Punishment… without any fault – 5 in Hindi Short Stories by Soni shakya books and stories PDF | सजा.....बिना कसूर की - 5

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सजा.....बिना कसूर की - 5

दूसरे दिन ..

आज भुमि ऑफिस से थोड़ा जल्दी घर आ गई थी ।

4:00 बजे का समय था भूमि अपने मम्मी पापा के साथ चाय पी रही थी ।

तभी आकाश की मम्मी का कॉल आता है।

सरला कॉल रिसीव करती है और अभिवादन करती है दूसरी ओर से आकाश की मम्मी भी प्रणाम करती है और कहती है --

बधाई हो बहनजी अगले महीने की 25 तारीख शादी का शुभ मुहूर्त निकाला है ।

सरला अचानक से बोली-- इतनी जल्दी  !!

क्यों कोई परेशानी है क्या आकाश की मम्मी बोली।

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है बहन जी ,दरअसल इतनी जल्दी शादी की तैयारी कैसे कर पाऊंगी‌ ।

इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है बहन जी आजकल तो सब कुछ रेडीमेड मिल जाता है ।

और अभी तो सिर्फ 5तरीख हुई है, बहुत टाइम है हमारे पास आप तो बस शादी की तैयारी करो और हम बारात लाने की तैयारी करते हैं।

सरला ने जी बहन जी कहा ,और फिर कॉल कट हो गया। 

सरल बहुत खुश थी उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी इतनी आसानी से उसकी बेटी का रिश्ता एक अच्छे घर में हो जाएगा।

मम्मी को इतना खुश देख कर भूमि ने पूछा क्या कहा उन लोगों ने मम्मी। 

सरला बोली --मैं बहुत खुश हूं तुम्हारी शादी की तारीख तय हो गई है बेटा।

25 तारीख को शुभ मुहूर्त है।

खुश तो भूमि भी थी क्योंकि आकाश जैसा सुलझा हुआ लड़का उसकी जिंदगी में आया था।

उसे भूमि के अतीत से कोई मतलब नहीं था उसे बस एक सच्चा जीवन साथी चाहिए था। जो उसने भूमि में देखा।

भूमि तुरंत ही अपने विचारों से बाहर निकाल कर बोली पर मां इतनी जल्दी, इतनी जल्दी क्या है ?

हम इतनी जल्दी इतनी सारी तैयारी कैसे कर पाएंगे ?

सरला बोलीं --कुछ नहीं बेटा सब कुछ हो जाएगा। तुम चिंता मत करो।

सरला फिर भूमि के पास आकर बैठ जती है और भूमि से पूछती है -तुम खुश हो ना बेटा!

भूमि बोली --हां मां  आकाश से बातचीत में समझ आया कि वह एक सुलझा हुआ लड़का है पर भी.. मां अतीत का वह डर नहीं जाता ।

हमेशा डर लगा रहता है कहीं कुछ गलत ना हो।

कुछ गलत नहीं होगा बेटा अभी तो तुमने कहा कि आकाश बहुत सुलझा हुआ लड़का है फिर नकारात्मक क्यों सोचती हो ?

सब ठीक हो जाएगा भगवान पर विश्वास रखो वह कभी अच्छे लोगों के साथ गलत नहीं होने देता।

पर गलत तो हुआ है ना मां..

अब जाने भी दो भूमि यु खुशी के मौके पर उदासी वाली बात नहीं करते।

तभी भूमि के  पापा भी कहते हैं --सब ठीक होगा बेटा बस तुम खुश रहो चलो अब शादी की शॉपिंग करते हैं।

दो दिन बाद...

दोपहर के समय फोन की घंटी बजती है। 

सरला अपने काम में व्यस्त थी इसलिए  काॅल रिसीव नहीं कर पाई। वह भूमि से कहती हैं --भूमि देखो किसका काल आ रहा है।

भूमि आती है तब तक कॉल कट हो जाता है ।

भूमि वापस मुड़ जाती है तभी दोबारा रिंग बजती है।

भूमि कॉल रिसीव करती है ..हेलो मैंं भूमि बोल रही हूं ।

और मैं आकाश आपकी आवाज सुनने को ही था बेताब !

भूमि के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है।

जी कहिए !!

चलो ना आज शाम को चाय पर बाहर चलते हैं ‌

भूमि ने कहा नहीं मैं नहीं आ सकती। 

क्यों भई क्या खराबी है हमारे साथ चाय पीने में अब  तो हमारी शादी भी तय हो  गई है।

हां लेकिन यु  शादी से पहले मिलना ठीक नहीं होगा।

किस जमाने की बात कर रही हो यार भूमि !!

चलो ना कुछ बातें भी कर लेंगे और कुछ समय साथ बिता लेंगे।

भूमि आकाश के आग्रह को मना नहीं कर पाई फिर बोली -मम्मी से पूछती हूं 

आकाश बोला ठीक है मैं इंतजार करता हूं तुम मम्मी से पुछकर बताओं।

भूमि अपनी मम्मी के पास जाकर खड़ी हो जाती है।

सरला भमि को देखकर कहती है -क्या हुआ किसका कॉल था। 

भूमि चुपचाप खड़ी रही। 

सरल ने दोबारा पुछा किसका कॉल था?

तब भूमि बोली आकाश का उन्होंने आज शाम मुझे चाय पर बाहर बुलाया है।

सरला पहले चुप रही फिर बोली-तो ठीक है ना चली जाओ अब आकाश कोई अजनबी नहीं है। 

पर ऐसा कुछ मत कहना बेटा जिससे हमारी बात बिगड़े।

वही तो मैं आपसे कह रही थी मां ! क्यों छुपाना है तुम्हें मेरे अतीत की सच्चाई।

डर तो आपके मन में भी है ना !!

मां -तभी तो आप मुझसे ऐसा कह रही हो। और डर वहां होता है मां जहां हम कुछ गलत कर रहे हो या कुछ गलत हो रहा हो ।

ऐसा नहीं है भूमि  मैं तो बस यु ही कह रही थी।

और फिर आकाश ने भी तो तुमसे कहां है  ना कि उसे तुम्हारे अतीत से कोई लेना-देना नहीं है ।

हां वह तो ठीक है मां पर भी एक डर है  ना मेरे अंदर ‌‌और आपके भी।

डरने की कोई बात नहीं है बेटा तुम जाओ आकाश से मिलने।

पापा सब सुन रहे थे उन्हें भी लगता था की भूमि कहीं ना कहीं सच बोल रही है पर समाज के डर से वह भी चुप थे।

भूमि आकाश को कॉल कर के कहती है कि ,वह आ रही है और तैयार हो कर आकाश से मिलने निकलती है ।

आकाश बेसब्री से रेस्टोरेंट में भूमि का इंतजार कर रहा था तभी...