episode 12 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | 50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 12

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 12

(अदालत का भारी दरवाजा खुलने की गूंज। कमरे में वकीलों की कानाफूसी और जजों के हथौड़े (Gavel) की ठक-ठक की आवाज़। आर्यन के जूतों की आवाज़ जो अब बहुत धीमी और स्थिर है।)
अदालत का वह कमरा बीस साल पहले भी ऐसा ही था, लेकिन आज आर्यन की नज़र में सब कुछ बदल चुका था। हवा में फाइलों की पुरानी महक और कानून की कठोरता का एक अजीब सा मिश्रण था। आर्यन कटघरे (Witness Stand) की तरफ बढ़ा। उसके पैर कांप नहीं रहे थे। बीस साल पहले इसी जगह पर खड़े होकर उसने समीर के खिलाफ झूठ बोला था, और आज वह उसी जगह पर खड़ा होकर खुद को मिटाने के लिए तैयार था।
सीन 1: जज का रहस्यमयी चेहरा
जज की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति ने चश्मा उतारा। वह बीस साल पहले वाला जज नहीं था, बल्कि वही 'अतीत का अक्स' था जो उसने हवेली की यादों में देखा था। उस जज की आँखें आर्यन की रूह को चीर रही थीं।
"मिस्टर आर्यन मल्होत्रा," जज ने कहा, उनकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी। "बीस साल पहले इसी अदालत ने एक निर्दोष को सज़ा सुनाई थी। आज आपने खुद इस केस को दोबारा खोलने की अपील की है। क्या आप जानते हैं कि इसका परिणाम क्या हो सकता है?"
आर्यन ने एक गहरी सांस ली। "जी हुज़ूर। मैं जानता हूँ। मैं यहाँ कोई सफाई देने नहीं, बल्कि अपनी उम्रकैद की मांग करने आया हूँ।"
कमरे में सन्नाटा छा गया। वकीलों के समूह में एक अजीब सी हलचल हुई। आर्यन ने अपनी नज़रें घुमाईं। अदालत में वह भीड़ नहीं थी जो बीस साल पहले थी। वहां सिर्फ वे लोग थे जिन्हें उसने तबाह किया था—समीर, आयशा, माया, और वे गुमनाम चेहरों वाले कर्मचारी। सब खामोश थे, जैसे वे आर्यन के एक-एक शब्द को चबा रहे हों।
सीन 2: 40वां दिन—सच का पहला पन्ना
आर्यन ने अपनी नोटबुक से कागज़ निकाला।
"हवेली के उस सन्नाटे ने मुझे सिखाया कि दौलत की चमक कितनी खोखली होती है," आर्यन ने बोलना शुरू किया। "मैंने बीस साल पहले जो गवाही दी थी, वह पूरी तरह मनगढ़ंत थी। समीर ने चोरी नहीं की थी, उस कंपनी को लूटने वाला मैं था। मैंने न केवल समीर को फँसाया, बल्कि माया को भी अपनी साज़िश का मोहरा बनाया।"
उसका गला भर आया। "मैंने आयशा को भी अपनी बेटी नहीं, बल्कि एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया। मैं एक ऐसा अपराधी हूँ जिसे कानून ने नहीं, बल्कि मेरे अपने मन ने पंद्रह साल पहले ही सज़ा देना शुरू कर दिया था।"
अदालत का माहौल गर्म हो गया। सामने बैठे वकील खड़े हो गए, "हवेली के ढहने के बाद मिस्टर मल्होत्रा मानसिक रूप से अस्थिर हैं, उनकी बातों को सबूत नहीं माना जा सकता!"
