CHACHA NRI in Hindi Short Stories by Makvana Bhavek books and stories PDF | चाचा एन.आर.आई.

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चाचा एन.आर.आई.

अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान पर भाप से ज्यादा अफवाहें उड़ रही थीं। प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा गौरव पटेल अपनी किस्मत को कोस रहा था और सामने बैठे कैलाश काका कुल्हड़ में चाय ऐसे सुड़क रहे थे जैसे जिंदगी की सारी कड़वाहट उसी में घोलकर पी जानी हो।

 

गौरव ने धीरे से कहा, “काका, एक छोटा सा ही तो रोल करना है आपको।”

 

काका ने आँखें तरेरीं, “देख बेटा, पिछली बार तूने ‘छोटा सा काम’ बोलकर मुझसे मोहल्ले के चौकीदार को समझाने भेजा था, और उसने मुझे ही संदिग्ध घोषित कर दिया था। सीधे सीधे पूरी बात बता।”

 

गौरव कुर्सी खिसकाकर और पास आया, “आपको मेरे दुबई वाले अमीर चाचा बनना है।”

 

काका ने पहले उसे देखा, फिर आसमान को, फिर अपनी जेब को। “दुबई? बेटा, मेरे पास अभी बीस का नोट है, वो भी ऐसा मुड़ा हुआ कि खुद को पहचानने से मना कर दे।”

 

गौरव बोला, “पैसा नहीं दिखाना है, बस यकिन दिलाना है। एक लड़की है - बेला। उसकी मम्मी की पान का गला है। एक और लड़का है जो उसके पीछे पड़ा - चार्ली। अगर उन्हें लगे कि मेरा दुबई में करोड़ों का कारोबार है, तो?”

 

काका ने दाढ़ी खुजलाते हुए कहा, “मतलब तू लड़की पटाने के लिए बूढ़े को एन.आर.आई. बना रहा है?”

 

“देशहित में,” गौरव ने गंभीर चेहरा बनाकर कहा।

 

“देशहित" नहीं बेता यह"स्वहित" है और वह तेरा खुद का।

 

.....

 

दो दिन बाद कैलाश काका का कायाकल्प हुआ। नया कुर्ता, नकली गोल्डन चेन, बड़ी सी घड़ी और जेब में मोटा बटुआ, जिसमें असल में गौरव की आज तक पूरी बचत भरी थी।

 

आईने में खुद को देखकर काका बोले, “अबे, मैं तो खुद को लोन पास कर दूँ।”

 

शाम को जब वे बेला की दुकान पर पहुँचे तो गौरव ने बड़े उत्साह से परिचय कराया, “ये मेरे दुबई वाले चाचा हैं, इनका गोल्ड ट्रेडिंग का बड़ा काम है।”

 

काका ने भारी आवाज में कहा, “बिटिया, दुबई में तो हम लोग सोना ऐसे तौलते हैं जैसे यहाँ मूंगफली।”

 

शारदा आंटी की आँखें चमक उठीं। “अरे वाह! वहाँ तो सब अमीर होते होंगे?”

 

काका मुस्कुराए, “वहाँ गरीब वही होता है जिसके पास सिर्फ दो गाड़ियाँ हों।”

 

फिर उन्होंने पान अपने मूंह में रखते हुए पूछा, “पचास हजार का छुट्टा मिलेगा?”

 

यह सुनकर तो बेला के हाथ काँप गए।

 

दिन बीतते गए और काका ने दुबई की ऐसी-ऐसी कहानियाँ सुनाईं कि शारदा आंटी उन्हें भगवान का भेजा वरदान समझने लगीं। कभी फाइव स्टार होटल की बात, कभी मॉल में शॉपिंग, कभी “जिंदगी में पैसा बहाना भी आना चाहिए” जैसे डायलॉग। हर आउटिंग का बिल चुपचाप गौरव भरता और मन में कहता, “हे भगवान, ये प्रेम है या लोन स्कीम?”

 

उधर चार्ली रोज दुकान आता। जिम से सीधे, बालों में जेल, हाथ में सिगरेट और होंठों पर सीटी।

 

चार्ली हंसते हुए पूछता है: “काका,” “दुबई में जिम है क्या?”

 

काका बोले, “अरे वहाँ लोग नोट गिनते-गिनते ही फिट हो जाते हैं।”

 

चार्ली और काका कि बातें सुनकर  बेला खिलखिला पड़ी। और इसे देखकर गौरव के अंदर का रोमांस धीरे-धीरे जलकर राख हो रहा था।

...

 

एक रात काका ने बम फोड़ते हुए कहा, “गौरव बेटा, सोच रहा हूँ यहीं बस जाऊँ।”

 

गौरव का चेहरा ऐसे हुआ जैसे किसी ने UPI से पैसा कटने की आवाज सुना दी हो। “क्या मतलब?”

 

“अरे शारदा जी भी अकेली हैं… मैं भी अकेला। दो अकेले मिल जाएँ तो बिजली का बिल आधा।”

 

गौरव को लगा उसका पूरा प्लान उसी पर उल्टा पड़ गया है। उसने दाँत भींचकर धमकी देते हूए कहा, “या तो आप दुबई वापसी का ड्रामा करो, या मैं सच बता दूँगा।”

 

काका ने शांत स्वर में कहा, “सच बोलेगा तो तेरी बेला गई, सोच ले।”

 

"अगर यह झूठ और लंबा चला तो बेला का दुल्हा बनूं या ना बनूं भीखारी ज़रूर बन जाऊंगा।"

 

आखिर सौदा हुआ — दो हजार रुपये और “काका की दुबई वापसी”।

...

दुकान में सब इकट्ठा थे जब काका ने भारी आवाज में घोषणा की, “मुझे तुरंत दुबई जाना पड़ेगा। लेकिन जाने से पहले मैं अपनी वसीयत के बारे में बताना चाहता हूं।”

 

पूरा कमरा चुप।

 

“मेरी आधी संपत्ति गौरव के नाम है।”

 

गौरव के चेहरे पर उम्मीद की हल्की रोशनी आई।

 

“और बाकी आधी संपत्ति… मेरे प्यारे दोस्त चार्ली के नाम।”

 

ऐसा सन्नाटा छाया जैसे दुकान पर GST रेड पड़ गई हो।

 

चार्ली मुस्कुराया और बेला की आँखों में शरारत चमकी। गौरव को लगा जमीन घूम रही है।

 

काका हँसते हुए गौरव  के कान में धीरे से बोले, “बेटा, जब स्क्रिप्ट लिखो तो डायरेक्टर को भी कंट्रोल में रखो। वरना कहानी कभी भी पलत सकती है।" 

 

अगले दिन काका सच में गायब थे। न दुबई, न टिकट, न वसीयत। बस गौरव की खाली जेब और भारी अनुभव।

 

बेला ने भी साफ़ साफ़ कह दिया, “मुझे अमीर नहीं, ईमानदार इंसान चाहिए।”

 

और चार्ली? वो अब भी सीटी बजाता है, लेकिन थोड़ा कम।

 

गौरव ने उस दिन सीखा -

इश्क में निवेश करो, दिखावे में नहीं।

और बूढ़े नाविक को कभी स्क्रिप्ट मत दो… वो कहानी खुद लिख देता है।