Ishq Tera Mera - 4 in Hindi Love Stories by Bella books and stories PDF | इश्क़ तेरा मेरा - 4

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इश्क़ तेरा मेरा - 4



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*Title: "इश्क तेरा मेरा भाग-4
 
*Tags:* #BusinessWar #Dhokha #Pratigya #ShauryaSinghania #Mystery #RevengeStory

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*"जिस कलम से मैंने डील साइन की, उसी से अपनी बर्बादी के कागज पर दस्तखत कर दिए"*

अभि अपनी सबसे बड़ी बिजनेस डील साइन करके कॉन्फ्रेंस रूम से बाहर निकला ही था कि भीड़ में उसे जोरदार झटका लगा। सामने जो शख्स खड़ा था, उसे देखकर अभि के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस कंपनी के साथ उसने अभी-अभी हाथ मिलाया था, उसका असली मालिक कोई और नहीं, बल्कि उसका जानी दुश्मन *शौर्य सिंघानिया* था।

अभि पीछे हटना चाहता था, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। डील पक्की हो चुकी थी। स्टांप पेपर पर उसकी किस्मत का सौदा हो चुका था।

*खुद से नफरत*  
ऑफिस से घर तक अभि खुद को कोसता रहा। "मैंने एक बार भी कंपनी का बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किया?" गुस्सा, पछतावा, डर - सब एक साथ उसके दिमाग में चल रहा था। घर पहुंचकर भी वही सवाल उसे खाए जा रहा था। 

उसे अच्छे से याद था कि कागजों पर मालिक का नाम *मिस्टर आर.के. लूथरा* था। तो फिर रातों-रात ये खेल कैसे पलट गया? क्या लूथरा सिर्फ मोहरा था?

*प्रज्ञा का साया*  
अगली सुबह अभि जवाब मांगने लूथरा के बंगले पहुंचा। चौकीदार ने बताया, "साहब तो सुबह 6 बजे की फ्लाइट से अमेरिका रवाना हो चुके।" 

इस रहस्य की गुत्थी अभी उलझी ही थी कि वापस लौटते वक्त सड़क किनारे उसे *प्रज्ञा* दिखी। वही पिंक साड़ी, वही बिखरे बाल। अभि ने चीखकर गाड़ी रोकी, पर पलक झपकते ही वो गायब हो चुकी थी। क्या ये उसका वहम था? या प्रज्ञा सच में जिंदा है?

*नदी किनारे टूटा हुआ अभि*  
टूटे हुए दिल के साथ वह सीधा नदी के किनारे जा बैठा और फूट-फूट कर रोने लगा। 

"आई एम सॉरी प्रज्ञा... मैं तुम्हें अपनी और विराट सिंघानिया की लड़ाई के बीच नहीं लाना चाहता था। मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देना चाहता था, पर तुम्हारे बिना मैं अधूरा हो गया हूँ।" उसे ये भी नहीं पता था कि प्रज्ञा इस दुनिया में है भी या नहीं।

तभी पीछे से एक साधु आए और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोले, "ये जग दो दिन का खेल है बेटा, यहाँ कुछ साथ नहीं जाता। पर प्रेम की विरह पल भर भी नहीं सही जाती। धीरज रख, तुझे तेरा खोया हुआ प्यार जरूर मिलेगा।" इतना कहकर वे धुएं की तरह गायब हो गए।

*शैतान का न्यौता*  
थका-हारा अभि घर लौटा और माँ की गोद में सिर रखकर सो गया। अगली सुबह ऑफिस में उसका दोस्त रितेश एक नई खबर लेकर आया।

"आज शाम शौर्य सिंघानिया ने 5-Star होटल में भव्य बिजनेस पार्टी रखी है - उसी कॉन्ट्रैक्ट की खुशी में जो उसने तेरे साथ साइन किया है। और सबसे बड़ी बात... तुझे भी वहाँ खास तौर पर आमंत्रित किया गया है।"

अभि के मन में खतरे की घंटी बज चुकी थी। उसे यकीन था कि शौर्य कुछ बड़ा और खतरनाक करने वाला है। *लेकिन वो क्या होगा?*

*पार्टी में एंट्री करते ही अभि के सामने जो मंजर था, उसे देखकर उसकी रूह कांप गई। स्टेज पर शौर्य के साथ खड़ी थी प्रज्ञा।

क्या वो सच में प्रज्ञा थी या उसकी हमशक्ल ये जानने के लिए आज ही फॉलो करे। 
कमेंट में अपनी राय जरूर दे।