द लॉस्ट एस्ट्रोनॉट: स्टेप इन द सन पार्ट 2

द लॉस्ट एस्ट्रोनॉट

ज़रूरी सूचना-

यह कहानी केवल कल्पना पर आधारित हैं किसी भी वास्तविकता से इसका मेल केवल संयोग मात्र है, केवल मनोरंजन की दृष्टि से ही अध्ययन करें।

भाग 2

अब दिन ढलने लगा है जैकोल जल्दीसे घर की ओर जाओ वरना तुम्हारे मम्मी और पापा तुम्हे ढूंढेंगे, और हाँ कल कॉलेज खत्म होने के बाद मेरे घर आजाना हम कल से ही काम शुरू करेंगे। जी प्रोफेसर जैकोल ने कहा। आज जैकोल रातको सो नही पा रहा है बार बार उसे ये ख्याल आता के ऐसा सूट सचमे बनाया जा सकता हैं? और अगर हाँ तो कैसे? जैकोल को पता भी नही चला की कब रातके 2 बज गए वह बेचैन से इधर उधर घूमे जा रहा था काफी समय इसी तरह चक्कर काटने के बाद उसने सोचा कोई किताब पढ़ते हैं और नीचे कमरे में जाकर एक किताब निकाल कर ले आया। काफी समय तक किताब पढ़ने के बाद उसे नींद आने लगा और वो सो गया। अगले दिन 8 बज चुके थे लेकिन जैकोल उठा नही था काफी आवाज़ लगाने के बाद भी न उठने पर जैकोल की मम्मी कमरे में आगयीं और उसे उठाने लगीं वह उठा और किसी सामान्य क्षात्र की तरह घड़ी को देखकर तेज़ी से नहाने चला गया उसे सच में काफी देरी हो गयी थी लेकिन जैसे तैसे वह कॉलेज पहुंच गया। 2 बजे कॉलेज खत्म हो जाने पर वो सीधे प्रोफेसर स्टीव के घर की ओर चलने लगा उसे बार बार यही बात सता रही थी कि क्या सचमें ऐसा अविष्कार संभव हैं? वहीं उसे दूसरी तरफ यह भी ख्याल आता हैं कि हर अविष्कार शुरुआत में मुश्किल या असम्भव होता हैं लेकिन उसे सम्भव बनाना पड़ता हैं और इसी तरह अपने सोच में मग्न वह चला जा रहा था कुछ ही देर बाद वह प्रोफेसर स्टीव के घर के बाहर खड़ा था। वह अंदर की ओर गया और दीवाल में लगी एक घण्टी के बटन को दबाया और फिर अंदर से एक आवाज़ आयी “रुको आती हूँ” वो आवाज़ प्रोफेसर की पत्नी ग्रेसी की थी उन्होंने गेट खोला तो सामने जैकोल खड़ा था। “अरे जैकोल अंदर आओ” और जैकोल अंदर आ गया प्रोफेसर कहाँ हैं? “जैकोल ने पूछा” “वो अपने लैब में हैं” प्रोफेसर की पत्नी ग्रेसी ने कहा, ठीक हैं मैं लैब की ओर जाता हूँ। कुछ ही समय मे जैकोल लैब में पहुँच चुका था, वहां पहुंचने पर उसने लैब के गेट को खटखटाया और आवाज़ लगाई, अंदर से आवाज़ आयी “कौन हैं” प्रोफेसर स्टीव ने पूछा“ मैं हूँ प्रोफ़ेसर” जैकोल ने कहा, “अंदर आओ” प्रोफेसर स्टीव ने कहा प्रोफेसर स्टीव अपने लैब में व्यस्त थे, हेलो प्रोफेसर!! जैकोल ने मुस्कुराते हुए कहा, स्टीव ने उसके तरफ मुड कर देखा और कहा आओ जैकोल! जैकोल अंदर आने लग गया और आकर एक चेयर पर बैठ गया। “चलो में तुम्हे कुछ प्रारंभिक चीजें समझाता हूँ” और प्रोफेसर स्टीव ने सामने रखे ब्लैकबोर्ड में ड्राइंग कर के जैकोल को दुनिया की 10 सबसे सहनशील पदार्थों के बारे में बताया और इसी तरह से रोज़ प्रोफेसर स्टीव और जैकोल घण्टो लैब में गुज़ारते थे। प्रोफेसर स्टीव जैकोल की बौद्धिक शक्ति देख काफी आश्चर्यचकित हुए उन्हें काफी अजीब लगा जब जैकोल ने स्टीव के 30 वर्षों जितना ज्ञान केवल 5 महीनों में इकट्ठा किया था स्टीव यह समझ चुके थे की अब उनका सपना ज्यादा दूर नही है और जल्द ही सन सूट उनके हाथों में होगा। समय बीतता गया जैकोल कॉलेज के तीसरे साल में आगया था। जैकोल की आदत थी की वह हर हफ्ते लाइब्रेरी से किताबें लाकर पढ़ता था। ऐसे ही उसने एक चीनी वैज्ञानिक की किताब पढ़ने के लिए अपने घर ले आया रातको खाना खाने के बाद वह उस किताब को पढ़ने बैठ गया लगभग 1 घण्टा उस किताब को पढ़ने के बाद जैकोल के पसीने छूट गए उसका दिल ज़ोरो से धड़कने लगा उसके चेहरे पे अजीब सी खुशी भी छलक रही थी उसने सामने दीवाल में टँगी घड़ी की ओर नज़ारे घुमाई उस समय 10 बजकर 43 मिनट हुआ था उस किताब में कैस्टीन नामके धातु का बारे में पढ़ा(वास्तव में ऐसी कोई धातु नही हैं!)