The truth behind the silence in Hindi Drama by Nisha Choudhary books and stories PDF | खामोशी के पीछे का सच

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खामोशी के पीछे का सच

रात के 11:30 बज रहे थे। पूरे घर में गहरा सन्नाटा फैला हुआ था, और उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ दीवार पर टंगी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
कमरे की लाइट बंद थी, सिर्फ खिड़की से आ रही चाँदनी में रिया का उतरा हुआ चेहरा झलक रहा था। उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। उनकी शादी को 5 साल बीत चुके थे, लेकिन रिया को लग रहा था जैसे ये 5 साल नहीं, बल्कि कोई सदियों पुरानी बात हो। शुरुआती दिनों की वो घंटों लंबी बातें, वो बेवजह की हँसी-मज़ाक, अब सब गायब हो चुके थे। समीर जब से अपनी नई कंपनी में प्रमोट हुआ था, उसके पास साँस लेने तक की फुरसत नहीं थी। दोनों के बीच का रिश्ता अब सिर्फ "चाय बन गई?" और "हाँ, टेबल पर रख दी है" जैसे औपचारिक शब्दों तक सिमट कर रह गया था।
रिया का दिल अंदर ही अंदर घुट रहा था। उसे लगता था कि समीर की ज़िंदगी में अब उसकी कोई अहमियत नहीं रही। वह सिर्फ एक घर संभालने वाली बनकर रह गई है।
कल शाम रिया का 28वाँ जन्मदिन था। रिया ने पूरा दिन इस उम्मीद में गुज़ारा कि शायद आज समीर जल्दी घर आएगा, शायद आज वो दोनों पुरानी यादें ताज़ा करेंगे। लेकिन समीर रात के 11 बजे घर पहुँचा—थका-हारा, लाल आँखें और बिखरे बाल। उसने रिया की तरफ ठीक से देखा भी नहीं, टेबल पर पानी का गिलास पिया और बिना एक शब्द बोले सीधा बिस्तर पर जाकर सो गया। न कोई विश, न कोई मुस्कान। रिया का दिल टूटकर बिखर गया। वह बिना कुछ कहे चुपचाप दूसरे कमरे में जाकर रोती रही।
अगली सुबह जब रिया की आँखें खुलीं, तो सूरज निकल चुका था। कमरे में सन्नाटा था। समीर हमेशा की तरह ऑफिस के लिए निकल चुका था। रिया भारी मन से उठी और रसोई की तरफ बढ़ी।
जैसे ही वह डाइनिग टेबल के पास से गुज़री, उसकी नज़र वहाँ रखे एक छोटे से नीले बॉक्स और उसके नीचे दबे एक कागज़ के टुकड़े पर पड़ी।
रिया ने काँपते हाथों से वो खत उठाया और पढ़ना शुरू किया:
"सुनो रिया,
मैं जानता हूँ कि पिछले कुछ महीनों से मैं तुम्हें बिल्कुल वक्त नहीं दे पाया। मैं जानता हूँ कि कल तुम्हारा जन्मदिन था और मैं तुम्हें विश तक नहीं कर सका। लेकिन रिया, परसों जब डॉक्टर ने मुझे बताया कि पापा के दिल के इलाज के लिए अचानक ₹10 लाख पैसों की तुरंत ज़रूरत है, तो मेरे पैर तले ज़मीन खिसक गई थी।
मैं तुम्हें इस तनाव औरPareshani में नहीं धकेलना चाहता था। इसलिए मैंने दिन-रात एक्स्ट्रा काम करना शुरू किया, ताकि किसी तरह पैसों का इंतज़ाम हो सके। कल रात जब मैं घर आया, तो मैं इतना थक चुका था कि शरीर में खड़े रहने की भी हिम्मत नहीं थी। मैं तुम्हारा जन्मदिन भूला नहीं था। इस बॉक्स में वो घड़ी है जो तुम्हें सालों से पसंद थी, जिसे मैं अपनी पहली सैलरी से देना चाहता था पर दे नहीं पाया था।
मेरी सबसे बड़ी गलती यह रही कि मैंने तुमसे अपनी परेशानियाँ छिपाईं और तुम्हें अकेला महसूस कराया। पर यकीन मानो, मेरी हर मेहनत, मेरी हर साँस सिर्फ तुम्हारे और हमारे परिवार के लिए है। अगर हो सके, तो मुझे माफ़ कर देना।
- तुम्हारा समीर"
खत पढ़ते-पढ़ते रिया के हाथों से कागज़ छूट गया। उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, लेकिन इस बार उन आँसुओं में कोई शिकायत या दर्द नहीं था—उनमें सिर्फ प्यार, सुकून और पछतावा था।
रिया ने बिना एक पल गँवाए समीर का नंबर मिलाया। पहली ही रिंग पर समीर ने काँपती आवाज़ में फोन उठाया: "रिया... तुम ठीक तो हो ना? खत पढ़ा तुमने?"
रिया ने रोते हुए मुस्कराकर कहा: "सब ठीक है समीर... बस शाम को जल्दी घर आ जाना, आज चाय हम साथ में पिएंगे।"
💔 कभी-कभी रिश्तों में बढ़ती दूरियों का मतलब प्यार का खत्म होना नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का भारी बोझ होता है।
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