भूमि के घर पहुंचते ही..
सरला ने पश्नों की झड़ी लगा दी।
भूमि बोली --चील करो मां !!सब ठीक-ठाक था ।
मुलाकात भी अच्छी रही हमने बहुत अच्छे से दूसरे से बात की। इस बातचीत से और समझ में आ गया कि आकाश बहुत अच्छा और साफ़ दिल लड़का है मां !
सरला बेफिक्री की सांस लेते हुए बोली --और क्या चाहिए बेटा एक ऐसा जीवन-साथी जो हमें और हमारी बात को समझ सकें तो हर औरत का जीवन सफल हो जाएं।
भूमि बोली --हां मां आप सही कहते हो। और आकाश जैसा लाइफ पार्टनर मिला इसके लिए मैं बहुत खुश हूं मां।
सरला बोली --यह तो बहुत अच्छी बात है बेटा !
चलो अब बाकी बातें बाद में करेंगे तुम तैयार हो जाओ हमें मार्केट जाना है तुम्हारे पापा कब से तुम्हरा इंतजार कर रहे हैं।
ठीक है मां बस आती हूं 5मिनट में कहते हुए भुमि कमरे में चली जाती है।
10 दिन बाद.....
आकाश का कॉल आता है भूमि के मोबाइल पर.. भूमि चलो ना यार लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं।
भूमि कहती हैं --नहीं मैं नहीं आ सकती और फिर हमारी शादी को दिन ही कितने बचे हैं आकाश जी । शादी के बाद तो घूमना ही है।
पर आकाश नहीं माना वह जिद करने लगा कि मुझे अभी चलना है।
भूमि कहती हैं --मां से क्या कहूंगी ?
आकाश बोला -मां से परमिशन ले लो।
भूमि बोली ठीक है पर ..कोई देखेगा तो क्या कहेगा शादी से पहले यु घूमना उचित है क्या ?
कोई कुछ नहीं कहेगा और कहे भी तो तुम मत सुनना ठीक है।
अब चलो भी यार भूमि ।
भूमि आकाश की जीद के आगे हार जाती है और आकाश के साथ बहार जाने की मां से परमिशन ले लेती है।
थोड़ी देर बाद...
दोनों लॉन्ग ड्राइव पर घूमने निकल जाते हैं।
एक छोटे पार्क में गाड़ी रोककर दोनों बैठ जाते हैं। तभी आकाश बोला --भूमि मैं तुम्हें पाकर सचमुच बहुत खुश हूं ।
यू अपने सपनों को पूरा होते देख कर अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा है। सब कुछ कितना अच्छा लग रहा है।
भूमि भी मुस्कुराते हुए बोली --हां सब कुछ बहुत सुखद है। ऐसा लग रहा है जैसे मन पंछी बन आकाश में उड़ रहा है।
मैं भी बहुत खुश हूं बस आप सारी उम्र यू ही मेरे साथ रहना और मैं भी आपके साथ रहुंगी। चाहे परिस्थितियों कितनी भी विपरीत हो हम लोग साथ मिलकर संभाल लेंगे।
आकाश बोला --हां जरूर!!
और बातें ही बातों में कितना समय बीत गया पता ही नहीं चला शाम घिर आई थी ।
तभी भूमि ने कहा --चलो अब घर चलते हैं शाम हो चली है थोड़ी देर में ही अंधेरा हो जाएगा ।
आकाश बोला --तो किस बात का डर है मैं हूं ना आपके साथ!!
भुमि मुस्कुराते हुए बोली --जी आपके रहते मुझे किस बात का डर है मैं तो बस इसलिए कह रही थी कि समय बहुत हो गया है और हमें अंधेरे होने से पहले घर पहुंचना चाहिए।
आकाश बोला - आप ठीक कहती हो अब हमें घर चलना चाहिए। दोनों बाइक की ओर बढ़ते हैं तभी आकाश भूमि का हाथ पकड़ लेता है।
भूमि रुकती है और विस्मय भरी नजरों से आकाश की ओर देखती है !
तभी आकाश भूमि के दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर बोला --भूमि तुम सचमुच बहुत अच्छी हो तुम्हारी शालीनता मेरे मन को भा गई है । तुम्हारी बातों मे तुम्हारे संस्कार झलकते हैं।
वरना लड़कियां आजकल इतना कहां सोचती है ?
भूमि मुस्कुराते हुए बोली- तारीफ के लिए शुक्रिया जनाब ! अब चले घर।
आकाश भी मुस्कुराते हुए शरारती अंदाज में बोला -जो हुकुम मैडम जी का !
दोनों घर की ओर चल देते हैं।
कुछ दिनों बाद...
आज घर दुल्हन की तरह रोशनी से जगमगा रहा था । एक कोने में हल्की आवाज में संगीत बज रहा था।
घर के हाल में मेहमानों के बीच भूमि बैठी थी उसके बदन पर हल्दी और हाथों में मेहंदी लगी थी।
चारों और खुशियों का माहौल था सब अपनी-अपनी तैयारी में लगे थे कल बारात जो आने वाली थी।
भूमि सबसे नजरे हटाकर कभी मम्मी और पापा की तरफ देखती -दोनों कितने खुश नजर आ रहे थे।
कभी मां की आंखों में बेटी के दुर जाने की उदासी दिखती। पर सरला अपने आप को संभाल लेती क्योंकि अपनी उन्हें अपनी बेटी के विवाह की खुशी से बढ़कर और कुछ न था।
पापा ने भी खुशी -खुशी अपने जीवन की पूरी पूंजी अपनी बेटी के लिए लगा दी । अपनी बेटी के सुख के आगे उन्हें और कुछ नहीं चाहिए था।
आज सुबह ... तैयारी कुछ और तेज हो गई थी पापा सबको बार-बार इंस्ट्रक्शन दे रहे थे कहीं कुछ छूट न जाए ,कोई कमी ना रह जाए क्योंकि आज बरात आने वाली थी।
भूमि के पापा ने बारात के लिए एक रिसोर्ट बुक किया था क्योंकि वह अपनी बेटी की शादी की व्यवस्था में कोई कमी नहीं चाहते थे।
आकाश के घरवाले भी इस बात से सहमत थे और उन्होंने भी 2 दिनो के लिए इसी रिजॉर्ट को बुक कर लिया था।
शाम खत्म हो गई थी और अंधेरा हो चला था और बारात दरवाजे पर थी..
स्वागत के साथ सब बरातियों ने अंदर प्रवेश किया।
कुछ फोटो शूट के बाद खाना और फिर -शादी की रस्में में शुरू हो गई।
और अब --