टोनी और बिल की खौफनाक मौत के बाद, बचे हुए 8 लोगों (लारा, सोफिया, मैट, पॉल, ऐशली और रोज़ी) के पैरों तले से मानो ज़मीन ही खिसक गई थी। शाम ढल चुकी थी और अमेज़न के जंगल पर एक बार फिर काली, डरावनी रात अपनी चादर बिछा रही थी। भूख से सबके पेट में मरोड़ उठ रही थी और प्यास से गले सूखकर काँटा हो चुके थे। लारा ने किसी तरह बांस काटकर सबको थोड़ा पानी तो पिलाया, लेकिन जंगल से बाहर निकलने का कोई रास्ता दूर-दूर तक समझ नहीं आ रहा था। हारकर, वे सब फिर से उसी पुरानी चट्टान की गुफा में आकर एक साथ बैठ गए। गुफा में सिर्फ़ सन्नाटा और अपनों को खोने का मातम था।
रात के करीब 11 बजे होंगे। गुफा के कोने में सूखी लकड़ियों की हल्की सी आग सुलग रही थी, जिसकी रोशनी में सबके चेहरे खौफ से पीले दिख रहे थे। कोई नहीं बोल रहा था, क्योंकि सब जानते थे कि इस नर्क में अगला नंबर किसी का भी हो सकता है। अचानक पॉल ने अपनी घुटनों में छुपाई गर्दन उठाई। उसकी आँखें लाल थीं। उसने लारा की तरफ़ देखा और एक ठंडी, कड़वी आवाज़ में पूछा,
लारा... एक बात बताओ। तुम कह रही हो कि तुम्हें ये सब तुम्हारे डैड ने सिखाया, जो एक बड़े फॉरेस्ट साइंटिस्ट थे। अगर तुम्हारे डैड इतने बड़े जानकार और रेंजर थे, तो तुम स्कूल और कॉलेज में हमेशा स्कॉलरशिप पर क्यों पढ़ती थी? तुम अपनी फीस के लिए इतनी परेशान क्यों रहती थी? तुम्हारे घर में पैसों की इतनी कमी क्यों थी?
पॉल की बात सुनकर ऐशली के चेहरे पर एक शातिर और कड़वी मुस्कान आ गई। वह अपनी फटी हुई ब्रैंडेड जैकेट को समेटते हुए हंसकर बोली,
हाँ पॉल, सही कहा तुमने। मुझे तो लगता है यह लारा सिर्फ हमदर्दी (Sympathy) बटोरने के लिए झूठ बोल रही है। इसके डैड कोई रेंजर नहीं होंगे, बल्कि जंगल में सूखी लकड़ियां बीनने वाले कोई गरीब मजदूर होंगे। तभी तो मैडम हमेशा फटे पुराने बैग लेकर स्कूल आती थी और आज यहाँ हमारी बॉस बन रही हैं। इस कंगाली में भी इसे हम सबकी हमदर्दी चाहिए!
रोज़ी ने भी ऐशली की बात पर हामी भरते हुए लारा को नफ़रत से घूरा।
सोफिया गुस्से से खड़ी हो गई,
"ऐशली! तुम्हारी ज़बान काट दूंगी मैं! बिल और टोनी मर चुके हैं और तुम्हें अब भी अमीरी-गरीबी की सूझ रही है?
