Devil ki Daastaan in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | सिरदर्द

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सिरदर्द

(कमरे में सुबह की नरम धूप खिड़की के पर्दों से छनकर आ रही है। हवा में एक अलग ही ताजगी और खुशबू है—शायद रात की बारिश और फूलों की मिली-जुली महक।)

(सिमरन की पलकें झपकती हैं। उसे जैसे ही होश आता है, कल रात की यादें उसके चेहरे पर एक गहरी लालिमा ला देती हैं। वह शर्माते हुए करवट बदलती है और चादर को अपने चेहरे के पास खींच लेती है, लेकिन उसके होंठों पर एक अनजानी, संतुष्ट मुस्कान खेल रही है।)

(तभी, करन की आँखें खुलती हैं। वह सिमरन को देखता है और उसके शर्माए हुए चेहरे को देखकर उसकी आँखों में चमक आ जाती है। वह धीरे से उठता है और सिमरन के माथे पर एक हल्का सा चुंबन देता है।)

करन (गहरी, थोड़ी भारी लेकिन प्यार भरी आवाज़ में) बोला - 
Good morning... मेरी जान।

(सिमरन चादर के नीचे से झांकती है और घड़ी की ओर इशारा करते हुए हंसती है।)

सिमरन (शरारती अंदाज़ में) बोली - 
Good afternoon, करन जी... साढ़े बारह बज गए हैं।

(करन चौंककर घड़ी की ओर देखता है और फिर वापस सिमरन की ओर। उसके चेहरे पर एक शर्मिंदगी भरी मुस्कान आ जाती है।)

करन (हंसते हुए) बोला - 
सच में? मुझे तो लगा अभी सुबह हुई है।
शायद... कल रात की वजह से समय का अहसास ही नहीं रहा।

(सिमरन अब पूरी तरह से चादर से बाहर आती है। उसके बाल बिखरे हुए हैं, चेहरे पर एक अलग ही निखार है। वह करन की छाती पर सिर रखकर लेट जाती है।)

सिमरन (धीमे स्वर में) बोली - 
आपको थकान तो नहीं हो रही? आपकी तबीयत कैसी है?

(करन अपना हाथ सिमरन के पीठ पर फेरता है। उसकी आँखें अभी भी सामान्य हैं, कोई लालिमा नहीं। वह खुद को ताज़ा और हल्का महसूस कर रहा है, जैसे सालों का बोझ उतर गया हो।)

करन (संतुष्टि से) बोला - 
मैं पहले से बेहतर हूँ, सिमरन।
ऐसा लग रहा है जैसे मेरे अंदर की वो बेचैनी... वो प्यास... सब शांत हो गई हो।
शायद तुम्हारे प्यार ने उस राक्षस को हमेशा के लिए सुला दिया है।

(सिमरन ऊपर देखती है और करन की आँखों में देखती है।)

सिमरन (उम्मीद से भरी आवाज़ में) बोली - 
तो... क्या आप समझ रहे हैं कि हमारी कोशिश सफल होगी?

(करन गंभीर हो जाता है, लेकिन उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि विश्वास है।)

करन (ध्यान से) बोला - 
मुझे नहीं पता कि भविष्य क्या लाएगा, सिमरन।
लेकिन कल रात... जब मैंने तुम्हें अपनी बाँहों में लिया, तो मुझे पहली बार एहसास हुआ कि मैं सिर्फ एक वैंपायर नहीं, बल्कि एक पति हूँ।
अगर भगवान ने चाहा, तो हमारा घर जल्दी ही किसी नन्हे कदमों की आवाज़ से गूंज उठेगा।

(वह सिमरन के हाथ को चूमता है।)

करन जारी रखता है - 
चलो, अब उठते हैं। तुम्हें भूख लगी होगी। और आज... आज मैं खुद नाश्ता बनाऊंगा। तुम बस आराम करो।

सिमरन (खुशी से चमकते हुए) बोली - 
वाह! करन जी खाना बनाएंगे? यह तो बहुत बड़ी बात है।

(वे दोनों हंसते हैं। कमरे का माहौल हल्का और रोमांटिक है।
लेकिन जैसे ही करन बिस्तर से उठता है, उसे अचानक सिर में एक हल्की सी चुभन महसूस होती है। वह रुकता है, अपना सिर सहलाता है, लेकिन फिर इसे अनदेखा कर देता है।)

(सिमरन यह नहीं देख पाती। वह अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई, आने वाले सुखद भविष्य के सपने बुन रही है।)

"प्यार की इस रात ने नई उम्मीदें जगाई थीं।
पर क्या प्रकृति के नियम इतनी आसानी से टूट सकते थे?
या यह शांति... तूफान से पहले की सबसे गहरी खामोशी थी?"

