Muhabbat Ek Sabaq - 22 in Hindi Love Stories by Afariya Faruqui books and stories PDF | Muhabbat Ek Sabaq - 22

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Muhabbat Ek Sabaq - 22

"थैंक्यू सो मच"….…

उसने बहुत खुशदिली के साथ उसका शुक्रिया अदा किया था। 

"अंदर आएं "… .. ..

शहरयार ने उसके आने के लिये एक तरफ हट कर रास्ता छोड़ दिया। 

"मैं तो आप को लेने आई हूं , चले मेरे साथ" ….. . …

"कहाँ "??

वह हैरान हुआ। 

"फुप्पो के रूम में, वेट कर रही हैं वह आप का"!!! 

उस ने बताया। 

"आप चलें , मैं आता हूं" … .. ..

वह कह कर अंदर की तरफ मुड़ गया तो शिफ़ा भी वापस पलट गयी। 

वह आमना बेगम के कमरे में पहुँचा तो वहाँ उनके और शिफ़ा के अलावा सारे सर्वेंटस जमा थे। 

"अस्सलामु अलेयकुम" !!! 
उसने दाखिल होते हुए सलाम किया। 

"वालेयकुम अस्सलाम बेटा आओ " !!! 

उन्होंने मुहब्बत के साथ बेटे के लिये जगह बनाते हुए जवाब दिया था। 

"यह सब क्या है अम्मी" ......??

उसने टेबल पर लगे केक और नाशते को हैरानी से देखा। 

"यह केक शिफ़ा ने बेक किया है। पार्टी तो कल है तो यह कहने लगी एक छोटा सा सेलिब्रेशन आज ही कर लेते हैं" .............

उन्होंने भतीजी के सर पर हाथ रख कर मुहब्बत से कहा तो वह भी मुस्कुरा दी। 

"जी फुप्पो और फिर कल पार्टी में यह सब लोग भी तो बिज़ी होंगे इसलिये मैंने सोचा एक सेलिब्रेशन इन सब के साथ भी हो जाए" ...........

शिफ़ा ने हाथ बांधे खड़े सब सर्वेंटस की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए कहा तो शहरयार के दिल में उसकी क़दर और इज़्ज़त और ज़्यादा बढ़ गई। 

"चलो बेटे बिस्मिल्लाह करो" !!!! 

उन्होंने शहरयार को ईशारा किया तो वह मुस्कुरा कर केक काटने लगा था। 
☆ ☆ ☆

"क्या बात है शिफ़ा तुम कुछ खामोश हो आज सुबह से" ....??? 

वह दोनों इस वक़्त यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में थीं जब नादिया ने उसकी खामोशी को नोट किया। 

"नही कुछ नही , बस यूं ही" ........

वह टाल गई। 

"यह क्या बात है ,ऐसे कौन खामोश होता है "....???

उसने त्यौरियां चढ़ा कर पूछा। 

"अरे मेरा मतलब है कोई बड़ी बात नही है , तुम परेशान ना हों" .......

वह उसे इतमीनान दिलाने के लिये बोली। 

"तो छोटी बात ही बता दो तुम क्या है फिर, शहरयार भाई से कोई झगड़ा हुआ है क्या" .....??

उसने अंदाज़ से पूछा। 

"नही नही ऐसी बात नही है , बल्कि वह तो बहुत अच्छे से बिहेव करने लगे। बताया तो था मैंने तुम्हें" ......... 

"तो फिर क्या बात है , अनस भाई से हुई कोई लड़ाई "..... ??? 

नादिया के अंदाज़ से लग रहा था आज वह उसकी खामोशी की वजह पूछ कर ही दम लेगी। 

"नहीं लड़ाई तो कोई नही हुई बस आज कल उनका बिहेव कुछ अजीब सा हो गया है "......

वह कुछ खोये खोये अंदाज़ में बोली। 

"क्यों क्या हुआ" ??? 

"कई दिन से कॉल्स भी आने बंद हो गए वरना दिन में को पचास कॉल्स आ जाते थे। अब तो मैं खुद ही कर लेती हूं कॉल तो बात हो जाती है वह भी बस रसमी सलाम दुआ। वरना पहले तो मुझे फोन रखने ही नही देते थे। अब तो उन्हें काम की जल्दी होती है कि यार मुझे यह काम करना है अभी ज़रा जल्दी में हूं बाद में बात करता हूं तुम्से या फिर मेरी अर्जेंट मीटिंग है अभी मैं थोड़ा बिज़ी हूं करता हूं मैं ज़रा फारिग़ हो कर कॉल।"

वह अफसोस से बता रही थी। 

"तुम ख्वामख्वाह टेंशन ले रही हो कोई अजीब बिहेवियर नही है वह वाक़ई बिज़ी होंगे वरना ऐसे इग्नोर क्यों करेंगे तुमहें आखिर को निकाह हुआ है तुम्हारा उनके साथ बीवी हो तुम उन की "
नादिया ने समझाया। 

"हां लेकिन ऐसी भी क्या मसरूफियत कि मुझे ही भूल गये , अब कल रात भी मैंने कॉल किया था तब भी बिज़ी जा रहा था फोन!!! 

उसका खद़शा आखिर ज़ुबान पर आ ही गया 

"ओह हो , तो इस वजह से परेशान हैं मैडम" !!! 

नादिया ने माथे पर हाथ मारते हुए झूट मूट गुस्सा दिखाया था। 

"हां तो होना नही चाहिये क्या , भला रात को किसका फोन बिज़ी जाता है" ...???

उसने मुंह बनाया। 

"देखो शिफ़ा, वह काम में बिज़ी होंगे ना और फिर तुम ही तो बता रही थीं कि उन्होंने अंकल के फ्रेंड की ओल्ड ब्रांच ज्वाइन की है ताकि थोड़ा वर्क एक्सपीरिंएस हो जाए जिस से फिर न्यू ब्रां में प्रॉबलम ना हो कोई काम समझने में" .......

नादिया ने याद दिलाया था। 

"हां तो"...?? 

"तो यार हो जाता है ना ऐसा तो फिर , न्या काम है तो समझने में भी वक़्त चाहिये और फिर पहले वह बिज़ी नही थे तो कर लेते थे कॉल्स अब जब काम ज़्यादा है तो कैसे करेंगे?? कम से कम तुम्हें तो समझना चाहिये ना यह और फिर वह न्या ऑफिस स्टार्ट कर लेंगे तो इसमें तुम्हारा ही तो फायदा है "

नादिया उसे बहुत अच्छे से समझा रही थी। 

"शायद तुम ठीक कह रही हो" ........

वह बे मन से उसकी बात पर ऐग्री करती हुई बोली। 

"शायद नहीं मैं यक़ीनन ठीक कह रही हूं , अब तुम यह टेंशन छोड़ो और मेरे साथ कैंटीन चलो क़सम से बहुत भूक लग रही है " !!! 
नादिया ने खड़ी होकर उसको भी हाथ खींच कर खड़ा किया

लेकिन क़िसमत उसका यह शक यक़ीन में बदलने वाली थी शायद वह यह बात नही जानती थी

☆ ☆ ☆