भूमि सब कुछ इतना आसान नहीं होता बेटा।
हमारा समाज आज भी इतना विकसित नहीं है जो घटनाओं को सुनकर आसानी से समझ लें। उन्हें तो बस बाल की खाल निकालनी आती है।
वही डर तो मुझे भी सता रहा है पापा जी अगर कल को उन्हें सच्चाई पता चली तो फिर क्या होगा??
भूमि, ऐसा कुछ नहीं होगा बेटा अब तुम मान भी जाओ ।
भूमि अपने पापा के तर्क के आगे निरुत्तर थी। वह चुपचाप बस कमरे से बाहर निकल गई।
सरला भी रसोई में जाकर काम में व्यस्त हो गई और पापाजी भी मेहमानों के स्वागत की तैयारी में व्यस्त हो गए।
थोड़ी देर बाद.....
एक कार भूमि के दरवाजे पर आकर रूकती है।
पापाजी चिल्लाकर कहते हैं --सरला वे लोग आ गए हैं बाहर आ जाओ स्वागत करने के लिए ।
सरला भी फटाफट दरवाजे पर आ जाती है।
दोनों एक साथ कहते हैं,,आइए -आइए!
सब लोग आकर व्यवस्थित बैठ जाते हैं।
फिर शुरू होता है बातो का दौर !!
हंसी , ठहाके और बीच-बीच में चाय-नाश्ते का दौर !!
आधा घंटा बीत जाता है तभी आकाश की भाभी कहती हैं --अब भूमि को भी बुला लीजिए। थोड़ी बातें भूमि से भी कर लेते हैं।
सरला कहती है --क्यों नहीं, अभी बुला कर लाती हूं भूमि को !!
कुछ देर में ही भूमि सबके सामने आती है और हाथ जोड़कर सबको प्रणाम करती है।
सब लोग भूमि की ओर देखते हैं --
गेहूंआ रंग, तीखे नैन नक्श, बड़ी-बड़ी आंखें, कमर को छुती एक चोटी,आकर्षक चेहरा और सिंपल सलवार सुट पहने बहुत ही सुंदर लग रही थी भूमि।
आकाश ने नजर भर के भूमि को देखा पहले ही नजर में भूमि की सादगी आकाश के मन को भा गई । उसने महसूस किया कि उसे ऐसे ही जीवन साथी की तलाश थी जो शायद आज खत्म हो जाएगी । फिर आकाश ने अपनी निगाहें दुसरी ओर घुमा ली।
सब लोग भी खुशी-खुशी भुमि के प्रणाम का उत्तर देते हैं और उसे बैठने के लिए कहते हैं।
भूमि शामने ही एक कुर्सी पर बैठ जाती है।
तभी आकाश की भाभी कहती है-अरे वहां नहीं यहां हमारे पास आ जाओ सोफे पर ।
भूमि कुर्सी से उठकर सोफे पर जाकर बैठ जाती है।
फिर शुरू होते हैं कुछ सवाल कुछ जवाब।
भूमि से मिलकर सब लोग बहुत खुश होते हैं।
कुछ देर बाद.....
आकाश के पिता भूमि के पिता जी से कहते हैं --मुझे आपका समधि बनने में कोई एतराज नहीं अगर बच्चे तैयार हो तो।
सभी की निगाहें भूमि और आकाश पर पड़ती है ।
आकाश के चेहरे पर मुस्कुराहट थी पर भुमि के चेहरे पर खामोशी थी।
आकाश ने देखा भूमि के चेहरे पर खामोशी के साथ-साथ थोड़ी सी उदासी ,
उसे लगा जैसे भूमि इस रिश्ते से खुश नहीं है।
तभी आकाश के पिता आकाश से बोले- कहो बेटा तुम्हारा क्या ख्याल है।
आकाश कुछ कहता इससे पहले ही भाभी बोल पड़ी.. थोड़ा रुकिए पापा जी आखिर इन दोनों की पूरी ज़िन्दगी का सवाल है। थोड़ा टाइम तो इन दोनों को भी दीजिए।
आकाश ने चैन की सांस ली और मन ही मन भाभी का धन्यवाद किया भाभी ने सही समय पर आकर बात संभाल ली।
तभी आकाश के भाई ने भी कहा --मीरा सही कह रही है पापाजी थोड़ा समय इन दोनों को साथ में बिताने दीजिए बाद में कोई फैसला लीजिएगा।
बाकी लोगों ने भी सहमति में वोट दिया।
भूमि की मम्मी के मन में भी कहीं ना कहीं थोड़ा डर था पता नहीं भूमि क्या कहेगी आकाश से फिर'-- हिम्मत करके बोली जाओ भूमि आकाश को अपना घर दिखाओ।
भूमि खड़ी होती है और आकाश से कहती है चलिए..
आकाश अपने परिवार की ओर देखता है सभी के चेहर पर मुस्कुराहट थी।
तभी भाभी शरारती अंदाज में कहती है जाइए देवर जी।
आकाश मुस्कुराता हुआ भूमि के पीछे चल देता है ।
घर दिखाना तो एक बहाना होता है दरअसल उन्हें कुछ समय दिया गया था बातचीत करने को।
भूमि का घर छोटा ही था जल्द ही नीचे का एरिया खत्म हो गया और भूमि आकाश को छत पर ले आई।
छत भी छोटी ही थी ।
छत के चारों ओर गमले सजे थे कुछ फ्लावर प्लांट कुछ सो प्लांट।
बीच में एक छोटा झुला, चार कुर्सियां और एक टेबल रखा था। बहुत ही सुंदर तरीके से सजी हुई छत लग रही थी।
आकाश झुले पर बैठने हुए बोला--अरे वाह !
मुझे झूला बहुत पसंद है और आपको ?
भूमि बोली हां मुझे भी।
तभी आकाश बोला- तो फिर आइए बैठिए।
और बताइए अब आपके बारे में कुछ वैसे तो नीचे सारी बातें हो चुकी है फिर भी बातचीत शुरू करने के लिए बताइए कुछ आपकी पसंद ना पसंद वगैरा-वगैरा...