Shakti ke Shiv - 17 in Hindi Women Focused by sheetal books and stories PDF | Shakti ke Shiv - 17

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Shakti ke Shiv - 17

शिवाय ने जैसे ही शक्ति की ओर अपना हाथ बढ़ाया...

उसी पल गंगा की तेज़ लहर ने अपना रुख बदल दिया।

पानी का बहाव शक्ति को शिवाय से दूर, दूसरी ओर खींच ले गया।

शक्ति ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन पानी का जोर उसके प्रयासों पर भारी पड़ रहा था।

"बचाओ...!"

"हेल्प!"

उसकी आवाज़ घाट तक साफ़ सुनाई दे रही थी।

शिवाय तुरंत सीढ़ियों पर वापस चढ़े।

उन्होंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और शिवानी की ओर बढ़ाते हुए कहा—

"इसे संभालो।"

इतना कहकर वह दोबारा गंगा की ओर बढ़ गए।

"भाई सा... संभलकर!"

शिवानी की आवाज़ पीछे से आई।

लेकिन शिवाय को जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था।

उनकी पूरी नजर सिर्फ़ शक्ति पर थी।

अगले ही पल उन्होंने बिना देर किए पानी में एक लंबी छलांग लगा दी।

"भैया!"

 शिवानी की घबराई हुई आवाज़ घाट पर गूँज उठी।

पानी में शक्ति लगातार बह रही थी।

वह हाथ-पैर चलाकर खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर बार लहरें उसे थोड़ा और दूर खींच ले जातीं।

उधर शिवाय तेज़ी से उसकी ओर बढ़ रहे थे।

तभी घाट पर खड़े रुद्र ने अपने आसपास देखा और बिल्कुल शांत स्वर में कहा—

"लगता है... हमारे भाई को हमारे लिए भाभी मिल गई।"

उसकी बात सुनते ही सभी ने हैरानी से उसकी ओर देखा।

"रुद्र!"

शिवानी ने उसे घूरा।

लेकिन रुद्र के चेहरे पर ज़रा भी घबराहट नहीं थी।

वह आराम से गंगा की ओर देख रहा था और उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।

"क्या?"

"मैं तो बस सच बता रहा हूँ।"

उधर पानी में...

शिवाय आखिरकार शक्ति के करीब पहुँच गए।

उन्होंने उसकी ओर हाथ बढ़ाया।

"मेरा हाथ पकड़ो!"

शक्ति ने कई बार कोशिश की...

लेकिन हर बार उसका हाथ शिवाय की उँगलियों तक पहुँचने से पहले ही पानी के बहाव में पीछे चला जाता।

आख़िरकार...

उसकी उँगलियाँ शिवाय के हाथ से जा मिलीं।

शिवाय ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

"घबराओ मत... मैं तुम्हें यहाँ से बाहर निकाल लूँगा।"

शक्ति की साँसें तेज़ थीं।

"प्लीज़... मैं अपना balance नहीं बना पा रही हूँ मेरी मदद करो..."

शिवाय ने उसे अपने करीब खींच लिया और उसे संभालते हुए कहा—

"मुझे कसकर पकड़ो।"

शक्ति ने उसकी बात मान ली।

शिवाय ने सावधानी से कहा—

"धक्का मत देना..."

"वरना दोनों पानी के बहाव में बह जाएँगे।"

"बस मुझे कसकर पकड़े रहो।"

शक्ति ने कुछ नहीं कहा।

उसने बस शिवाय को कसकर पकड़ लिया।

शिवाय उसे संभालते हुए धीरे-धीरे तैरकर घाट के दूसरे हिस्से की ओर बढ़ने लगे।

गंगा का बहाव अब भी तेज़ था...

लेकिन शिवाय लगातार आगे बढ़ते रहे।

कुछ देर बाद...

घाट की सीढ़ियाँ करीब दिखाई देने लगीं।

शिवाय ने आख़िरी कुछ कदमों के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई।

और आखिरकार...

दोनों घाट के किनारे तक पहुँच गए।

आख़िरकार...

शिवाय शक्ति को लेकर घाट के किनारे तक पहुँच गए।

किनारे पर पहुँचते ही शक्ति ने खुद को पानी से बाहर खींचा और वहीं पत्थरों पर पीठ के बल लेट गई।

उसकी साँसें बुरी तरह फूल रही थीं।

वह लगातार लंबी-लंबी साँसें ले रही थी और बीच-बीच में खाँस रही थी।

शिवाय भी उसके पास वाली सीढ़ी पर बैठ गए।

उनकी हालत भी कुछ अलग नहीं थी।

वह भी तेज़ साँसें ले रहे थे और कुछ पल के लिए आँखें बंद कर लीं।

तभी अलिशा दौड़ती हुई वहाँ पहुँची।

"दीदी!"