(दोपहर का समय है। सूरज की तेज धूप खिड़कियों से अंदर आ रही है, लेकिन कमरे के अंदर पर्दे गिराए हुए हैं ताकि हवा शांत रहे।)

(सिमरन बिस्तर के किनारे बैठी है। उसके चेहरे पर एक हल्की सी पीड़ा और थकान झलक रही है। वह चुपचाप अपने हाथों को देख रही है, कभी-कभी अपनी कमर पर हाथ रखकर हल्की सी सिसकारी भरती है। उसका शरीर अभी भी उस रात के intense अनुभव से उबर रहा है।)

(करन रसोई में व्यस्त है। बर्तनों की खनक और चाय की खुशबू पूरे घर में फैली हुई है। वह नाश्ता तैयार करके ट्रे में सजाता है—गर्म परांठे, दही और कुछ मीठे पकवान। उसके चेहरे पर संतोष है कि वह सिमरन की सेवा कर सकता है।)

(लेकिन जैसे ही वह ट्रे उठाता है, उसके सिर में एक तेज झनझनाहट होती है। *चुभ...*
वह रुक जाता है, आँखें बंद करता है और माथे को सहलाता है। दर्द हल्का है, लेकिन लगातार बना हुआ है।)

करन (मन ही मन) सोचता है - 
*शायद कल रात की वजह से नींद पूरी नहीं हुई... या हो सकता है मैंने ज्यादा देर तक जागकर सिमरन को देखा। थकान ही होगी।*

(वह इस दर्द को अनदेखा करता है और मुस्कुराते हुए कमरे में वापस आता है।)

करन (नरम स्वर में) बोला - 
नाश्ता तैयार है, जान।
आओ, तुम्हें थोड़ा खाना चाहिए ताकि ताकत वापस आए।

(वह ट्रे टेबल पर रखता है और सिमरन के पास बैठ जाता है। वह ध्यान से सिमरन के चेहरे को देखता है।)

करन (चिंता से) बोला - 
दर्द हो रहा है?
माफ़ करना सिमरन... शायद मैंने कल रात... थोड़ा ज्यादा जोर लगा दिया। मैं भूल गया था कि तुम नाजुक हो।

सिमरन (शर्माते हुए, लेकिन प्यार से) बोली - 
नहीं करन जी... ऐसा मत कहिए।
वो दर्द नहीं, बस... एक अजीब सा एहसास है। शरीर भारी लग रहा है। पर आपने इतना सब किया... आपको थकान तो नहीं हो रही?

(करन सिमरन के बालों में हाथ फेरता है। उसका सिर फिर से झनझनाता है, लेकिन वह इसे छिपा लेता है।)

करन (मुस्कुराते हुए) बोला - 
मुझे? मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है।
बस थोड़ा सा सिरदर्द है, शायद नींद कम होने की वजह से। कोई बात नहीं, शाम को ठीक हो जाएगा।
तुम बस आराम करो और खाओ।

(सिमरन करन के हाथ से एक टुकड़ा खाती है। दोनों के बीच एक गहरा जुड़ाव है।
लेकिन करन के सिर का दर्द अब 'हल्का' नहीं रह गया है। वह धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जैसे कोई सुई दिमाग के अंदर घुस रही हो।)

(अचानक, करन की नजर सिमरन के गले पर पड़ती है। वहां नसों की हल्की हरकत दिख रही है।
एक पल के लिए, करन की पुतलियां सिकुड़ जाती हैं। उसके मुंह में पानी आ जाता है—वही प्राचीन, राक्षसी प्यास।
लेकिन वह तुरंत अपनी नजर हटा लेता है और गहरी सांस लेता है।)

करन (खुद को संभालते हुए, मन ही मन) - 
*नहीं... यह सिर्फ भूख है। या शायद सिरदर्द का असर। मैं इंसान हूँ। मैं अपना नियंत्रण नहीं खो सकता।*

सिमरन (करन के चेहरे के भाव बदलते देखकर) बोली - 
करन जी? सब ठीक तो है? आपका चेहरा एकदम सफेद पड़ गया है।

करन (जल्दी से मुस्कुराते हुए) बोला - 
हाँ... बस थोड़ा चक्कर आया।
शायद मुझे भी थोड़ा आराम करने की जरूरत है।
तुम खा लो, मैं बस थोड़ी देर लेट जाता हूँ।

(वह उठता है और बिस्तर के दूसरी तरफ लेट जाता है, अपनी आँखें बंद कर लेता है।
लेकिन अंधेरे में, उसे अपनी नसों में जलन महसूस होती है।
और उसके कानों में एक अजीब सी गूंज सुनाई देने लगती है—जैसे कोई दूर से उसे बुला रहा हो।)

"सिरदर्द... या श्राप का जागना?
करन ने इसे थकान समझा।
लेकिन प्रकृति कभी झूठ नहीं बोलती।
और उस रात की गवाही... अभी बाकी थी।"