़ी के टायर पर लगा था ? ओर क्या काश्वी का डर , सिर्फ उसका कोई वेह्म था , या किसी नए खतरे के आने का कोई आगाज़ ? 

जानने के लिए बने रहिये मेरे साथ |