आर्यन ने उस जली हुई चाबी को अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर से भींचा कि उसकी उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए। सूरज की पहली किरणें पहाड़ों की चोटियों पर गिर रही थीं, लेकिन उनमें वह गर्माहट नहीं थी जो डर को मिटा सके। उसे लग रहा था कि सुबह की रोशनी के साथ वह खौफनाक रात पीछे छूट गई है, लेकिन वह चाबी एक कड़वा सच बनकर उसके हाथ में चुभ रही थी। वह तेज़ी से मुख्य सड़क की ओर बढ़ने लगा, उसके कदम लड़खड़ा रहे थे
और दिल की धड़कनें किसी नगाड़े की तरह बज रही थीं। उसे बस अब इस मनहूस शहर और इन खामोश पहाड़ों से कोसों दूर निकल जाना था।
एक रहस्यमयी मुसाफ़िर
सड़क पूरी तरह सुनसान थी, जैसे पूरी दुनिया उसे अकेला छोड़ चुकी हो। तभी दूर से उसे एक पुरानी जीप की हेडलाइट्स धुंध को चीरती हुई दिखाई दीं। आर्यन ने पागलों की तरह हाथ हिलाया। जीप एक कर्कश आवाज़ के साथ उसके पास आकर रुकी। ड्राइवर एक अधेड़ उम्र का आदमी था, जिसके चेहरे पर झुर्रियों का जाल बिछा था और उसकी आँखों में एक ऐसी गहराई थी जो रूह को कंपा दे।
"होटल जाना है?" ड्राइवर ने रूखी आवाज़ में पूछा।
आर्यन ने हकलाते हुए जवाब दिया, "नहीं... नहीं! मुझे बस बस-स्टैंड छोड़ दीजिए। मुझे पहली बस पकड़कर दिल्ली निकलना है। मैं यहाँ एक पल भी और नहीं रुक सकता।"
ड्राइवर ने आर्यन को सिर से पैर तक गौर से देखा। उसकी ठंडी नज़र आर्यन के हाथ में दबी उस जली हुई चाबी पर जाकर ठहर गई। उसने एक डरावनी और फीकी मुस्कान के साथ कहा,
"बाबूजी, कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो कभी खत्म नहीं होते। और कुछ चीज़ें हमारा पीछा तब भी नहीं छोड़तीं, जब हम खुद को उनसे दूर मान लेते हैं।" आर्यन ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और चुपचाप जीप में बैठ गया।
मोबाइल का खौफनाक संदेश
जीप जैसे ही आगे बढ़ी, आर्यन के मोबाइल की स्क्रीन जगमगा उठी। सिग्नल वापस आ गए थे और नोटिफिकेशन की झड़ी लग गई थी। दर्जनों मिसकॉल्स और मैसेजेस उसके फोन पर तैर रहे थे। उसने सबसे पहले अपनी माँ का भेजा हुआ वॉयस नोट प्ले किया।
फोन से आती माँ की आवाज़ कांप रही थी:
"आर्यन! बेटा कहाँ हो तुम? तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे? कल रात पुलिस का फोन आया था... उन्हें शिमला की एक पुरानी गहरी खाई में एक कार का मलबा मिला है। वो कार दस साल पुरानी है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि उसके अंदर से कुछ ऐसे कागज़ात मिले हैं जिन पर तुम्हारा नाम और आज की तारीख लिखी है!
पुलिस कह रही है कि उस कार में कोई नहीं था... पर यह कैसे मुमकिन है? आर्यन, तुम ठीक तो हो न? घर वापस आ जाओ बेटा!"
आर्यन का शरीर पत्थर का हो गया। अगर वह आज यहाँ ज़िंदा इस जीप में बैठा है, तो उस दस साल पुरानी कार के मलबे में आज की तारीख वाले उसके कागज़ात कहाँ से आए? क्या वह वाकई एक इंसान के रूप में यहाँ मौजूद था, या वह भी उन सायों का हिस्सा बन चुका था?
आखिरी मोड़ और खौफनाक सच
तभी जीप एक तीखे मोड़ पर अचानक रुकी। सामने धुंध का एक विशाल गुबार किसी दीवार की तरह खड़ा था। ड्राइवर ने गाड़ी का इंजन बंद कर दिया और खामोश हो गया।
"गाड़ी क्यों रोक दी? आगे चलिए!" आर्यन चिल्लाया।
ड्राइवर ने धीरे से अपना सिर पीछे घुमाया। उसकी आँखों की पुतलियाँ गायब थीं, वहाँ सिर्फ एक जलती हुई लाल चमक थी।
उसने फुसफुसाते हुए कहा— "सफ़र यहीं खत्म होता है, आर्यन। तुमने सोचा कि माफ़ी माँगने से गुनाह धुल जाते हैं? अनन्या ने शायद तुम्हें माफ़ कर दिया होगा... लेकिन इस पहाड़ की मिट्टी ने तुम्हें माफ़ नहीं किया है। तुमने यहाँ की रूहों का सुकून छीना है।"
आर्यन ने घबराकर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, पर वह जाम हो चुका था। खिड़की के बाहर हज़ारों सफेद धुंधले साये खड़े थे, और उन सबके हाथों में वही 'कमरा नंबर 404' की जली हुई चाबियाँ थीं। अचानक उसे अपने बगल वाली सीट पर एक भारी ठंडक महसूस हुई। उसने मुड़कर देखा, वहाँ अनन्या बैठी थी—
उसका चेहरा आधा जल चुका था और हड्डियाँ साफ दिख रही थीं।
उसने आर्यन का हाथ पकड़ा, उसकी पकड़ बर्फीली और लोहे जैसी मज़बूत थी। उसने बहुत धीमी और डरावनी आवाज़ में कहा—
"हिसाब अब बराबर हुआ, आर्यन। दस साल पहले तुम मुझे छोड़कर भागे थे, आज मैं तुम्हें साथ ले जाने आई हूँ।"
जीप अपने आप धीरे-धीरे पीछे की ओर सरकने लगी, सीधे उस खाई की तरफ जहाँ मौत उसका इंतज़ार कर रही थी। आर्यन की चीख धुंध में दबकर रह गई।
क्या आर्यन उस खाई की गहराई में अपना अतीत ढूंढ पाएगा? या वह भी शिमला की एक अनसुनी दास्तान बनकर रह जाएगा?
तैयार हो जाइए — Chapter 8: रूहों का बसेरा