Devil ki Daastaan in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | खून

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खून

(कमरे में अचानक हवा का तेज झोंका आता है। पर्दे जोर-जोर से लहराते हैं और खिड़कियां 'खड़-खड़' करके बजने लगती हैं। बाहर आसमान काले बादलों से घिर गया है, जैसे कोई भयानक तूफान आने वाला हो।)

(सिमरन लैपटॉप पर काम कर रही थी, लेकिन हवा के कारण उसे धूल और मिट्टी का सामना करना पड़ रहा है। वह जल्दी से उठती है और सारी खिड़कियां बंद कर देती है, लेकिन तब तक कमरे में काफी धूल भर चुकी होती है। वह एक रुमाल से मुंह ढंककर झाड़ू लेती है और फर्श साफ करने लगती है।)

(थोड़ी देर बाद, जब धूल थोड़ी शांत होती है, सिमरन को याद आता है कि छत पर कपड़े सूखे हुए हैं और अब बारिश शुरू होने वाली है। वह सीढ़ियों की ओर देखती है, लेकिन उसका शरीर अभी भी भारी और दर्द से भरा हुआ है। वह ऊपर चढ़ने में असमर्थ महसूस करती है।)

सिमरन (आवाज़ लगाते हुए) बोली - 
करन जी... करन जी?

(कोई जवाब नहीं। करन गहरी नींद में सोया हुआ है। सिमरन धीरे से उसके पास जाती है और उसके कंधे को हल्के से हिलाती है।)

सिमरन (नरम स्वर में) बोली - 
करन जी... जागिए।
बाहर तूफान आने वाला है। कृपया छत से कपड़े ले आइए। मैं ऊपर नहीं चढ़ पा रही, मेरे पैरों में अभी भी दर्द है।

(करन की आँखें धीरे-धीरे खुलती हैं। लेकिन इस बार, उसकी आँखों में वही नीला रंग नहीं है। वे थोड़ी धुंधली हैं, और पुतलियां फैली हुई हैं। उसके चेहरे पर पसीना है। सिरदर्द अब 'हल्का' नहीं रहा, बल्कि एक तेज, सुई जैसी पीड़ा बन गया है।)

करन (भारी और खुरदरी आवाज़ में) बोला - 
कपड़े...? हाँ... ठीक है।

(वह बिस्तर से उठता है। उसे चक्कर आता है, लेकिन वह संभल जाता है। उसके कदम लड़खड़ाते हैं, लेकिन वह किसी तरह संतुलन बना लेता है। वह बिना कुछ और बोले, तेजी से कमरे से बाहर निकल जाता है।)

(सिमरन उसे जाते हुए देखती है। उसे करन के व्यवहार में एक अजीब सी जल्दबाजी और रुखाई महसूस होती है, जो उसके लिए नई बात है।)

सिमरन (मन ही मन) सोचती है - 
*शायद उन्हें बहुत तेज सिरदर्द है। इसलिए वे ज्यादा बात नहीं कर पा रहे।*

(करन सीढ़ियों से ऊपर छत की ओर बढ़ता है। हर कदम के साथ, उसके सिर में दर्द बढ़ता जाता है। हवा अब और तेज हो गई है। बारिश की पहली बूंदें गिरने लगती हैं।)

(छत पर पहुंचकर, करन कपड़ों को इकट्ठा करने लगता है। हवा इतनी तेज है कि कपड़े उड़ने वाले हैं। वह जल्दी-जल्दी उन्हें टोकरी में डालता है।)

(अचानक, एक तेज बिजली कड़कती है। करन का हाथ रुक जाता है।
उसे अपने सिर के अंदर एक तेज 'चटक' की आवाज़ सुनाई देती है।
और फिर... उसकी आँखों के सामने सब कुछ लाल हो जाता है।)

(वह अपनी आँखें मलता है। जब वह फिर से देखता है, तो दुनिया बदल चुकी है।
रंग गायब हैं। सब कुछ काला-सफेद और लाल है।
और उसे एक गंध आती है—गीली मिट्टी की नहीं... बल्कि **खून** की।)

(नीचे, घर के अंदर, सिमरन अभी भी लैपटॉप पर बैठी है। उसकी गर्दन की नस धड़क रही है।
करन छत पर खड़ा है, टोकरी हाथ में लिए, लेकिन उसका ध्यान कपड़ों पर नहीं है।
उसका ध्यान उस 'गंध' पर है जो ऊपर की हवाओं के साथ नीचे से आ रही है।)

करन (फुसफुसाते हुए, अपनी ही आवाज़ से अनजान) बोला - 
*खून...*

(वह टोकरी को वहीं छोड़ देता है। उसकी पुतलियां पूरी तरह लाल हो चुकी हैं।
वह धीरे-धीरे सीढ़ियों की ओर बढ़ता है... नीचे... सिमरन की ओर।)

"तूफान बाहर नहीं था।
तूफान अब करन के अंदर था।
और इस बार... कोई सिमरन उसे रोकने के लिए तैयार नहीं थी।"

(करन छत के किनारे पर खड़ा है। बारिश की बूंदें उसके चेहरे से टकरा रही हैं, लेकिन उसे ठंडक नहीं, बल्कि एक जलन महसूस हो रही है। उसकी साँसें तेज और भारी हैं। वह अपनी मुट्ठियाँ इतनी जोर से भींचता है कि नाखून हथेलियों में घुस जाते हैं, लेकिन दर्द उसे रोक नहीं पा रहा।)

(अंदर का राक्षस चीख रहा है—*शिकार... खून...*
करन का इंसानी हिस्सा चिल्ला रहा है—*नहीं! सिमरन नीचे है! भागो यहाँ से!*

(आखिरकार, करन का संयम टूट जाता है। वह एक जोरदार चीख के साथ आसमान की ओर कूदता है। उसके पीछे से विशाल, काले पंख फैल जाते हैं—वही पंख जो उसने सालों से छिपाए रखे थे। वह हवा में तैरता है और तेजी से अंधेरे बादलों की ओर उड़ान भरता है, ताकि शहर की रोशनों और लोगों की गंध से दूर जा सके।)

(नीचे, खिड़की के पास खड़ी सिमरन यह सब देखती है। उसका दिल ज़ोर से धड़क उठता है। वह जानती थी कि करन वैंपायर है, वह उड़ सकता है, लेकिन आज पहली बार उसने उसे इस रूप में देखा था—इतना भयानक, इतना अकेला।)

सिमरन (घबराई हुई, खुद से) बोली - 
करन जी...? इतने तूफान में आप कहाँ चले गए?

(बाहर हवाएं अब और तेज हो गई हैं। पेड़ की डालियां टूटकर गिर रही हैं। बिजली कड़क रही है। सिमरन की नजर आसमान में उड़ते हुए काले साये पर टिकी है, जो तेज हवाओं के बीच संघर्ष कर रहा है।)

सिमरन (डरते हुए, हाथों को जोड़कर) बोली - 
हे भगवान... अगर वे किसी पेड़ में अटक गए तो? या बिजली गिर गई तो?
उनकी हालत ठीक नहीं लग रही थी। उनका सिर दर्द... वो लाल आँखें...

(उसे याद आता है कि करन ने कहा था कि उन्हें 'शिकार' की तलाश है। सिमरन का चेहरा पीला पड़ जाता है।)

सिमरन (कांपती आवाज़ में) बोली - 
शिकार? क्या वो... क्या वो किसी इंसान को नुकसान पहुंचाएंगे?
नहीं... मेरे करन ऐसा नहीं कर सकते। वो सिर्फ भ्रमित हैं।

(वह खिड़की से हटती है और जल्दी से अपना रेनकोट और एक टॉर्च उठाती है। वह दरवाजे की ओर बढ़ती है, लेकिन फिर रुक जाती है। बाहर तूफान इतना तेज है कि चलना मुश्किल है।)

सिमरन (निर्णय लेते हुए) बोली - 
मैं उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकती। अगर वे बेहोश होकर कहीं गिर गए, तो कोई और उन्हें मार देगा या पकड़ लेगा।
मुझे उन्हें ढूंढना होगा। चाहे मुझे खुद को खतरा क्यों न हो।

(वह दरवाजा खोलती है। तेज हवा का झोंका उसे गिरा देता है। बारिश की बूंदें तीर की तरह उसके चेहरे पर लगती हैं।)

सिमरन (चीखते हुए, हवा के शोर में) बोली - 
करन जी!! कहाँ हैं आप?!

(कोई जवाब नहीं। सिर्फ गरज और हवा की सीटी।
सिमरन अंधेरे बगीचे की ओर दौड़ती है, जहाँ पेड़ सबसे घने हैं। उसकी नजर हर शाखे, हर कोने पर है।)

(तभी, उसे दूर जंगल की ओर से एक दर्दनाक चीख सुनाई देती है—जो इंसानी नहीं, बल्कि किसी जानवर या राक्षस की लगती है।)

सिमरन (सन्न रह जाती है) - 
ये आवाज़... करन जी की थी?

(वह उस दिशा में दौड़ती है, कीचड़ और कांटों की परवाह किए बिना। उसका प्रेम उसके डर से बड़ा हो चुका है।)

"तूफान ने दो प्रेमियों को अलग कर दिया था।
एक आसमान में शिकार की तलाश में भटक रहा था...
और दूसरी जमीन पर, अपने पति की आत्मा को बचाने के लिए मौत से लड़ रही थी।"