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कैदी - 8

और सानव ने अपनी बहन चांदनी को से कहा ये शादी चंदन के बेटे के कोई संजीवनी बूटी जो शादी करके ही चंदन का बेटे की तबीयत में सुधार आ जायेगा और सानवी के घर बालो ने सानवी और चांदनी को बेचने की बात पता चली तो इस बार सानव ने पूपूरी तरह से तैयार थी अपनों के बिरूध खडे़ होने के लिए क्योंकि पिछली बार अपने लडी़ जंग सानवी हार गयी थी इस बार सानवी ने अपने आप बचाने के लिए मजबूत कर कर लिया था क्योंकि इस गांव की पुलिस और पचांयत दोनों अमीरयादों के हाथ बिक चुकी थी क्योंकि जब जे नाबालिक लडकी को बेचने की प्रथा शूरू की तब से गांव के लोगों ने पुलिस और पचांयत दोनों को अपनी मुठी कर लिया था और सानवी ने अपने ग्वालियर की एन जी ओ की दीदी लता को किसी तरह छुप कर फोन करके बता दिया था कि मेरे माता-पिता औ भाई ही मिल कर हमें जोर जबरदस्ती बेचने की तैयारी चल रही लेकिन सानवी की ये मदत लेने चाल भी धरी की धरी रह गयी क्योंकि जिस प्रथा को बरकरार रखने के लिए गांव बाले
कुछ भी करने को तैयार रहते पर उस एक घटना ने पूरी दुनिया के सामने इस गांव वालों की पोल पट्टी खोल कर रख दी और इस घटना प्रथा खत्म तो नही हुई लेकिन फिर इस एक घटना ने पूरी दुनिया में उजागर हो गई और समाज में और दूनिया में तरह-तरह की बाते होने लगी
और उस रात जब सानव अपने कमरे में सोने के गयी सबकुछ स्वाभाविक ही था पंरतु जैसे खुद जबालामुखी को पता नहीं होता कि उसके किस हिस्स
में आग अभ भी बाबाकी है असाहानीय पीड़ा की परिणिति कभी-कभी भयवह होती है ऐसी बात तो सभी करते हैं जब लोगों ने दूसरे दिन सानव के घर मेंचार पांच लाशें देख तो मान गये
और लाशें बडे़ मंदिर के पुजारी राजेश के साथी का मालिक मनोहरलाल की लाश सानवी के परिवार के के अलावा बाक सभी घर क ललोग सदा के लिए सो गये थे सानवी के घर बालो का जमीर तो बहुत पहल सोसो चुका था लेकिन अब शरीर की मौत अभ हुु थी और पुलिस एक एक करके सभी की शिनाख्त कर रही थी पहली चााद सानवर की मां पर डाली गई जिस मां ने बेटीयों को जन्म तो दिया लेकिन कभी मां फर्ज नही निभा पायी क्योंकि दौलत का खून मां के मुह लग चुका था और सानवी के कहना ना मानने पर मां ने जो थप्पड़ सानवी के मुंह पर जबरदस्ती मारे थे भो सानवी को आज भी याद आ रहे थे और दूसरी चादर सानवी के पिता की लाश पर डाली जो एक बाप तो बन गया लेकिन एक ब ने बेटीयों नाबालिक बच्चों को भूखे दरिंदों के फैक कर खूब धन दौलत की नदी में नहाया लेकिन बेटीयों पर तरस नही आया एक के बाद एक अमीर ग्राहकों की लाईन लगा देता जैसे कोई भेड़ बकरियों बोल ललगता है ठीक बैसे सानवी के पिता क अपनी बेटीयों से कभी प्यार किया ही था बस बेटीयों को पैसे कमाने की मशीन भर थी
क्रमशः ✍️
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