एपिसोड 9: खूनी पीछा और कैदो का अंत
"गुनाह का घड़ा जब भर जाता है, तो मौत का फंदा खुद-ब-खुद गले में आ जाता है..."
— समीर ख़ान
शिकागो का हाईवे इस वक़्त बिल्कुल सुनसान था, और उस सन्नाटे को चीरती हुई काशिफ की गाड़ी १४० की स्पीड से न्यू यॉर्क की तरफ भाग रही थी। हीर ने दुल्हन का भारी जोड़ा उतारकर साधारण कपड़े पहन लिए थे। रहमान ने उसका हाथ थाम रखा था, दोनों के दिलों की धड़कनें साफ़ सुनी जा सकती थीं। काशिफ लगातार रियर-व्यू मिरर में देख रहा था। अचानक, अंधेरे को चीरती हुई तीन गाड़ियों की तेज़ हेडलाइट्स उनके पीछे दिखाई दीं। कैदो के शूटर पहुँच चुके थे।
"कदम संभालो! वो लोग आ गए!" काशिफ ने चिल्लाकर कहा और गाड़ी की रफ़्तार और बढ़ा दी। पीछे से अचानक गोलियों की बौछार शुरू हो गई। 'ठां! ठां! ठां!' गोलियाँ काशिफ की गाड़ी के पिछले शीशे और बॉडी पर आकर टकराईं। शुक्र था कि गाड़ी बुलेटप्रूफ थी, इसलिए गोलियाँ अंदर नहीं आ सकीं। लेकिन कैदो के गुर्गे हार मानने वाले नहीं थे, उन्होंने अपनी गाड़ियों से काशिफ की एसयूवी को साइड से टक्कर मारना शुरू कर दिया।
हाईवे के मोड़ पर एक ज़बरदस्त टक्कर हुई। एक भारी बुलेट काशिफ की गाड़ी के पिछले टायर को चीरती हुई निकल गई। टायर फट गया और गाड़ी अनियंत्रित होकर घिसटती हुई हाईवे के किनारे बने एक बेहद पुराने, सुनसान और बंद पड़े केमिकल वेयरहाउस (गोदाम) के गेट को तोड़ती हुई अंदर जाकर रुक गई। गाड़ी का बोनट पूरी तरह डैमेज हो चुका था और उसमें से धुआँ निकल रहा था।
"गाड़ी छोड़ो! अंदर भागो!" काशिफ ने चिल्लाया। रहमान ने हीर का हाथ पकड़ा और तीनों जान बचाने के लिए उस विशाल और अंधेरे वेयरहाउस के अंदर भाग खड़े हुए। चारों तरफ पुराने लोहे के ड्रम और बड़ी-बड़ी मशीनें धूल फाँक रही थीं।
तभी वेयरहाउस का मुख्य दरवाज़ा चरमराते हुए खुला। हाथ में जलती हुई टॉर्च और लोडेड गन लिए कैदो अपने छह हथियारबंद गुंडों के साथ अंदर दाखिल हुआ। उसकी आँखों में अंधा खौफ और पागलपन था।
"हीर! रहमान! बाहर आओ! तुम लोग मुझसे भागकर इस दुनिया के किसी कोने में नहीं जा सकते। आज इस रांझा की आख़िरी धुन यही गूँजेगी!" कैदो की भारी आवाज़ उस खाली गोदाम में गूँजकर और डरावनी लग रही थी।
काशिफ ने एक मशीन के पीछे से कैदो के एक गुंडे पर अचानक हमला कर दिया और उसकी गन छीन ली। दोनों तरफ से खूनी गोलीबारी शुरू हो गई। काशिफ अकेले तीन गुंडों को उलझाए हुए था, लेकिन तभी कैदो ने रहमान और हीर की परछाई देख ली। वह शातिराना अंदाज़ में हंसते हुए उनकी तरफ बढ़ा। रहमान ने हीर को एक बड़े केमिकल ड्रम के पीछे छुपाया और खुद निहत्था कैदो के सामने आ गया।
"कैदो! जंग तुम्हारी मुझसे है, हीर को छोड़ दो," रहमान ने अपनी कड़क आवाज़ में कहा। कैदो ने गन रहमान के सीने पर तान दी। "तुम्हारी जुर्रत कैसे हुई भिखारी! मेरी चुनी हुई लड़की पर आँख डालने की कीमत अब तुम अपनी जान देकर चुकाओगे।" कैदो ने जैसे ही ट्रिगर दबाने के लिए उंगली घुमाई, हीर ड्रम के पीछे से बिजली की फुर्ती से निकली। उसने पास पड़ी एक भारी लोहे की कड़क रॉड उठाई और अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए कैदो के सिर के पिछले हिस्से पर दे मारी।
'धड़ाक!' कैदो का संतुलन बिगड़ गया और वह दर्द से चीख उठा। लड़खड़ाते हुए उसका हाथ ट्रिगर पर दब गया और बंदूक से निकली गोली सीधे सामने रखे एक ज्वलनशील केमिकल के हाई-प्रेशर ड्रम में जा लगी। ड्रम से गैस लीक होने लगी और पास ही पड़े काशिफ की गोलीबारी के स्पार्क (चिंगारी) से वहाँ एक भयानक ब्लास्ट हुआ—'बूम!'
पल भर में पूरे वेयरहाउस में आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। कैदो उस ब्लास्ट के झटके से ज़मीन पर गिरा और उसके ऊपर जलते हुए लोहे के कई भारी ड्रम आ गिरे। वह चीखता रहा, तड़पता रहा, लेकिन आग की लपटों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। उसका घमंड, उसका लालच और उसका खौफनाक वजूद उसी आग में जलकर हमेशा के लिए स्वाहा हो गया।
आग तेज़ी से फैल रही थी और छत के हिस्से टूटकर गिर रहे थे। काशिफ ने ऐन वक़्त पर दौड़कर रहमान और हीर का हाथ पकड़ा और पीछे के टूट चुके दरवाज़े से उन्हें खींचकर बाहर निकाला। जैसे ही वे बाहर आए, पूरा वेयरहाउस एक बड़े धमाके के साथ ढह गया। आसमान में काले धुएँ का गुबार उठ रहा था, और उस धुएँ के बीच सदियों पुराने एक विलेन का खौफनाक अंत हो चुका था। हीर ने रहमान को कसकर गले लगा लिया, दोनों सुरक्षित थे और उनकी मोहब्बत इस अग्निपरीक्षा में जीत चुकी थी। (जारी है )
लेखक_ समीर खान