मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि जो कुछ हो रहा था, वो अच्छा था या कहीं कोई बड़ी गलती होने वाली थी। एक पल के लिए मन में डर आया, लेकिन अगले ही पल मैंने सिर झटक कर सारे नेगेटिव ख़याल बाहर निकाल दिए।
“रिस्क लेने से ही किस्मत बदलती है, क्षितिज… जो डर गया, वो मर गया,” मैंने खुद से कहा।
ज़िंदगी ने मुझे वो मौका दिया था, जिसका मैं कब से इंतज़ार कर रहा था। अब पीछे हटना कमजोरी होती।
मैंने गहरी सांस ली, अपना कॉन्फिडेंस वापस जुटाया और धीरे-धीरे उसी दिशा में चल पड़ा, जिधर संजू गई थी।
मॉल के अंदर खूब चहल-पहल थी। चारों तरफ रंग, रोशनी और खुशबुओं का अजीब सा जादू फैला हुआ था। शायद ये सब मुझे इसलिए भी इतना खूबसूरत लग रहा था क्योंकि मेरी कल्पनाएं आसमान छू रही थीं।
कुछ कदम आगे बढ़ते ही फूड कोर्ट नज़र आ गया। वहीं एक टेबल पर संजू और उसकी सहेलियाँ बैठी थीं। संजू ने मुझे देखा और बिना कुछ कहे, सिर्फ आंखों से हिम्मत दी।
मीरा मेरी तरफ पीठ करके बैठी थी। उसने हरे रंग का ब्लैक एम्ब्रॉयडरी वाला सूट पहना हुआ था। उसके घुंघराले बाल कमर तक फैले हुए थे। मैं धीरे-धीरे चलता हुआ उनकी टेबल के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया।
अब तक उसकी बाकी सहेलियाँ भी मुझे नोटिस कर चुकी थीं। उनके चेहरों पर हल्की मुस्कान आ गई थी।
मैंने अक्सर सुना था कि अमीर लड़कियाँ घमंडी और अकड़ू होती हैं, लेकिन इन लड़कियों में मुझे ऐसी कोई बात नज़र नहीं आई। या शायद इतनी जल्दी किसी को जज करना गलत था।
मैं दिखावे के लिए मेन्यू देखने लगा, मगर मेरी तिरछी नज़र बार-बार मीरा पर ही जा रही थी।
वो हँस रही थी…
और उसकी हँसी बेहद खूबसूरत थी।
उसका रंग सांवला था, मगर खुद को संभालने और पेश करने का सलीका कमाल का था। वो अपनी पर्सनैलिटी को बड़े कॉन्फिडेंस के साथ कैरी करती थी। शायद यही वजह थी कि साधारण शक्ल होने के बावजूद उसमें एक अलग सा आकर्षण था।
मैं उसे लगातार देखे जा रहा था कि अचानक उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई। वो एक पल के लिए चौंकी। मैंने मुस्कुराकर दोस्ती वाला इशारा किया, मगर उसने तुरंत मुंह फेर लिया।
मेरा कॉन्फिडेंस एकदम हिल गया।
“पता नहीं लड़के दो-दो, तीन-तीन गर्लफ्रेंड कैसे बना लेते हैं… मुझे तो एक लड़की को इम्प्रेस करने में ही आधी ज़िंदगी निकलती दिख रही है,” मैंने मन ही मन सोचा।
संजू ने शायद मीरा का मूड भांप लिया था। उसने उससे कुछ कहा, फिर बाकी सहेलियाँ भी मेरी तरफ देखकर हँसने लगीं। मीरा ने गुस्से भरी नज़र से मुझे देखा, तो मैं थोड़ा संभलकर बैठ गया।
तभी वेटर उनकी टेबल पर एक खूबसूरत सा केक रख गया।
संजू उठी और मेरी तरफ चली आई।
“लगता है आप अकेले हैं… अगर आपको बुरा न लगे तो आप हमारे साथ जॉइन कर सकते हैं,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
उसकी बात का मतलब साफ था — वो मुझे मीरा से जान-पहचान बढ़ाने का मौका दे रही थी।
मैं तो जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रहा था। मैंने जल्दी से अपना फूलों का बुके उठाया और उनकी टेबल की तरफ बढ़ गया।
मीरा के सामने पहुँचकर मैंने मुस्कुराते हुए उसे फूल दिए।
“हैप्पी बर्थडे…” मैंने प्यार से कहा।
मीरा मुझे हैरानी से बड़ी-बड़ी आँखों से देख रही थी।
मीरा कुछ पल तक बिना पलक झपकाए मुझे देखती रही। जैसे उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि अचानक ये सब क्या हो रहा है। उसके हाथ अब भी हवा में रुके हुए थे और मैं फूलों का बुके उसकी तरफ बढ़ाए खड़ा था।
संजू ने मुस्कुराते हुए मीरा की कुहनी में हल्का सा धक्का दिया।