सीन 3: मानसिक युद्ध और सबूत
आर्यन ने अपना हाथ उठा लिया। "मानसिक रूप से अस्थिर? शायद। लेकिन यह सच्चाई तो स्थिर है! मेरे पास सबूत हैं।"
उसने अपनी जेब से वह 'जंग लगी चाबी' निकाली और उसे टेबल पर रखा। "यह चाबी उस गुप्त अलमारी की है, जिसमें मेरी सारी काली कमाई और समीर के खिलाफ रचे गए दस्तावेज़ों की मूल कॉपी है। वे दस्तावेज़ आज भी उसी पुरानी हवेली के मलबे के नीचे, एक कंक्रीट की तिजोरी में सुरक्षित हैं। आप खुदाई करवा सकते हैं।"
समीर का वकील खड़ा हुआ, "अगर ऐसा है, तो यह कबूलनामा अदालत रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए।"
जज ने हथौड़ा मारा। "आर्यन मल्होत्रा, क्या आप जानते हैं कि इस कबूलनामे के बाद आपको ज़मानत नहीं मिलेगी?"
आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, "हुज़ूर, मैं ज़मानत के लिए नहीं, मुक्ति के लिए आया हूँ।"
सीन 4: 40वें दिन की रात—अदालत से जेल तक
अदालत की सुनवाई लंबी चली। आर्यन ने अपना पूरा अतीत उगल दिया। उसने हवेली की उन दीवारों के बारे में बताया जहाँ उसने सब कुछ छिपा रखा था। जैसे-जैसे वह सच बोल रहा था, उसे महसूस हो रहा था कि उसके सीने का भारी बोझ कम हो रहा है।
शाम को, जब उसे पुलिस हिरासत में वापस ले जाया जा रहा था, उसने देखा कि अदालत के बाहर वही सन्नाटा था जिसे वह पिछले 40 दिनों से महसूस कर रहा था। लेकिन आज, वह सन्नाटा डरावना नहीं था। वह शांति का प्रतीक था।
समीर, जो वहां खड़ा था, अब आर्यन की आंखों से ओझल नहीं था। वह वहां खड़ा होकर उसे देख रहा था—न गुस्से से, न प्यार से, बस एक अजीब सी खामोशी के साथ।
सीन 5: अंतिम पड़ाव की आहट
आर्यन को जेल की कोठरी में वापस डाल दिया गया। लेकिन आज की कोठरी अलग थी। आज उसमें कोई भूत नहीं था, कोई साया नहीं था।
"आर्यन?" एक आवाज़ आई। वह आयशा की थी।
आर्यन ने देखा, कोठरी के बाहर आयशा खड़ी थी। उसने हाथ जोड़ रखे थे। "मैंने आपको माफ कर दिया है, पापा। अब हवेली की दीवारें आपको और नहीं डराएंगी।"
आर्यन ने उसे छूने की कोशिश की, लेकिन वह फिर से धुंध में बदल गई। "यह सब क्या है?"
कोठरी के कोने में एक छोटी सी स्क्रीन जल उठी। उस पर एक कैलेंडर था—50 दिनों का। 40 दिन पूरे हो चुके थे। 10 दिन बाकी थे।
नैरेटर: 40 दिन बीत चुके हैं। आर्यन ने सच बोल दिया है, उसने अदालत के सामने हार मान ली है। उसने प्रायश्चित का कड़वा घूँट पी लिया है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अब शेष 10 दिन उसे उस 'सजा' के लिए तैयार कर रहे हैं जो असल में उसकी आत्मा को शुद्ध करेगी।
(सस्पेंस पॉइंट: आधी रात को कोठरी का दरवाज़ा खुला। वहां कोई गार्ड नहीं था। बाहर एक लंबी सुरंग थी जो सीधे उस 'अंतिम अलमारी' वाले तहखाने की ओर जा रही थी। एक आवाज़ आई—"आर्यन, अगर तुम सच में निर्दोष महसूस करना चाहते हो, तो एक बार फिर उस अतीत में जाओ जहाँ सब कुछ शुरू हुआ था।" क्या आर्यन उस सुरंग में जाएगा?)
लेखक: प्रिया
अगले एपिसोड में: तहखाने का वो आखिरी राज़, जो आर्यन को पूरी तरह बदल देगा। क्या वह इस सुरंग से वापस आ पाएगा?