The Father's Broken Cycle in Hindi Drama by Nisha Choudhary books and stories PDF | बेटी की पुरानी साइकिल

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बेटी की पुरानी साइकिल

जब 18 साल की अनाया ने शहर के बड़े कॉलेज जाने के लिए अपने पिता से कार की चाबी माँगी, तो उसके पिता शर्मा जी मुस्कुराकर स्टोर रूम में गए और एक पुरानी जँग लगी साइकिल बाहर निकाल लाए। अनाया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, पर उसे क्या पता था कि इस खटारा साइकिल के पीछे उसकी पूरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सच छिपा है...
अनाया शहर के सबसे बड़े और महंगे कॉलेज में पढ़ने जा रही थी। उसे पूरा यकीन था कि उसके जन्मदिन पर पापा उसे कोई चमचमाती कार या स्कूटी सरप्राइज में देंगे। लेकिन जब शर्मा जी धूल जमी हुई पुरानी साइकिल लेकर सामने खड़े हुए, तो अनाया का सब्र जवाब दे गया।
वह चिल्लाकर बोली, "पापा! आप मेरा मज़ाक उड़ाना चाहते हैं? मेरे सारे दोस्त बड़ी-बड़ी गाड़ियों से कॉलेज आते हैं और मैं इस खटारा साइकिल पर जाऊँगी? लोग मुझ पर हँसेंगे!"
शर्मा जी के चेहरे पर एक शांत और दर्दभरी मुस्कान थी। उन्होंने प्यार से अनाया का सिर सहलाया और कहा, "बेटा, एक बार इसके पेडल पर पैर रखकर तो देखो। यह सिर्फ एक साइकिल नहीं है।"
अनाया मुँह बनाकर भारी कदमों से साइकिल के पास गई। जैसे ही वह गद्दी पर बैठी, उसकी नज़र हैंडल के पास बँधी एक छोटी सी पुरानी थैली पर पड़ी। कौतूहल में उसने थैली खोली, तो उसमें से कुछ दवाइयों की रसीदें, एक मुड़ा हुआ कागज़ और एक छोटी सी डायरी निकली।
अनाया ने डायरी का पहला पन्ना खोला। उस पर लिखा था— ‘मेरी नन्ही अनाया की पहली साइकिल - 2012’
अनाया ने उत्सुकता में पन्ने पलटने शुरू किए। हर पन्ने पर शर्मा जी की काँपती हुई लिखावट में एक-एक तारीख और उनके संघर्ष का हिसाब दर्ज था:
12 अगस्त: आज कंपनी से बोनस नहीं मिला। अनाया पड़ोस के बच्चों की साइकिल देखकर रो रही थी। अपनी सोने की अँगूठी गिरवी रखकर यह साइकिल खरीदी है। उसकी एक मुस्कान के आगे मेरी अँगूठी की कोई कीमत नहीं।
5 नवंबर: आज अनाया साइकिल से गिर गई और उसके घुटने में गहरी चोट आ गई। अस्पताल का बिल भरने के लिए दोस्तों से उधार लेना पड़ा। पूरी रात उसकी माँ और मैं सो नहीं सके। हे भगवान, मेरी बेटी के सारे दर्द मुझे दे दो।
18 जनवरी: अनाया का बड़ा एक्सीडेंट हुआ, साइकिल का पहिया मुड़ गया। डॉक्टर की भारी फीस भरने के लिए मुझे अपना बचा हुआ पीएफ (PF) निकालना पड़ा।
अनाया की आँखों से आँसू छलक पड़े। जिन पन्नों को वह महज़ रसीदें समझ रही थी, वे उसके पिता के अथक त्याग, पसीने और अनकहे प्यार की दास्तान थे। उसे अहसास हुआ कि जिसे वह ‘खटारा साइकिल’ कहकर ठुकरा रही थी, वह दरअसल उसके पापा के ख़ून-पसीने से सींची हुई उनकी सबसे बड़ी पूँजी थी।
उसी डायरी के आखिरी पन्ने पर आज की तारीख लिखी थी:
‘मेरी प्यारी बेटी अनाया, जब तुम पहली बार इस साइकिल पर बैठी थीं, तो मैंने हाथ पकड़कर तुम्हें गिरते-गिरते बचाया था। आज तुम ज़िन्दगी के नए रास्ते पर कदम रख रही हो। यह साइकिल तुम्हें हमेशा याद दिलाएगी कि तुम्हारे पापा ने अपनी हैसियत से बाहर जाकर तुम्हें पाला है। गाड़ियाँ तो पैसों से खरीदी जा सकती हैं बेटा, पर यह साइकिल तुम्हें हमेशा ज़मीन से जोड़े रखेगी और कभी भटकने नहीं देगी।’
अनाया का दिल भर आया। आँखों में आँसू लिए वह दौड़कर अपने पापा के गले से लिपट गई। वह फूट-फूटकर रोते हुए बोली, "मुझे माफ कर दीजिए पापा! मैं बहुत स्वार्थी हो गई थी। यह साइकिल दुनिया की किसी भी महंगी कार से हजार गुना ज़्यादा कीमती है। मैं इसी पर कॉलेज जाऊँगी।"
शर्मा जी की आँखों में भी खुशी के आँसू छलक आए। सच ही कहा गया है, बेटियाँ पिता का अभिमान होती हैं, और एक पिता का प्यार किसी दिखावे का मोहताज नहीं होता।
अगर इस कहानी ने आपके दिल को छुआ हो और आपको अपने पिता के त्याग की याद दिलाई हो, तो कमेंट में 'LOVE YOU PAPA' लिखकर अपना प्यार ज़रूर जताएँ! ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और भावुक कहानियों के लिए मुझे फॉलो करना न भूलें