A Mother's Resolve in Hindi Short Stories by Piyush Goel books and stories PDF | एक माँ का संकल्प

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एक माँ का संकल्प

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम हैं वुशू.कपिल भाई उसकी कोचिंग कराते हैं, कपिल भाई के दो काबिल बेटे हैं।अपने दोनों बेटों को भी वुशू की कोचिंग कराते हैं।साथ ही साथ क्षेत्र के हर आयु के २०-२५ लड़के और लड़कियों को कोचिंग देते हैं:जब भी कोई किसी भी स्तर की स्पर्धा होती हैं, कपिल भाई मुझे जरूर अवगत कराते हैं , और जीत की ख़ुशियाँ भी साथ में मनाते हैं।खेल के कोटे से कपिल भाई के बड़े बेटा की सरकारी नौकरी भी लग गई,जिस दिन बेटा ट्रेनिंग के लिए जा रहा था, मुझे भी घर पर आने का न्योता दिया,मैं भी उनकी ख़ुशी में शरीक हुआ।कपिल  भाई ने मुझे अपने परिवार के लोगो से मिलवाया।अपनी माता जी से भी मिलवाया, मेंने माता जी के पैर छुये, कपिल भाई एक सम से बोले मेरी माता जी ने ३० साल से ज़्यादा हो गए पैरों में चप्पल नहीं पहनी.बेटे की नौकरी की दावत के बाद, मेरा मन हुआ आख़िर माता जी ने ३० साल से चप्पल क्यों नहीं पहनी।मैं माता जी के पास बैठ गया, और ३० साल से चप्पल ना पहनने का कारण पूछा।माता जी ने बताया, जब कपिल छोटा था,इसका बचपन में पंजा मुड़ गया था।बहुत ईलाज करवाया, पर कुछ फायदा नहीं हुआ।जिसने जो बताया सब किया पर कुछ फायदा नहीं हुआ।माता जी बोली एक दिन किसी ने बताया पास के गाँव में एक सिद्ध बाबा हैं, उनके पास अपने इस बेतेबको लेकर जाओ।लेकर गई वही सिद्ध साधु कें पास हीं संकल्प ले लिया, जब तक मेरे बेटे का पंजा ठीक नहीं होगा, मैं पैरो में चप्पल नहीं पहनूँगी, वो दिन हैं और आज का दिन हैं करीब ३० साल हो गए नगें पैर हूँ।और मेरे बेटे कपिल का पैर ठीक हो गया।इसको कहते हैं माँ और माँ का संकल्प।

लेखक परिचय:

19 पुस्तकें हाथ से अलग अलग तरीके से दर्पण छवि में विश्व में भारत का नाम करने वाले “मिरर इमेज मैन ऑफ़ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध पीयूष गोयल २० वी व २१ वी पुस्तक हाथ से लिख रहें हैं.पीयूष गोयल की १३ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, १४ वी पुस्तक पर काम चल रहा हैं.पीयूष गोयल इसके अलावा २२ sqr फीट की लूडो व ६०० कैरिकेचर्स ३*२ फीट के फ्रेम पर बना चुके हैं,कुछ न कुछ अनोखा करने वाले पीयूष गोयल १० हज़ार से ज़्यादा विद्यार्थियों को मोटीवेट कर चुके हैं.वैसे तो पीयूष २००३ से मोटिवेशन में हैं पर २०१२ से पूर्ण रूप से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहें हैं.उन्होंने बताया की सन् २०१२ में गांधी पॉलिटेक्निक, मुजफ्फरनगर ने Alumini आयोजन में बुलाया ( यही से मैंने डिप्लोमा यांत्रिकी में किया था),यहाँ मुझे मंच पर बोलने का मौक़ा मिला, पहले बार डर भी लग रहा था पर ३०-३५ मिनट बोला और मेरे भय निकल गया.मुझे उसी दिन महसूस हो गया कि क्यों न विधार्थियों को मोटीवेट किया जाये.उस दिन से लेकर आज तक विद्यार्थियों को निशुल्क मोटीवेट कर रहा हूँ.पीयूष ने पूछने पर बताया की आप निशुल्क मोटिवेशन क्यों करते हैं ,बहुत से मोटिवेशन स्पीकर पैसे लेकर मोटीवेट का काम कर रहें हैं,पहली बात मैं विद्यार्थियों को मोटिवेशन का काम करता हूँ, किसी प्रोफेशनल या बिजनेसमैन को मोटीवेट नहीं कर रहा हूँ, विद्यार्थियों मेरे मोटिवेशन से सफल हो जाये यही मेरी कमाई हैं.दूसरा मैं पुण्य और दुआ कमाने आया हूँ, जो दुनिया के किसी बाज़ार में नहीं मिलती, या कमानी पड़ती हैं.उन्होंने बताया की मेरा पहला वाक्य ये होता हैं”पूरी दुनिया नतीजे को सलाम करती हैं, प्रयास करने वाले की कभी हार नहीं होती हैं, मैं जब तक प्रयास करता रहूँगा तब तक मैं सफल ना हो जाऊँ, क्यूँकि हारना मेरी डिक्शनरी में नहीं हैं और काश मैं लिखता नहीं हूँ.और दूसरी लाइन ये होती हैं “ सपने आपके अपने हैं और आप अपनों के अपने हैं आपके सपने आपके तो हैं ही, आपके मम्मी पापा के भी हैं, उन सपनों को दिल से लगा लो और दिमाग से पूरा कर दो, और इसी जन्म में पूरा कर दो क्यूँकि ये जिंदगी मिलेंगी ना दुबारा”, और जो करते हैं मम्मी पापा से प्यार मेहनत से नहीं करते इनकार.पीयूष ने बताया की ये कुछ ऐसा शानदार विचार हैं जो आपकी सोच को नकारात्मकता से सकारात्मकता की और लें जाएँगी.पीयूष ने ये भी बताया की हम आने वाली पीढ़ियों को या समाज को क्या देने जा रहें हैं, याद रखना आने वाली पीढ़ियाँ हम से सवाल करेंगी कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिया किया क्या हैं?मैं तो अपने अच्छे विचारों से विद्यार्थियों की तरक्की देखना चाहता हूँ.पीयूष गोयल 9654271007