birthday wishes in Hindi Motivational Stories by Vandna Sharma books and stories PDF | जन्मदिन की बधाई

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जन्मदिन की बधाई



सोहन आज सुबह से ही चिड़चिड़ा सा हो रहा था। अजीब बात थी, क्योंकि आज तो उसका जन्मदिन था। सुबह से ही फोन पर बधाइयों का तांता लगा था। दफ्तर के दोस्त, पड़ोसी, रिश्तेदार, यहाँ तक कि बैंक वालों की तरफ से भी बधाई संदेश आ गया था।

पर सोहन का चेहरा ऐसा जैसे किसी ने सारी खुशी निचोड़ ली हो।

उसकी बीवी अनु सुबह से देख रही थी। उसने बड़े अरमान से उसके लिए चॉकलेट केक मंगाया था। पर रात के दस बज गए तो वह डरते-डरते बोली - "चलो केक काट लो, रात बहुत हो गई है।"

सोहन जो अब तक भरा बैठा था, अनु के शब्दों से फूट पड़ा।

"आज मेरा जन्मदिन है अनु, लेकिन मेरे माँ-बाप, भाई-बहन किसी ने फोन तक नहीं किया। क्या उनको याद नहीं है या सब जानबूझकर बेरुखी दिखा रहे हैं। तुमने देखा है ना, कैसे तुम्हें भी उन्होंने हमेशा अनदेखा किया।"

अनु ने उसे समझाते हुए कहा - "तुम तो हीरा हो, तुम्हारी चमक में घरवालों को कुछ दिख ही नहीं रहा। सब वक्त-वक्त की बात है। समय सही हो तो सब अपने, समय खराब हो तो पूछते हैं - तुम कौन?"

अनु की बात पर सोहन ने हिम्मत करके अपने पिताजी को फोन लगाया। कई घंटियों के बाद पिता ने फोन उठाया।

सोहन ने भर्राई आवाज में कहा - "पापा, आज मेरा जन्मदिन था..."

दूसरी तरफ से रूखी आवाज आई - "हाँ पता है। पर सोहन अब तू खुद समझदार है। जब तक तेरी सरकारी नौकरी थी, सब ठीक था। अब तूने काम छोड़ दिया, कर्ज में है। हम रोज-रोज तेरी मदद नहीं कर सकते। तेरी माँ भी यही कहती है, बार-बार फोन करके पैसे मत माँगा कर। इसलिए हमने सोचा अब दूरी ही ठीक है।"

सोहन सन्न रह गया।

फिर उसने बड़े भाई को फोन लगाया। भाई ने साफ कहा - "देख सोहन, पापा सही कह रहे हैं। पैसा है तो रिश्ता है। तू अब कुछ कमा नहीं रहा, ऊपर से भाभी की जिम्मेदारी। हम अपने बच्चों का भविष्य क्यों खराब करें? अपना जन्मदिन अपने आप मना ले।"

फोन कट गया।

सोहन की आँखों से आँसू नहीं, अब एक अजीब सा सुकून टपक रहा था। उसे आज सच समझ आ गया था।

अनु ने उसका हाथ थामा। सोहन धीरे से बोला - "अनु, तुम सही कहती थी। ये हीरा-वाली बात गलत थी। असली हीरा तो पैसा है। जिसकी चमक से ही रिश्ते दिखते हैं। बिना पैसे के तो माँ-बाप भी पराया कर देते हैं।"

उस रात केक नहीं कटा। उस केक पर लगी मोमबत्ती पिघल कर खत्म हो गई, जैसे बिना पैसे के रिश्ते पिघल जाते हैं।

सोहन ने अनु से कहा - "आज मेरा असली जन्मदिन है। आज मैं समझा कि इस दुनिया में सिर्फ दो ही सच्चे रिश्ते हैं - एक तुम, और दूसरा मेरा अपना संघर्ष। बाकी सब पैसे के साथी हैं।" हां सोहन ये दुनिया उगते सूरज को ही सलाम करती है। तुम्हारी कामयाबी ही सबकी बेरुखी का ज़बाब बनेगी। आज तुम्हारा जन्मदिन है आज संकल्प लो इतना कामयाब बनोगे कि सारे रिश्ते तुम्हारे साथ फोटो खिंचवाने के तरसेंगे। समय हर सवाल का जवाब खुद देगा। तुम हिम्मत नहीं हार सकते। मैं तुम्हारे साथ हूं। आओ एक नई शुरुआत करते हैं।
दोनों ने केक काटा और एक दूसरे को खिलाया। अनु ने जन्मदिन की बधाई दी।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली