Devil ki Daastaan in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | simran हुई pregnent

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simran हुई pregnent

(रात के सन्नाटे में, जब करन गहरी नींद में सो रहा था, सिमरन की बेचैनी बढ़ने लगी। उसे पेट में एक अजीब सी उलझन और मचलन महसूस हो रही थी, जैसे कोई तूफान उसके अंदर ही चल रहा हो।)

(वह धीरे से बिस्तर से उठी, ताकि करन की नींद न खराब हो। उसके कदम कांप रहे थे। वह बाथरूम की ओर गई और दरवाजा बंद कर लिया।)

(जैसे ही उसने मुंह खोला, उसे जोरदार उल्टियां आने लगीं। उसका शरीर झुक गया, और वह वॉशबेसिन को कसकर पकड़ लेती है। पेट में तेज ऐंठन होती है। यह साधारण बीमारी जैसा नहीं लग रहा था; यह कुछ और ही था—गहरा, प्राचीन और अज्ञात।)

सिमरन (सांस फूलते हुए, खुद से) बोली - 
ये... ये क्या हो रहा है?
मैं तो ठीक थी... बस थोड़ी थकान थी...

(उसने अपना चेहरा धोया। शीशे में अपना प्रतिबिंब देखा। चेहरा पीला पड़ा हुआ था, आँखों के नीचे गहरे घेरे। लेकिन उसकी नजरें भटक रही थीं। उसे हर जगह करन ही दिखाई दे रहा था। शीशे में भी, दीवार पर भी, यहाँ तक कि अपने हाथों की रेखाओं में भी उसे करन का चेहरा नजर आ रहा था।)

(वह वापस बिस्तर पर आई, लेकिन फिर से उसे उल्टी का दौरा पड़ा। रात भर ऐसा ही चलता रहा। तीन बार। हर बार वह कमजोर होती गई, लेकिन हर बार उसके मन में बस एक ही ख्याल आता—*करन*।)

(सुबह होने वाली थी। आसमान में हल्की सुनहरी रोशनी फैलने लगी थी। सिमरन बिस्तर के किनारे बैठी थी, थकी हुई, लेकिन जागृत। करन अभी भी सो रहा था, लेकिन अब उसकी सांसें शांत थीं।)

(सिमरन ने अपना हाथ अपने पेट पर रखा। वहां अब दर्द नहीं, बल्कि एक अजीब सी गर्मी और स्पंदन महसूस हो रहा था। उसे अचानक एक बात याद आई—उनकी शादी के दो साल, और पिछले कुछ दिनों की निकटता।)

सिमरन (धीरे से, हैरानी और डर के मिश्रण से) बोली - 
क्या...?
क्या यह संभव है?
एक वैंपायर और एक इंसान...?

(उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। अगर ऐसा है, तो बच्चा कैसा होगा? क्या वह इंसान होगा? या वैंपायर? या कुछ और?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बच्चे का जन्म करन के श्राप को और बढ़ा देगा? या इसे तोड़ देगा?)

(वह करन की ओर देखती है। वह अब भी सो रहा है, शांत और निश्चिंत। सिमरन नहीं चाहती कि वह अभी जागे। वह इस खबर को अपने तक रखना चाहती है, कम से कम तब तक जब तक वह कुछ पक्का न कर ले।)

(वह धीरे से उठती है और अपने पर्स से एक प्रेग्नेंसी टेस्ट किट निकालती है, जो उसने कभी 'बस ऐसे ही' रखी थी, शायद अवचेतन मन में किसी उम्मीद के साथ।)

(वह बाथरूम में जाती है। हाथ कांप रहे हैं। टेस्ट स्ट्रिप को यूरीन में डालती है और इंतजार करती है।)

(पांच मिनट... दस मिनट...
जब वह वापस आती है, तो टेस्ट किट हाथ में लिए हुए है। उस पर दो गहरी लाल लकीरें चमक रही हैं।)

सिमरन (आँखों में आंसू, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी चमक के साथ) बोली - 
हाँ...
हमारे बीच एक नया जीवन है।

(लेकिन इस खुशी के साथ ही, एक गहरा डर भी उसके दिल में घर कर जाता है। क्योंकि वह जानती है कि करन का श्राप अब सिर्फ उसका नहीं, बल्कि उनके unborn बच्चे का भी खतरा बन सकता है।)

(वह टेस्ट किट को छिपा लेती है और करन के पास वापस आकर बैठ जाती है। वह उसका हाथ पकड़ती है।)

सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली - 
अब हमें लड़ना होगा, करन जी।
सिर्फ आपके लिए नहीं... बल्कि हमारे बच्चे के लिए भी।

"प्यार ने एक चमत्कार किया था।
लेकिन क्या यह चमत्कार उनकी मुक्ति होगी, या उनकी सबसे बड़ी परीक्षा?"

(सुबह की धूप कमरे में फैल रही है, लेकिन करन की आँखें अभी भी लाल हैं। वह बिस्तर पर उठकर बैठता है, उसका सिर अभी भी भारी है, और शरीर में एक अजीब सी खिंचाव महसूस हो रहा है।)

(वह सिमरन को देखता है। सिमरन कुर्सी पर बैठी हुई है, आँखें बंद किए हुए, जैसे वह सोने की कोशिश कर रही हो, लेकिन उसके चेहरे पर थकान और चिंता स्पष्ट है।)

करन (भारी और खुरदरी आवाज़ में, लाल आँखों से उसे घूरते हुए) बोला - 
सिमरन... तुम ठीक हो?

(सिमरन चौंककर आँखें खोलती है। करन की लाल आँखें देखकर उसका दिल एक पल के लिए रुक सा जाता है, लेकिन वह तुरंत संयम बना लेती है। वह जानती है कि यह श्राप का असर है, न कि करन का इरादा।)

सिमरन (झूठी मुस्कान के साथ, अपना डर छिपाते हुए) बोली - 
हाँ, करन जी... मैं ठीक हूँ।
आप कैसे हैं? आपकी तबीयत कैसी लग रही है?

(करन अपने माथे को सहलाता है। उसे याद आता है कि रात को वह जंगल गया था, पंख निकले थे, और फिर... अंधेरा।)

करन (शर्मिंदगी और दर्द के मिश्रण से) बोला - 
मुझे... मुझे कुछ याद नहीं आ रहा।
बस इतना पता है कि मेरे सिर में बहुत दर्द था।
और... क्या मैंने तुम्हें चोट पहुँचाई?

(सिमरन तुरंत इनकार करती है। वह नहीं चाहती कि करन और अधिक अपराधबोध महसूस करे, खासकर अब जबकि वह गर्भवती है।)

सिमरन (नरम स्वर में) बोली - 
नहीं, करन जी। आपने कुछ नहीं किया।
बस... आप बेहोश हो गए थे। मैंने आपको घर लाया और सुला दिया।
आपको बस आराम की जरूरत थी।

(करन गहरी सांस लेता है। उसकी लाल आँखें धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं, लेकिन पूरी तरह से नीली नहीं होतीं। एक हल्की लालिमा अभी भी बनी हुई है।)

करन (उदास स्वर में) बोला - 
यह श्राप... यह मुझे पागल बना रहा है, सिमरन।
मैं नहीं चाहता कि तुम इस डर के साये में जियो।
शायद... शायद मुझे तुमसे दूर रहना चाहिए।

(सिमरन का चेहरा सख्त हो जाता है। यह वही बात है जिससे वह सबसे ज्यादा डरती थी।)

सिमरन (दृढ़ता से, करन के पास जाकर उसके हाथ पकड़ते हुए) बोली - 
नहीं! ऐसा मत कहिए, करन जी।
आप मुझसे दूर नहीं जाएंगे।
हम इसका हल ढूंढेंगे। एक साथ।

(करन सिमरन की आँखों में देखता है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है—शायद गर्व, शायद चिंता। वह सिमरन के हाथ को चूमता है।)

करन (धीमे स्वर में) बोला - 
तुम बहुत जिद्दी हो, सिमरन।
लेकिन... अगर तुम कहती हो, तो मैं कोशिश करूंगा।
पर वादा करो, अगर कभी लगे कि मैं तुम्हारे लिए खतरा बन रहा हूँ, तो तुम भाग जाओगी।

सिमरन (मुस्कुराते हुए, लेकिन आँखों में आंसू लिए) बोली - 
वादा करती हूँ... कि मैं कभी नहीं भागूंगी।
क्योंकि मैं जानती हूँ कि आपका इंसानी हिस्सा हमेशा आपके राक्षसी हिस्से से ज्यादा ताकतवर है।

(अचानक, सिमरन को फिर से पेट में हल्की सी उलझन महसूस होती है। वह चेहरा मोड़ लेती है ताकि करन न देख सके।)

करन (शक की नजर से) बोला - 
सिमरन? सब ठीक तो है? तुम्हारा चेहरा क्यों पीला पड़ गया?

सिमरन (जल्दी से) बोली - 
बस... रात भर जागने की वजह से थकान है।
चलिए, नाश्ता करते हैं। मैं आपके लिए चाय बनाती हूँ।

(वह जल्दी से कमरे से बाहर निकल जाती है। करन उसे जाते हुए देखता है। उसकी लाल आँखें अब धीरे-धीरे नीली हो रही हैं, लेकिन उसके मन में एक संदेह कौंध जाता है।)

करन (मन ही मन) सोचता है - 
*वह कुछ छिपा रही है।*
*क्या यह श्राप का असर है? या...*

(वह उठता है और खिड़की के पास जाता है। बाहर सूरज निकल चुका है, लेकिन उसके लिए रोशनी अब भी तेज और चुभने वाली लगती है।)

"सिमरन ने राज छिपा लिया था।
लेकिन करन का शक जाग चुका था।
और एक वैंपायर का शक... कभी गलत नहीं होता।"