“अरे ले भी लो… लड़का इतनी हिम्मत करके आया है,” उसने शरारती अंदाज़ में कहा।
बाकी लड़कियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ीं।
मीरा ने धीरे से बुके मेरे हाथों से लिया। उसके चेहरे पर हल्की झिझक थी, मगर आँखों में गुस्सा पहले जितना नहीं था।
“थैंक यू,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
उसकी आवाज़ उम्मीद से कहीं ज्यादा नरम थी।
मैंने कुर्सी खींचकर बैठते हुए खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन दिल अब भी पहले की तरह तेज़ धड़क रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे मेरी धड़कनों की आवाज़ पूरे फूड कोर्ट में गूंज रही हो।
“मेरा ख्याल है पहले इंट्रोडक्शन हो जाना चाहिए…” संजू ने शरारती मुस्कान के साथ कहा।
उसकी बात सुनकर बाकी सहेलियाँ भी बड़े ध्यान से मुझे देखने लगीं। ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई इंसान नहीं, बल्कि इंटरव्यू देने आया कोई उम्मीदवार हूँ।
तभी उनमें से एक लड़की अचानक बोली—
“अरे… आप वही हैं ना, जो कल उस कैफे में हमारे साथ वाली सीट पर बैठे थे… और जिनकी नज़र बार-बार मीरा पर जा रही थी?”
ये अनुष्का थी। उसकी बात खत्म होते ही पूरी टेबल ठहाके लगाकर हँस पड़ी।
“वैसे मिस्टर…” अनुष्का ने अपनी कॉफी का कप टेबल पर रखते हुए कहा, “उस दिन भी आपको मीरा के साथ वाली टेबल ही मिली थी… और आज भी आप फिर से मीरा के बराबर वाली टेबल पर बैठे थे। ये सिर्फ इत्तेफाक था… या कुछ और?”
मेरा चेहरा एकदम गर्म हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने सबके सामने मेरी चोरी पकड़ ली हो।
मीरा ने भी हैरानी से मेरी तरफ देखा। फिर अपनी सहेलियों को घूरते हुए बोली—“तुम लोग भी ना… कुछ भी बोलती रहती हो।”
लेकिन उसकी आवाज़ में झुंझलाहट कम और शर्म ज्यादा थी। मैंने खुद को संभालते हुए हल्की मुस्कान दी।
“असल में… वो कैफे अच्छा लगा था,” मैंने सफाई देने की कोशिश की। “कैफे अच्छा लगा था… या कैफे में बैठी कोई लड़की?” संजू ने तुरंत बात काटी।
अब तो सबकी हँसी और तेज़ हो गई। मैं बस मुस्कुराकर रह गया। क्योंकि सच बोलने की हिम्मत नहीं थी… और झूठ बोलना आता नहीं था।
“वैसे नाम क्या है आपका, मिस्टर सीक्रेट ऑब्जर्वर?” अनुष्का ने मज़ाकिया अंदाज़ में पूछा।
“क्षितिज…” मैंने धीरे से जवाब दिया। “ओहो… नाम तो बड़ा फिल्मी है,” पीछे बैठी एक लड़की बोली।
मुझे लग रहा था ये लड़कियाँ तो अपनी बातों से ही मुझे मार डालेंगी।
एक के बाद एक सवाल… ऊपर से सबकी नज़रें सिर्फ मुझ पर टिकी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी कोर्ट में खड़ा हूँ और ये सारी लड़कियाँ मिलकर मेरी क्लास ले रही हैं।
मैंने पानी का गिलास उठाकर जल्दी से एक घूंट लिया ताकि अपनी घबराहट छुपा सकूँ।
“और ये हैं हमारी बर्थडे गर्ल — मीरा,” संजू ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ इशारा किया। मीरा ने हल्के से मेरी तरफ देखा।
“Hello…” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
बस एक छोटा सा शब्द… लेकिन ना जाने क्यों वो मेरे कानों में देर तक गूंजता रहा।
“hello…” मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया। उस पल पहली बार ऐसा लगा जैसे मीरा ने मुझे अजनबी नहीं समझा।
“हे अनुष्का… मैंने वहाँ ‘लिबास’ के शोरूम पर एक बहुत ज़बरदस्त ड्रेस देखी है। चलो, मैं तुम्हें दिखाती हूँ।”अचानक संजना अपनी सीट से उठ खड़ी हुई।
“हाँ हाँ, चल ना!” अनुष्का भी तुरंत उत्साहित होकर बोली।
फिर उसने केक खाने में व्यस्त रुबीना की तरफ देखा— “क्यों रुबीना, तुम भी चल रही हो ना?”
