Her Silent Secret - 10 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 10

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Her Silent Secret - 10

काली car धीरे-धीरे चौहान हवेली की गली के पास आकर रुकी। संयोगिता कुछ सेकंड तक बाहर देखती रही। उसी गली में रोशनी थी वहीं कहीं विराट अपने बेटे के लिए पागलों की तरह परेशान होगा। उसने धीरे से विवान की तरफ देखा। छोटा बच्चा उसकी गोद में आधा सो चुका था। संयोगिता ने बहुत संभालकर उसे नीचे उतारा। विवान तुरंत उसका हाथ पकड़कर खड़ा हो गया। उसकी छोटी उंगलियाँ अभी भी उसे छोड़ना नहीं चाहती थीं। विवान ने मासूम आँखों से उसकी तरफ देखा।

विवान बोला - 
मम्मा… आप भी चलो ना…

ये सुनते ही संयोगिता का दिल जैसे हल्का काँप गया। लेकिन उसने खुद को संभाला। वो जानती थी वो उस घर का हिस्सा नहीं है। संयोगिता उसके सामने घुटनों पर बैठ गई। उसने बहुत प्यार से विवान के बाल ठीक किए।

फिर धीमी आवाज़ में बोली—
नहीं बेटा… अभी नहीं।

विवान उदास हो गया। संयोगिता ने हल्की मुस्कान लाने की कोशिश की।

संयोगिता बोली - 
Mumma को थोड़ा काम है अभी…

उसने प्यार से उसका गाल छुआ।

संयोगिता बोली - 
आप पापा के पास जाओ… वो बहुत परेशान होंगे ना।

विवान चुपचाप उसे देखता रहा। संयोगिता खुद को रोक नहीं पाई। उसने झुककर बहुत हल्के से विवान के माथे और गाल को चूम लिया। उस पल…उसके अंदर का सारा अंधेरा कुछ देर के लिए शांत हो गया। विवान अचानक मुस्कुराया। फिर अपने छोटे हाथों से उसका चेहरा पकड़ लिया।

विवान बोला - 
I love you so much mumma.

बस…ये सुनते ही संयोगिता की आँखें भर आईं। उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया…ताकि वो उसके आँसू ना देख सके। विवान खुशी-खुशी हवेली की तरफ भाग गया। और संयोगिता वहीं खड़ी उसे जाती हुई देखती रही। उसकी आँखों में पहली बार ऐसा दर्द था…जो किसी कातिल का नहीं लग रहा था।

वो धीरे से फुसफुसाई—
काश… मैं सच में तुम्हारी मम्मा होती…

फिर वो वापस car में बैठ गई। और अंधेरे में गायब हो गई।
संयोगिता car की पिछली seat पर चुपचाप बैठी थी। उसका चेहरा खिड़की की तरफ था। बाहर की रोशनियाँ तेजी से पीछे छूट रही थीं।

लेकिन उसकी आँखों में अब भी वही पल घूम रहा था—
I love you so much mumma…

उसकी उंगलियाँ अनजाने में हल्का काँप गईं।।आगे बैठे उसके आदमी बार-बार rear mirror से उसे देख रहे थे। उनके चेहरे पर confusion साफ था। क्योंकि वो जिस संयोगिता सिंह को जानते थे…वो कभी किसी के लिए नहीं रुकी। ना किसी पर तरस खाया। ना किसी को अपने करीब आने दिया।वो सिर्फ एक चीज़ थी— खौफ।
लेकिन आज…आज उनकी मलक़िन एक बच्चे के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा आई थी।

Driver ने धीरे से बगल वाले आदमी से कहा—
ये वही मैडम हैं ना…?

