The Third Pawn in Hindi Love Stories by Ritu kumari books and stories PDF | प्यार का जाल - 8

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प्यार का जाल - 8

कैफे के उस सन्नाटे में रिया के शब्दों ने एक नया तूफ़ान खड़ा कर दिया था। आरव की तीखी नज़रें रिया के चेहरे पर टिकी थीं। उसकी रोती हुई आँखें और कांपते हाथ इस बात की गवाही दे रहे थे कि वह झूठ नहीं बोल रही थी। अगर डेटा रिया ने चोरी नहीं किया था, तो फिर वह अनजान मैसेज भेजने वाला और आरव की सीक्रेट आईडी का इस्तेमाल करने वाला असल गुनहगार कौन था?
आरव ने एक गहरी सांस ली और अपने दिमाग को शांत करने की कोशिश की। उसने अपना लैपटॉप बैग से निकाला और स्क्रीन ऑन की। उसकी उंगलियाँ तेज़ी से कीबोर्ड पर चलने लगीं। आरव सिर्फ एक आम आईटी एम्प्लॉई नहीं था, बल्कि एथिकल हैकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक में भी माहिर था। उसने तुरंत अपनी कंपनी के मेन सर्वर की सिक्योरिटी लॉग्स खोलीं और कल रात हुए डेटा ब्रीच की गहराई से जाँच शुरू की।
रिया चुपचाप, सहमी हुई आरव को देख रही थी। "आरव... क्या तुम मेरा यकीन कर रहे हो?" उसने दबी आवाज़ में पूछा।
"खामोश रहो और मुझे काम करने दो," आरव ने बिना नज़रें उठाए सख्त लहजे में कहा।
लैपटॉप की स्क्रीन पर हरी और सफ़ेद कोडिंग की पंक्तियाँ तेज़ी से ऊपर भाग रही थीं। आरव ने उस आईपी एड्रेस को ट्रैक करना शुरू किया जिससे उसकी आईडी हैक की गई थी। जैसे-जैसे डिजिटल सुराग आपस में जुड़ने लगे, आरव के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती गईं। हैकर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल किया था, लेकिन वह एक छोटी सी गलती कर बैठा था—उसने डेटा ट्रांसफर करने के लिए कंपनी के ही एक इंटरनल वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल किया था।
इसका मतलब साफ़ था—गद्दार बाहर का नहीं, बल्कि आरव की अपनी कंपनी का ही कोई सीनियर अधिकारी था!
आरव ने सिस्टम के बैकएंड डेटाबेस में घुसकर उस खास एक्सेस कोड को डिकोड किया, जो कल रात इस्तेमाल हुआ था। जैसे ही असली यूजर की डिटेल्स स्क्रीन पर फ्लैश हुईं, आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
स्क्रीन पर नाम लिखा था—करण मेहरा। करण, जो आरव का सबसे करीबी दोस्त और उसी प्रोजेक्ट का सह-हेड (Co-Head) था!
आरव का सिर चकरा गया। करण वही इंसान था जिसने आरव को इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए प्रेरित किया था। और उससे भी बड़ा सच यह था कि करण... विक्रम मेहरा का अपना छोटा भाई था, जो अपनी पहचान बदलकर आरव की कंपनी में काम कर रहा था!
"असंभव..." आरव के मुँह से बस यही शब्द निकला।
रिया ने लैपटॉप की स्क्रीन पर वह नाम देखा और उसके चेहरे का रंग उड़ गया। "करण? आरव, विक्रम मेहरा का एक भाई भी है जो लंदन से पढ़ाई करके लौटा है, लेकिन मैंने उसे कभी देखा नहीं था!"
अब पूरा ताना-बाना आरव के सामने बिल्कुल साफ़ था। विक्रम मेहरा ने रिया को सिर्फ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया था ताकि आरव का ध्यान भटकाया जा सके और शक की सुई रिया पर जाए। जबकि असली खेल उसका भाई करण खेल रहा था। करण ने आरव का भरोसा जीतकर उसका पासवर्ड चुराया और कंपनी का सारा डेटा मिटाने या बेचने का प्लान बनाया, ताकि पूरा इल्ज़ाम आरव और रिया पर आ गिरे।
उसी पल आरव के फोन पर फिर से वही अनजान नंबर चमका। लेकिन इस बार मैसेज नहीं, बल्कि करण की तरफ से एक सीधी कॉल थी। आरव ने रिया की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर खौफ साफ़ दिख रहा था। आरव ने अपनी उंगलियाँ भींचीं, एक ठंडी मुस्कान उसके होठों पर आई, और उसने कॉल रिसीव कर ली।