लेकिन लारा ने सोफिया का हाथ पकड़कर उसे वापस बिठा दिया। लारा के चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं था, सिर्फ़ एक गहरा, पुराना दर्द था जो उसकी आँखों में तैर आया था।
लारा ने आग की लपटों को देखते हुए एक लंबी सांस ली और बोलना शुरू किया,
पॉल... तुमने पूछा ना कि मेरे घर में पैसों की कमी क्यों थी? तो सुनो। मेरे डैड सच में एक बहुत बड़े बोटैनिस्ट और सरकारी फॉरेस्ट ऑफिसर थे। हमारा एक बहुत खूबसूरत और खुशहाल परिवार था। लेकिन जब मैं सिर्फ़ आठ साल की थी, तब डैड को शहर के एक बहुत बड़े और रसूखदार बिज़नेस टाइकून के काले कारनामों का पता चला। वह अमीर आदमी सरकार की आंखों में धूल झोंककर आरक्षित जंगलों के कीमती पेड़ों की तस्करी (Smuggling) कर रहा था और जंगली जानवरों का शिकार करवाता था।
गुफा में सिर्फ़ लारा की आवाज़ गूंज रही थी। मैट और पॉल बिल्कुल शांत होकर उसकी बात सुन रहे थे। लारा ने आगे कहा,
"मेरे डैड ने उस अमीर आदमी के खिलाफ कोर्ट में गवाही देने का फैसला किया। उस तस्कर ने मेरे डैड को करोड़ों रुपयों की रिश्वत देनी चाही, लेकिन मेरे डैड ईमानदार थे, वे नहीं बिके। फिर एक रात... उस अमीर आदमी के गुंडों ने हमारे घर पर हमला कर दिया। उन्होंने मेरे डैड को मेरी और मेरी माँ की आँखों के सामने इतनी बेरहमी से मारा कि वे हमेशा के लिए अपाहिज हो गए। उनका दिमागी संतुलन खो गया और उनकी नौकरी चली गई।
लारा की आवाज़ भारी हो गई, लेकिन उसकी आँखों से आँसू नहीं गिरे, सिर्फ़ प्रतिशोध की आग चमक रही थी
"उस हादसे के बाद हमारी पूरी संपत्ति, हमारा घर सब कुछ डैड के इलाज और अदालती चक्करों में बिक गया। मेरी माँ ने दूसरों के घरों में काम करके मुझे पढ़ाया। पिछले दस सालों से मेरे डैड एक व्हीलचेयर पर हैं, वे न बोल सकते हैं, न चल सकते हैं। बस... बस कभी-कभी जब उन्हें होश आता है, तो वे मुझे अपने पास बिठाकर जंगल और सर्वाइवल की बातें बताते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके बाद मेरी रक्षा करने वाला कोई नहीं होगा। हाँ ऐशली! मैं गरीब हूँ, क्योंकि मेरे बाप ने तुम्हारे बाप जैसे अमीर और जाहिल लोगों के सामने घुटने टेकने से इनकार कर दिया था! और मुझे तुम जैसे लोगों की हमदर्दी की भीख कभी नहीं चाहिए।
लारा की यह खौफनाक और दर्दभरी दास्तान सुनकर गुफा में एक ऐसा सन्नाटा छा गया कि मानो सबकी सांसें रुक गई हों। पॉल ने शर्म के मारे अपना सिर झुका लिया, उसकी आँखों में पछतावे के आँसू थे। मैट ने लारा की तरफ़ देखा, उसके दिल में लारा के लिए सम्मान और ज़्यादा बढ़ गया था। उसे समझ आ गया था कि लारा के अंदर की यह कड़वाहट और मज़बूती उसके इसी दर्दनाक अतीत से आई है।
ऐशली का मुंह भी पल भर के लिए बंद हो गया। उसने अपनी ज़िंदगी में कभी ऐसी गरीबी और ऐसा दर्द नहीं देखा था। लेकिन लारा की बातों ने उसके घमंड को जो ठेस पहुँचाई थी, उसने ऐशली के अंदर की जलन को कम नहीं किया, बल्कि और हवा दे दी। उसने मन ही मन सोचा कि यह लड़की कितनी भी मज़बूत बन ले, वह इसे इस जंगल में नीचा दिखाकर रहेगी। रोज़ी भी चुपचाप एक कोने में दुबक गई।
तभी सोफिया ने लारा को गले से लगा लिया,
"मुझे गर्व है लारा कि तुम मेरी दोस्त हो।
लारा ने सोफिया की पीठ थपथपाई और उठकर गुफा के मुहाने पर जाकर बैठ गई, जहाँ बाहर अमेज़न का घना, काला जंगल किसी भूखे अजगर की तरह मुँह खोले खड़ा था। रात गहरी हो रही थी, और गुफा के अंदर 8 इंसानों के बीच की नफ़रत, जलन और दर्द की जंग अब इस अमेज़न के जंगल से भी ज़्यादा खतरनाक रूप ले रही थी... (जारी है)