रुबीना ने आराम से केक का एक और निवाला मुँह में डालते हुए कहा— “नहीं यार… तुम लोग जाओ। मैं यहीं ठीक हूँ।”
बस फिर क्या था…अनुष्का और संजना ने उसे ऐसी नज़रों से घूरा कि बेचारे के हाथ का चम्मच तक रुक गया।“अच्छा बाबा… चल रही हूँ,” वो बड़बड़ाई। ये सब देखकर मीरा भी उठने लगी—
“मैं भी चलती हूँ तुम्हारे साथ…” “अरे नहीं!” संजना तुरंत बोली, “तुम लोग बैठो… ज़रा बातें-वाते करो। हम बस अभी आते हैं।”
उसने आखिरी लाइन बोलते वक्त मुझे देखकर आँख दबाई। मैं समझ गया था कि ये सब जानबूझकर हो रहा है।
इससे पहले कि मीरा कुछ और कहती, तीनों रुबीना को लगभग खींचते हुए वहाँ से चली गईं। और अगले ही पल…पूरी टेबल पर सिर्फ मैं और मीरा रह गए।
अचानक माहौल बिल्कुल बदल गया। अभी तक जो जगह हँसी और शोर से भरी हुई थी, वहाँ अब एक अजीब सी खामोशी फैल गई थी।
मैंने चुपके से मीरा की तरफ देखा। वो अपने हाथों की उंगलियों से केक की प्लेट के किनारे को हल्के-हल्के छू रही थी। शायद वो भी थोड़ा नर्वस थी।
मेरा दिल फिर से तेज़ धड़कने लगा। इतनी देर से मैं इसी पल का इंतज़ार कर रहा था…
लेकिन अब जब मीरा सामने अकेली बैठी थी, तो समझ ही नहीं आ रहा था कि बात कहाँ से शुरू करूँ।
“सॉरी… मुझे पता नहीं था आपका बर्थडे है, वरना मैं आपके लिए कोई गिफ्ट ज़रूर लाता।” मैंने एक नज़र मीरा पर डाली।
सर से पैर तक ब्रांडेड चीज़ों में सजी हुई थी वो। उसकी घड़ी, बैग, कपड़े… सब कुछ उसकी अमीरी साफ दिखा रहे थे। एक पल के लिए मुझे खुद पर हँसी आई।
ये अमीरज़ादी मेरे बजट से बहुत बाहर थी…लेकिन दिल कहाँ ये सब मानता है। इम्प्रेस तो मुझे फिर भी करना था। मीरा ने हल्का सा भौंहें उठाईं—
“नहीं… आप मेरे लिए गिफ्ट क्यों लाते?” उसका सवाल सीधा था… और मैं थोड़ा गड़बड़ा गया।“नहीं मतलब… ऐसे ही… दोस्ती में…” मैंने अटकते हुए कहा।
मीरा कुछ पल तक मुझे देखती रही। फिर उसने अपनी कुर्सी पर थोड़ा आगे झुकते हुए कहा—“देखिए… मुझे साफ बातें करना और सुनना पसंद है।”
उसकी आँखें सीधा मेरी आँखों में थीं। “आप मुझसे क्या चाहते हैं?” उसका इतना सीधा सवाल सुनकर मेरा दिमाग कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल खाली हो गया।
मैंने सोचा भी नहीं था कि मीरा इतनी स्ट्रेट फॉरवर्ड होगी। मेरे गले में जैसे शब्द अटक गए। क्या बोलूँ?
