struggle of a queen in Hindi Motivational Stories by Vandna Sharma books and stories PDF | रानी का राजा किसी और के

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रानी का राजा किसी और के



कहानी -रानी का राजा किसी और का

सपने आंखों में सजाए सुमन अपने लिए डोली से उतरी तो आश्चर्य से खड़ी रह गई। किसी ने उसका स्वागत नहीं किया। सास तो अभी तक आई भी नहीं थी। 

सुमन की सास बबली पहली मंजिल पर किराए पर रहती थी। नीचे मकान मालिक एक बूढ़ी विधवा महिला थी। सास ने सुमन को मकान मालिक के घर ही बैठा दिया, जब तक ऊपर तैयारी न हो जाए। दो घंटे तक सुमन अकेले बैठी रही। जब सास ने बुलाया तब ऊपर ले जाकर भी उसे एक कमरे में बंद कर दिया। 

सुमन का पति जीतू दोस्तों के साथ बाहर घूमने चला गया। घर में बुआ, मौसी, मामी, ननद तीन दिन तक रुके रहे। घर में जगह न होने के कारण सुमन की सुहागरात भी न हो सकी। तीन दिन तक उसने अपने पति का मुंह तक नहीं देखा था।

जब सारे मेहमान चले गए तब असली खेल शुरू हुआ। सास बबली बहुत चालाक थी। वो बहू सिर्फ घर का काम करवाने के लिए लाई थी। रोज रात को वो खुद दूल्हा-दुल्हन के कमरे में सोने लगी। उसे डर था कि बेटा बहू के पास जाएगा तो उसे भूल जाएगा। घर की सत्ता हाथ से निकल जाएगी। 

सास ने तो यहां तक कर दिया कि अपने पति को भी घर से निकाल दिया। बेटे से कहती, "ये मुझे जवानी में बहुत मारता था। मुझे इसके साथ नहीं रहना।" और खुद दिन-रात बेटे से चिपकी रहती। सोना भी बेटे के साथ, खाना भी बेटे के साथ। बेटे के सामने रोकर कहती, "तेरे सिवा मेरा कौन है। कितनी मुश्किलों से पाला है तुझे।" 

बेचारा जीतू मां के सामने कुछ न बोल पाता।

एक दिन सास अपनी बहन की बेटी की शादी में चली गई। लगभग दो महीने बाद सुमन और जीतू को अकेले रहने का मौका मिला। सुमन ने घर को अपनाने की पूरी कोशिश की। पति को खुश करने के लिए, सास की सेवा के लिए वो दिन-रात काम करती। 

पर जैसे ही सास वापस आई, उसने फिर जहर घोलना शुरू कर दिया। जीतू के आते ही शिकायत लगाती, "बेटा आज मेरे पैरों में बहुत दर्द था। उठा तक नहीं जा रहा था। पर बहू दिन भर सोती रही। खाना तक नहीं बनाया। मुझे गिरते-पड़ते बनाना पड़ा।" 

बस, जीतू और सुमन का झगड़ा हो जाता। सुमन चुपचाप सब सहती। पति-पत्नी के बीच सास दीवार बनकर खड़ी हो गई थी। 

संयोग से एक दिन सुमन गर्भवती हुई। उसने खुशी-खुशी पति और सास को बताया। पर किसी के चेहरे पर खुशी नहीं थी। सास को डर था कि अगर जीतू का बच्चा हो गया तो बेटे का झुकाव सुमन की तरफ हो जाएगा और उसके हाथ से "जीतू नाम का गुलाम" निकल जाएगा।

इसलिए उसने बहुत बड़ा पाप किया। जानबूझकर सुमन के खाने में दवाई मिला दी। दो महीने का गर्भपात हो गया। सुमन सदमे से बीमार पड़ गई। उसे बुखार और टीबी हो गई। 

सास ने उसे तुरंत मायके भेज दिया, "जब ठीक हो जाए तब आना। यहां सबको बीमार कर देगी।"

तीन महीने सुमन मायके में तड़पती रही। न पति का फोन आया, न किसी ने हाल पूछा। जब ठीक होकर वो खुद ससुराल लौटी तो देखा जीतू पूरी तरह मां के वश में था। 

इस तरह चार साल बीत गए। सुमन सिर्फ एक नौकरानी बनकर रह गई। न मान, न सम्मान, न प्यार। 

एक दिन सास ने हद कर दी। जीतू से बोली, "इसे तलाक दे दे। मैं तेरी दूसरी शादी करवा दूंगी।" 

सुमन ने सुना और उस रात सो नहीं पाई। उसके पिताजी नहीं थे। मायके जाकर मां पर बोझ नहीं बनना चाहती थी। छोटी बहन की शादी भी बाकी थी। 

उसी रात उसने फैसला किया। "अब और नहीं।"

अगले दिन से सुमन ने घर का काम करना बंद कर दिया। सिर्फ अपना खाना खुद बनाती। बाकी समय कमरे में बंद होकर पढ़ाई करती। सबसे छुपकर उसने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। 

एक साल की मेहनत और आंसुओं के बाद उसका रिजल्ट आया। सरकारी कॉलेज में अध्यापिका की नौकरी लग गई। 

नौकरी लगते ही सुमन ने पहली बार सांस ली। पर सास अब भी नहीं मानी। वो अब भी जीतू के लिए दूसरी लड़की देख रही थी।

आखिर सुमन ने वो घर छोड़ दिया। शहर में एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया। और सिर्फ अपने लिए जीना शुरू कर दिया।

आज सुमन एक सम्मानित अध्यापिका है। उसके छात्र उसे "मैम" कहकर इज्जत देते हैं। जीतू कभी-कभी मिलने आता है और मां की करतूतों पर शर्मिंदा होता है। पर अब बहुत देर हो चुकी है।

सुमन ने साबित कर दिया कि अगर "राजा" किसी और का हो जाए तो "रानी" को खुद अपना ताज बनाना पड़ता है।

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प्यारी सी सीख
बेटियो/बहनों याद रखना... 
1. सहन करना अच्छी बात है, पर आत्मसम्मान बेचकर नहीं। एक सीमा के बाद "ना" कहना सीखो।
2. शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही असली गहना है। ये कोई छीन नहीं सकता। 
3. रिश्ते निभाने के लिए खुद को मिटाना जरूरी नहीं।जो आपकी कदर न करे, उस दरवाजे पर दस्तक देना बंद कर दो।

"रानी का राजा किसी और का हो सकता है, पर रानी की किस्मत उसके खुद के हाथ में होती है।"

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली