Mafia saiya chapter 11 in Hindi Love Stories by Shilpi Mishra books and stories PDF | Mafia saiya chapter 11

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Mafia saiya chapter 11


अध्याय 11 : लाल साड़ी का सच

"मालिक! बचाओ! आराध्या बिटिया को कोई खिड़की से खींच रहा है!"

दादी अम्मा की चीख सुनकर रुद्र और नित्या दूसरे कमरे में भागे।

कमरा अंदर से बंद था।

रुद्र ने दरवाजा तोड़ा - धड़ाम!

अंदर का नजारा देखकर दोनों के होश उड़ गए।

आराध्या खिड़की पर लटकी हुई थी। उसका आधा शरीर बाहर था। और खिड़की के बाहर... एक लाल साड़ी का पल्लू लहरा रहा था, जैसे कोई उसे खींच रहा हो।

"दीदी!" नित्या भागी और आराध्या के पैर पकड़ लिए।

रुद्र ने खिड़की से बाहर देखा। बाहर कोई नहीं था। सिर्फ अंधेरा और बगीचा। पर लाल साड़ी का पल्लू हवा में गायब हो गया।

रुद्र ने आराध्या को खींचकर अंदर लिया।

आराध्या बेहोश हो गई थी। उसके गले पर लाल निशान थे... जैसे किसी ने नाखूनों से पकड़ा हो।

दादी अम्मा रोने लगी, "मैंने कहा था मालिक! मालकिन की आत्मा वापस आ गई है! वो किसी नई बहू को इस हवेली में नहीं रहने देगी!"

नित्या डर गई, "रुद्र... ये क्या हो रहा है?"

रुद्र ने गुस्से में टेबल पर रखा गिलास तोड़ दिया।

"कोई आत्मा नहीं है! कोई भूत नहीं है!" वो चिल्लाया। "ये सब मेरे चाचा का किया हुआ है!"

"चाचा?" नित्या ने पूछा।

"हाँ, विक्रम राजावत। मेरा सगा चाचा। 10 साल से वो इस हवेली को हड़पना चाहता है। मेरी माँ को उसने ही मारा। अब वो चाहता है कि मैं पागल हो जाऊं... इसलिए वो ये लाल साड़ी वाला नाटक कर रहा है!"

रुद्र ने फोन निकाला और अपने गार्ड को फोन किया, "पूरी हवेली की तलाशी लो! हर कोने में! अगर कोई लाल साड़ी में दिखे तो गोली मार दो!"

10 मिनट में 20 गार्ड पूरी हवेली छानने लगे।

नित्या आराध्या के पास बैठी उसके गले पर दवाई लगा रही थी।

तभी नित्या को आराध्या की मुट्ठी में कुछ मिला।

एक कागज। छोटा सा मुड़ा हुआ कागज।

नित्या ने खोला।

उसमें लिखा था - *"भाग जाओ... नहीं तो तुम तीनों मरोगी... - तुम्हारी शुभचिंतक"*

नित्या ने वो कागज रुद्र को दिखाया।

रुद्र ने पढ़ा और हंस पड़ा।

"शुभचिंतक? मेरा चाचा खुद को शुभचिंतक कहता है?"

उसने कागज फाड़ दिया।

"नित्या, तू डर मत। आज रात से तू और तेरी बहन मेरे कमरे में सोओगी। मेरे साथ। मैं देखता हूँ कौन आता है लाल साड़ी पहनकर।"

रात के 12 बजे।

तीनों एक ही बड़े बेड पर थे। बीच में आराध्या, एक तरफ नित्या, दूसरी तरफ रुद्र। रुद्र की बंदूक उसके तकिये के नीचे थी।

लाइट जल रही थी।

तभी... कमरे की लाइट फिर से झपकने लगी।

फ्लिकर... फ्लिकर...

और दरवाजे के बाहर से किसी की पायल की आवाज आई - छन... छन... छन...

आराध्या ने नित्या का हाथ कसकर पकड़ लिया।

दरवाजा धीरे-धीरे खुला।

सामने... वही लाल साड़ी वाली औरत खड़ी थी। चेहरा घूंघट से ढका हुआ। हाथ में एक दिया।

"कौन हो तुम?" रुद्र ने बंदूक तान दी।

उस औरत ने घूंघट हटाया।

और जिसे देखा, उसे देखकर रुद्र की बंदूक हाथ से गिर गई।

*वो औरत... रुद्र की माँ थी! जो 10 साल पहले मर गई थी! बिल्कुल वैसी ही... जरा भी बूढ़ी नहीं हुई थी!*

"माँ...?" रुद्र के मुंह से निकला।

उस औरत ने मुस्कुराते हुए कहा, *"हाँ बेटा... मैं आ गई... अपनी बहुओं को लेने..."*

और उसने दिया बुझा दिया। फिर से अंधेरा।

*अगले अध्याय में क्या होगा?*

क्या वो सच में रुद्र की माँ की आत्मा है या कोई औरत उसका रूप लेकर आई है? क्या नित्या और आराध्या को कोई बचाएगा? और 10 साल पहले मरी हुई औरत जिंदा कैसे हो सकती है?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 12 : मरी हुई माँ जिंदा कैसे?