दूसरा आदमी फुसफुसाया—
पहली बार किसी को उनके सामने ‘मम्मा’ बोलते देखा है…

तीसरा आदमी अब भी हैरान था।

वो बोला - 
और पहली बार मैडम की आँखों में आँसू भी।

संयोगिता सब सुन रही थी। उसने धीरे से आँखें बंद कर लीं। उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था उसे क्या हो रहा है। क्यों उस बच्चे की आवाज़ उसके अंदर तक उतर गई थी। क्यों वो बार-बार संपूर्णा का वादा याद कर रही थी। उसकी आँखों के सामने दो चेहरे घूम रहे थे—
एक…खून से सना उसका खुद का चेहरा।
दूसरा…विवान की मासूम मुस्कान।
संयोगिता ने अचानक अपनी मुट्ठी भींच ली। जैसे वो खुद से लड़ रही हो। वो हमेशा दूसरों के डर से खेलती थी। लेकिन आज…उसे खुद डर लग रहा था।नकहीं वो कमजोर तो नहीं पड़ रही? कहीं वो वही चीज़ तो महसूस नहीं करने लगी…जिससे वो हमेशा दूर भागती आई थी?

Car अचानक red signal पर रुकी। संयोगिता की नजर बाहर गई। सड़क किनारे एक छोटा बच्चा अपनी माँ का हाथ पकड़कर चल रहा था। कुछ सेकंड तक वो उन्हें देखती रही।
फिर धीरे से अपना सिर सीट से टिका दिया। और पहली बार…उस साइको killer की आँखों मेंखामोश थकान दिखाई दी।

वहीं पूरी चौहान हवेली में अफरा-तफरी मची हुई थी। Police officers लगातार calls कर रहे थे। Virat पागलों की तरह हर जगह contact कर रहा था। उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। बाल बिखरे हुए थे।वो अब इंसान कम…टूटा हुआ पिता ज्यादा लग रहा था।

विराट बार-बार एक ही बात बोल रहा था—
मेरा बेटा ढूंढो… किसी भी हालत में…

उसकी आवाज़ काँप रही थी।गंगा जी भगवान के सामने रो रही थीं। काजल की हालत भी खराब थी। पूरा घर जैसे डर में सांस ले रहा था।

तभी हवेली के बाहर guard की घबराई हुई आवाज़ आई—
छोटे मालिक!

सबकी नजर तुरंत दरवाज़े की तरफ गई। और अगले ही पल—
छोटा विवान धीरे-धीरे अंदर आता दिखाई दिया। उसके कपड़े मिट्टी से गंदे थे। चेहरा डरा हुआ था। लेकिन वो जिंदा था। विवान को देखते ही विराट की आँखें फैल गईं।

विराट बोला - 
विवान!

वो पागलों की तरह उसकी तरफ भागा। और अगले ही पल उसे अपनी बाँहों में उठा लिया। इतनी जोर से…जैसे दोबारा खोने से डर रहा हो। विवान भी तुरंत उससे लिपट गया।

विवान बोला - 
पापा…

विराट की आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। वो बार-बार उसके चेहरे को देख रहा था।

विराट बोला - 
तुम ठीक हो ना बेटा? कहीं चोट तो नहीं लगी?

विवान ने धीरे से सिर हिलाया। गंगा जी रोते हुए विवान को चूमने लगीं। काजल ने उसे कसकर पकड़ लिया। पूरा परिवार जैसे वापस सांस ले पाया। लेकिन विराट अब भी काँप रहा था।
क्योंकि उसने कुछ घंटों में अपनी पूरी दुनिया लगभग खो दी थी।

तभी विवान मासूमियत से बोला—
पापा… मम्मा मुझे बचाकर लाई थीं।

पूरा हॉल अचानक शांत हो गया। विराट का दिल जैसे रुक गया।

विराट बोला - 
क्या…?

विवान खुशी से बोला—
हाँ! मम्मा आई थीं… उन्होंने bad men को मारा… फिर मुझे यहाँ छोड़कर गईं…

सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। काजल की आँखों में डर उतर आया। गंगा जी काँप गईं। क्योंकि संपूर्णा तो मर चुकी थी। फिर विवान किसकी बात कर रहा था?

विराट धीरे-धीरे नीचे बैठ गया। उसने विवान के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा।

विराट बोला - 
विवान… तुम्हें किसने बचाया?

विवान मासूम मुस्कान के साथ बोला—
मम्मा ने…

और उसी समय दूर कहीं अपनी car में बैठी संयोगिता ने आँखें बंद कर लीं। जैसे उसे महसूस हो गया हो…कि अब उनकी ज़िंदगियाँ हमेशा के लिए जुड़ चुकी हैं।