उसने तुरंत शक्ति को सहारा देकर बैठाने की कोशिश की।

"दीदी, आप ठीक हैं?"

शक्ति ने मुश्किल से साँस संभालते हुए हाँ में सिर हिला दिया।

"हाँ..."

अलिशा ने राहत की साँस ली और उसे अपने हाथों से संभालकर बैठाए रखा।

उसी समय शिवानी, कामाक्षी और रुद्र भी भागते हुए शिवाय के पास पहुँच गए।

शिवानी ने घबराकर पूछा—

"भाई सा... आप ठीक हैं?"

कामाक्षी भी चिंतित होकर शिवाय को देखने लगी।

शिवाय ने कुछ पल बाद आँखें खोलीं और हाँ में सिर हिला दिया।

"हाँ..."

उन्होंने एक लंबी साँस ली।

"मैं ठीक हूँ।"

शिवानी ने राहत की साँस ली।

कुछ पल के लिए घाट पर सिर्फ़ गंगा की लहरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

एक तरफ़ शक्ति अपनी साँसें सामान्य करने की कोशिश कर रही थी...

और दूसरी तरफ़ शिवाय भी उसी तरह शांत होने की कोशिश कर रहे थे।

दोनों कुछ ही दूरी पर थे...

लेकिन अभी भी एक-दूसरे से कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे।

कुशल तुरंत पास की दुकान से पानी की एक बोतल लेकर आया और शिवाय की ओर बढ़ा दी।

"सर..."

शिवाय ने बोतल ले ली।

फिर उनकी नज़र शक्ति पर गई।

उन्होंने बोतल उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा—

"आप पानी पी लीजिए। आपकी तबीयत ठीक नहीं लग रही।"

शक्ति ने बिना कुछ कहे बोतल ले ली।

उसने काँपते हाथों से ढक्कन खोला और धीरे-धीरे थोड़ा पानी पिया।

लेकिन अगले ही पल उसे फिर खाँसी आ गई।

अलिशा ने तुरंत उसके कंधे पर हाथ रखा।

"धीरे दीदी..."

शक्ति ने बोतल बंद की और उसे अलिशा की ओर बढ़ा दिया।

अलिशा ने बोतल लेते हुए शिवाय की ओर देखा।

"Thank you."

शिवाय ने बस हल्का-सा सिर हिला दिया।

अलिशा ने फिर शक्ति की ओर देखा।

"दीदी, अब हमें चलना चाहिए। आपकी तबीयत मुझे ठीक नहीं लग रही।"

उसने शक्ति के भीगे कपड़ों की ओर देखा।

"और आप इतने गीले कपड़ों में ज़्यादा देर रहीं तो तबीयत और खराब हो सकती है।"

शक्ति ने हाँ में सिर हिलाया और उठने लगी।

उसी समय दूसरी ओर से कार्तिक ने शिवाय से कहा—

"शिवाय, अब घर चलो। जाकर कपड़े बदल लो। कहीं ठंड न लग जाए।"

शिवाय बिना कुछ कहे उठ खड़े हुए।

एक पल के लिए उनकी नज़र फिर शक्ति पर गई।

उन्होंने सहजता से पूछा—

"मिस... आप ठीक हैं?"

शक्ति ने हाँ में सिर हिला दिया।

"और आप?"

शिवाय ने भी हाँ में सिर हिला दिया।

फिर शिवाय ने जाते-जाते कहा—

"थोड़ा पानी से दूर खड़ा रहा कीजिए।"

वह एक पल रुके।

"जब तैरना नहीं आता तो risk नहीं लेना चाहिए।"

शक्ति की भौंहें तुरंत तन गईं।

उसने शिवाय को घूरकर देखा।

शिवाय उसकी नाराज़गी समझ नहीं पाए।

बस हल्की-सी मुस्कान के साथ अपनी तरफ़ मुड़ गए।

अलिशा ने शक्ति के चेहरे की ओर देखा...

और उसके होंठों पर भी हल्की-सी मुस्कान आ गई।

गंगा की लहरें अब भी घाट की सीढ़ियों से टकरा रही थीं...

लेकिन इस पहली मुलाकात की आख़िरी बात...

शक्ति के मन में शायद कुछ देर और रहने वाली थी।

जानने के लिए पढ़ते रहिए... Shakti Ke Shiv।