Devil ki Daastaan in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Devil की दास्तान - 54

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Devil की दास्तान - 54

(घड़ी में रात के 2 बजे हैं। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ है। कबीर गहरी नींद में सो रहा है। सीया उसकी तरफ देखती है — उसके चेहरे पर थकान है, पर एक रहस्य भी।)

(सीया धीरे-धीरे उठती है। कमरे की हल्की नीली लाइट उसके चेहरे पर पड़ती है। वो नंगे पाँव चलती है ताकि कोई आवाज़ न हो।
उसकी निगाहें सीधी उस अलमारी की तरफ हैं जहाँ कबीर अक्सर फाइलें छुपाकर रखता है।)

सीया (धीरे से खुद से) बोली - 
“आज देखती हूँ कबीर जी...आप आखिर मुझसे क्या छिपा रहे हो…।”

(वो अलमारी खोलती है।
अंदर बहुत सारी फाइलें हैं — “Research Log”, “Code Analysis”, “Project Shadow”, “Subject – S.T.”
सीया का हाथ काँपने लगता है जब वो आख़िरी फाइल उठाती है — जिस पर लिखा है “S.T. – Simran Thakur”)

(वो धीरे से फाइल खोलती है। अंदर उसकी खुद की तस्वीर लगी है — 18 साल की उम्र की। वो चौंक जाती है। उसकी सांसें तेज़ हो जाती हैं।)

सीया (फुसफुसाते हुए) बोली - 
“ये… ये मैं हूँ? पर… कबीर जी ने कहा था कि मैं सीया हूँ, सिमरन नहीं… तो फिर ये सब क्या है…”

(वो अगला पन्ना पलटती है — वहाँ लिखा है -
“Subject revived through genetic reconstruction after fatal accident – under code name Seeya.
Memory partially erased to prevent trauma reactivation.”)

(सीया की आँखें भर आती हैं। उसके हाथ काँपते हैं। वो पीछे हटती है, फाइल गिर जाती है। आवाज़ सुनकर कबीर की नींद खुल जाती है।)

(कबीर उठकर देखता है कि सीया फाइल पकड़े खड़ी है, आँसू उसके गालों पर हैं। कबीर का चेहरा सफ़ेद पड़ जाता है।)

कबीर (धीरे, पर भारी आवाज़ में) बोला - 
“सीया… वो फाइल वापस रख दो।”

सीया (टूटी हुई आवाज़ में) बोली - 
“वापस?
ये फाइल तो मेरी ज़िंदगी है कबीर जी!
आपने मुझसे झूठ बोला… मैं सिमरन हूँ न?
तुमने मुझे बदला, मेरी यादें छीनीं, और मुझे नई पहचान दी…”

(कबीर आगे बढ़ता है। उसकी आँखों में डर और दर्द दोनों हैं।)

कबीर बोला - 
“तुम मर चुकी थीं सिमरन… उस हादसे में!
तुम्हारा शरीर टूटा हुआ था, दिमाग़ में ब्लीडिंग…
मैंने तुम्हें वापस लाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया।
Project Shadow सिर्फ़ एक प्रयोग नहीं था… वो मेरा पागलपन था तुम्हें दोबारा पाने का! रुद्र ने तुम्हे मार ही डाला था सिया।”

(सीया पीछे हटती है, डर और गुस्से में काँपती हुई।)

सीया बोली - 
“तो मैं एक प्रयोग हूँ, कबीर जी?
आपका प्यार नहीं… आपका प्रोजेक्ट!”

(कबीर की आँखों में आँसू हैं। वो उसके करीब आता है, पर सीया उसे धक्का दे देती है। फाइल ज़मीन पर बिखर जाती है।)

सीया (रोते हुए) बोली - 
“आपने मुझसे मेरी पहचान छीन ली…
अब मैं कौन हूँ? सिमरन… या तुम्हारी बनाई सीया?”

(कबीर उसे पकड़ने की कोशिश करता है, पर वो कमरे से बाहर निकल जाती है। वो अंधेरे में दौड़ती है, सीढ़ियाँ उतरती है, और दरवाज़ा खोलती है। बारिश फिर से शुरू हो चुकी है।)

(कबीर पीछे-पीछे भागता है, सीया बारिश में खड़ी है। उसकी साड़ी गीली है, बाल चेहरे से चिपके हुए हैं। वो चीखती है —)

सीया बोली - 
“क्यों किया आपने ये सब, कबीर जी?!
क्या आपने कभी सोचा कि अगर मुझे यादें लौट आईं तो मैं किस दर्द में रहूँगी?”