क्या सीधे शादी के लिए प्रपोज़ कर दूँ? नहीं… नहीं… शायद वो बहुत जल्दी हो जाएगा। और वैसे भी, अभी तक तो उसने मुझे ठीक से जाना तक नहीं था।
मैंने खुद को संभालते हुए हल्की सांस ली। “सच कहूँ?” मैंने धीरे से कहा। मीरा बिना कुछ बोले मुझे देखती रही। “मुझे… आप अच्छी लगीं।”
ये कहते वक्त मेरी धड़कनें फिर तेज़ हो गईं। “कैफे में पहली बार देखा था आपको… फिर ना जाने क्यों बार-बार आपका चेहरा दिमाग में आता रहा।”
मीरा के चेहरे के भाव हल्के से बदले, मगर वो अब भी चुप थी। “मैं कोई फ्लर्ट नहीं हूँ,” मैंने मुस्कुराने की कोशिश की, “ना ही मुझे लड़कियों से बात करने का ज्यादा अनुभव है। शायद इसलिए थोड़ा अजीब लग रहा हूँ आपको।” उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई। “थोड़ा?” उसने धीरे से पूछा। मैं भी हँस पड़ा—
“ठीक है… बहुत ज्यादा।” पहली बार मीरा खुलकर मुस्कुराई। और उसकी वो मुस्कान देखकर मुझे लगा…
शायद मैंने गलत शुरुआत नहीं की थी। मीरा कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही। उसकी आँखों में अब पहले जैसी सख्ती नहीं थी। शायद वो मुझे समझने की कोशिश कर रही थी।
“तो… सिर्फ मुझे देखकर आपको लगने लगा कि आप मुझे पसंद करते हैं?” उसने धीरे से पूछा।
उसके सवाल में मज़ाक कम और जिज्ञासा ज्यादा थी।
मैंने हल्की सांस छोड़ी। “पसंद शायद चेहरे से शुरू होती है,” मैंने कहा, “लेकिन सिर्फ चेहरे पर खत्म नहीं होती।”
मीरा चुपचाप सुनती रही। “आपको देखकर पहली बार लगा था कि आप बाकी लड़कियों जैसी नहीं हैं। पता नहीं क्यों… लेकिन आपकी आँखों में एक अजीब सी सादगी लगी मुझे।”
मेरी बात सुनकर उसने हल्का सा सिर झुका लिया। “और अगर मैं सच में वैसी ना निकली जैसा आप सोच रहे हैं?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
“तो भी जानना चाहूँगा,” मैंने बिना सोचे जवाब दिया। वो पहली बार थोड़ा असहज हुई। शायद उसे मेरे जवाब की उम्मीद नहीं थी।
कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही। फूड कोर्ट का शोर अब भी आसपास था, लोग आ-जा रहे थे, बच्चे हँस रहे थे… मगर उस वक्त मुझे सिर्फ मीरा की धीमी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
“आप हमेशा ऐसे ही बातें करते हैं?” उसने अचानक पूछा।
“कैसे?”
“दिल से।”
मैं हल्का सा मुस्कुराया।
“नहीं… हमेशा नहीं। सिर्फ तब… जब सामने वाला इंसान खास लगे।”
मीरा ने तुरंत नज़रें दूसरी तरफ घुमा लीं।
लेकिन उसके होंठों पर आई छोटी सी मुस्कान छुप नहीं पाई।
उसी वक्त उसका फोन बजा।
उसने स्क्रीन देखी और हल्का सा चेहरा बनाया।
“मम्मा का कॉल है,” उसने धीमे से कहा।
फिर फोन उठाकर थोड़ी दूर चली गई।
मैं उसे जाते हुए देखता रहा।
उसके बाल चलते वक्त हल्के-हल्के हवा में लहरा रहे थे। और मैं मन ही मन खुद पर हैरान था…
जिस लड़की से ठीक से बात करने की हिम्मत नहीं थी, उसी के सामने मैं अपने दिल की आधी बातें कह चुका था।
तभी पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
मैंने पलटकर देखा।
संजू, अनुष्का और रुबीना वापस आ चुकी थीं।
तीनों के चेहरों पर वैसी ही शरारती मुस्कान थी।
“क्या बात है भाई…” संजू मेरी बगल वाली कुर्सी पर बैठते हुए बोली, “हम तो बस दस मिनट के लिए गए थे… और यहाँ तो माहौल ही बदल गया।”
अनुष्का ने तुरंत मीरा की खाली कुर्सी की तरफ देखा— “लगता है हमारी बर्थडे गर्ल किसी को भाव देने लगी है।”
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही मीरा वापस आ गई। उसने आते ही सबको घूरा— “तुम लोग बहुत फालतू हो।”
“और तुम बहुत लाल हो रही हो,” रुबीना ने हँसते हुए कहा। मीरा तुरंत चुप हो गई।
और मैं…बस उसे देखकर मुस्कुरा दिया।
यह थी मीरा से उस दिन मेरी पहली मुलाकात, यानी मेरी ज़िंदगी के नए मोड़ की शुरुआत। उस रात घर आने के बाद मैं पूरी रात सो नहीं पाया। मुझे डर लग रहा था कि कहीं यह “मछली” हाथ से फिसल न जाए।
लेकिन वहीं एक सवाल मुझे परेशान कर रहा था—उसने मेरे बारे में ज़्यादा कुछ नहीं बताया था। मेरे हुलिए से वह सब इंप्रेस थी, इतना अंदाज़ा तो उसे लग ही गया होगा कि मैं कोई “फीचर” तो नहीं, बल्कि एक अच्छे घर से ही हूँ। इसलिए किसी को भी मुझसे बात करते हुए कोई अलग बात मैंने महसूस नहीं की थी.
अब देर करने का कोई मतलब नहीं रह गया था। हर बीतता पल जैसे मेरे खिलाफ साजिश कर रहा था। मुझे इसे जितनी जल्दी हो सके, शादी तक ले जाना था—क्योंकि अब मेरे बुरे हालात का अंत सिर्फ वहीं छिपा था।