कबीर (रोते हुए, भीगी आवाज़ में) बोला - 
“मैं तुम्हें खो नहीं सकता था सिमरन…
तुम मेरे बिना अधूरी थी… और मैं तुम्हारे बिना मर चुका था…”

(दोनों एक-दूसरे की तरफ देखते हैं। सीया के होंठ काँपते हैं, आँखों में आँसू हैं। वो धीरे से बोलती है —)

सीया (टूटी आवाज़ में) बोली - 
“शायद इस बार… मुझे खुद को खोजने के लिए… आपसे दूर जाना होगा।”

(वो पीछे मुड़ती है और बारिश में चल देती है। कबीर वहीं खड़ा रह जाता है, भीगा हुआ, टूट चुका। उसकी आँखों में दर्द, और सीया की परछाई दूर अंधेरे में गायब हो जाती है।)

“कभी-कभी प्यार ज़िंदा रखने के लिए उसे मरने देना पड़ता है…
और सीया अब अपने सच की तलाश में निकल चुकी थी…”

(तेज़ बारिश अब भी चल रही है। कबीर घर के बाहर भीगा खड़ा है, उसकी नज़रें उस दिशा में हैं जहाँ से सीया गई थी।नउसके होंठ काँप रहे हैं, आँखों में आँसू और पछतावा दोनों हैं।)

कबीर (धीरे से, टूटे स्वर में) बोला - 
“सिमरन… नहीं, सीया… तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकती…
मैंने तुम्हें मौत से छीनकर वापस पाया है…”

(वो ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ जाता है। बारिश में भी उसके आँसू साफ़ दिख रहे हैं। वो उठकर घर के अंदर जाने ही वाला होता है कि —)

(पीछे से किसी के गिरने की आवाज़ आती है। वो मुड़ता है — सीया दरवाज़े के पास गिरी पड़ी है, पूरी तरह भीगी हुई और बेहोश।)

कबीर (चौंककर दौड़ते हुए) बोला - 
“सीया!!”

(वो उसे गोद में उठाता है, उसके बाल चेहरे से हटाता है। उसका चेहरा पीला पड़ चुका है। कबीर उसे कमरे में ले जाता है, उसे बिस्तर पर लिटाता है। तौलिये से उसके बाल और चेहरे को साफ़ करता है।)

कबीर (कंपती आवाज़ में) बोला - 
“तुम पागल हो क्या... इस तरह भाग गई थी... अगर कुछ हो जाता तो...।”

(उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, डर है। वो उसके माथे पर हाथ रखता है।)

(कुछ देर बाद सीया धीरे-धीरे आँखें खोलती है। कमरे में नीली हल्की रोशनी है। बाहर अब भी बारिश की बूंदें खिड़की पर गिर रही हैं।)

सीया (कमज़ोर आवाज़ में) बोली - 
“कबीर जी… मैं कहाँ हूँ?”

कबीर (धीरे से) बोला - 
“घर पर… तुम बारिश में बेहोश हो गई थी। कुछ याद है तुम्हें?”

(सीया माथे पर हाथ रखती है। थोड़ी देर सोचती है, पर चेहरा खाली है।)

सीया बोली - 
“मुझे कुछ याद नहीं... बस इतना याद है कि...अगर आपने मुझे... किस किया... तो मुझे सब याद आ जाएगा।”

(कबीर एक पल को जम जाता है। वो उसकी तरफ देखता है — उसकी आँखों में सच्चाई और मासूमियत दोनों हैं। वो जानता है कि अगर उसने ऐसा किया... तो सब कुछ बदल जाएगा।)

कबीर (धीरे, काँपते स्वर में) बोला - 
“सीया… ये सब इतना आसान नहीं है।
कुछ यादें ऐसी होती हैं... जिन्हें लौटाना... ज़हर साबित होता है।”

(सीया की आँखों में आँसू भर आते हैं।
वो धीरे से कहती है —)

सीया बोली - 
“तो फिर मैं ऐसे कैसे जियूँ, कबीर जी?
बिना अपने अतीत के, बिना अपनी सच्चाई के…मैं तो एक अधूरी इंसान बन गई हूँ।”

(कबीर कुछ नहीं कहता। वो उसकी तरफ देखता है, उसके गाल पर गिरे आँसू को अपनी उंगली से पोंछता है। उसका दिल टूट चुका है।
वो उसके माथे को हल्के से छूता है, पर होंठों तक पहुँचने से खुद को रोक लेता है।)

(सीया धीरे-धीरे सो जाती है। कबीर उसके पास बैठा है। उसकी उंगलियाँ अब भी सीया के हाथ पर हैं। उसकी आँखों से एक आँसू गिरता है, जो सीया के हाथ पर आकर रुक जाता है।)

कबीर (धीरे, खुद से) बोला - 
“काश तुम समझ पाती सीया...सच कभी-कभी इतना भारी होता है कि उसे याद करना भी जानलेवा बन जाता है…”

(वो धीरे से उठता है, लैपटॉप खोलता है और सीया की फाइल देखता है।

स्क्रीन पर लिखा है —
‘Warning: Full memory reactivation may cause neural shock.’)

(कबीर स्क्रीन को बंद कर देता है। फिर सीया की तरफ देखता है, जो नींद में है, उसका चेहरा शांत है। कबीर उसकी हथेली को पकड़ लेता है और धीरे से फुसफुसाता है —)

कबीर बोला - 
“अब चाहे जो हो जाए…मैं तुम्हें फिर नहीं खोने दूँगा।”

(कैमरा धीरे-धीरे ज़ूम आउट करता है —
बारिश रुक चुकी है, पर उनके बीच तूफ़ान अब भी बाकी है।)

“कभी-कभी इंसान सच्चाई से नहीं, बल्कि यादों से डरता है…और सीया की यादें अब एक बार फिर जागने को थीं…”