यह वो धातु थी जो लगभग 30 मिनट तक किसी भी तरह का ताप झेल सकता था ठीक उसी तरह जैसे स्टीव के पिता जेम्स ने सूट बनाया था और वह भी आधे घण्टे तके ताप सहन करने के लिए बना था उसने वह किताब थैली में ली और अपनी साईकल से प्रोफेसर स्टीव के घर आ गया डोर बेल बजाने पर स्टीव की पत्नी ग्रेसी बाहर आगयीं प्रोफेसर कहा हैं?जैकोल ने हाफते हुए कहा “नीचे लेब मे हैं आओ अंदर आओ” ग्रेसी ने कहा जैकोल अंदर आया और लैब में घुस गया जैकोल को अचानक देख स्टीव को चिंता हुई क्या हुआ जैकोल? प्रोफेसर स्टीव ने पूछा चलो तुम पानी पीओ और पास रखे जग मे से जैकोल को पानी दिया पानी पीने के बाद जैकोल ने स्टीव को सारी बातें बतायीं। स्टीव को अपनी आंखों में यकीन नही हो रहा था अगले दीन वे दोनों कैस्टीन पदार्थ के बारे में जानने के लिए पास के एक वैज्ञानिक विलियम के पास गए वैज्ञानिक ने कहा की कैस्टीन काफी दुर्लभ व बहुत कम पायी जाने वाली पदार्थ है लेकिन इसे बनाया जा सकता हैं लेकिन इसको बनाने की प्रोसेस काफी खतरनाक हैं क्योंकि कैस्टीन को अगर सही ढंग से न बिठाया गया हो तो इसमे विस्फोट हो सकता हैं और यदि इसका टुकड़ा आंखों में गया तो समझ लिजीये की भगवान भी आपकी इन आंखों को वापस नही ला सकते, कुछ भी हो सर हम कैस्टीन बनाना चाहते हैं प्लीज हमारी मदद करिये क्योंकि किसी भी बुक में कैस्टीन का स्पष्ट उल्लेख नही हैं और हमने जिस चाइनीज़ वैज्ञानिक की किताब से इसके बारे में पढ़ा हैं वो इस दुनिया में नही रहे, प्लीज़ सर, हाँ स्टीव मैं सिखा सकता हूँ लेकिन हमें काफी सावधानी बरतनी होगी और हैं इस पदार्थ को टेस्ट करने के लिए तुम्हे सरकार की परमिशन लेनी होगी हालांकि मेरे लैब को परमिशन मिल चुकी हैं इस लिए मैं तुम्हे मेरे लैब में इसके बारे में बता सकता हूँ। अगले तीन दिन तक रोज़ तुम्हें मेरे लैब में आना होगा मेरा लैब 09.00 बजे खुल जाता हैं तो 09.00 बजे के बाद आ जाना, ठीक है सर, स्टीव ने कहा। अगले तीन दिन प्रोफेसर स्टीव लैब में जाकर कैस्टीन बनाने की विधि को सीखते रहे और काफी आसानी से स्टीव ने वो विधि सिख ली। रही बात परमिशन की तो बिना साइंटिस्ट के डिग्री के परमिशन मिल पाना नामुमकिन था तो उन्होंने सरकार को बिना बताये कैस्टीन की टेस्टिंग करने का निश्चय किया। सबसे पहले उन्होंने कैस्टीन को एक फुटबॉल के आकर का बनाया और उसके अंदर पानी भर दिया और उसे आधे घण्टा के लिए ज्वालामुखी के ऊपर लटका दिया आधे घंटे के बाद जब कैस्टीन के फुटबॉल के आकार वाली गेंद को ऊपर खींचा गया और उसे खोलकर उसके पानी को छूकर देखा, पानी उतना ही ठंडा था जितना डालते समय हुआ था और ना ही पानी का 1 बून्द जलवाष्प बनके उड़ा था इसका मतलब ज्वालामुखी की ताप पानी पर पड़ी ही नही थी। इस सफल टेस्ट के बाद जैकोल और प्रोफेसर स्टीव काफी खुश थे। प्रोफेसर स्टीव और जैकोल को जैक एंड सन्स स्पेस सेंटर में बुलाया गया स्पेस सेंटर के सी.ई.ओ. मिस्टर जे.विल्सन ने उनसे खुद बात करने का निर्णय किया, जैसे ही जैकोल और प्रोफेसर स्पेस सेंटर में पहुंचे उन्हें खास अतिथि की तरह केबिन में बिठाया गया उस समय तक मिस्टर विल्सन अपने केबिन में नही पहुंचे थे लेकिन कुछ ही क्षणो के पश्चात किसी के जूतों की टक-टक की आवाज़ आयी और केबिन का दरवाज़ा खुला वो मिस्टर विल्सन ही थे उन्होंने जैकोल और प्रोफेसर से बैठने का अनुरोध किया प्रोफेसर और जैकोल बैठ गए, कहिये, सर आपने हमें क्यों बुलाया?"जैकोल ने पूछा" में चाहता हूँ की आप हमें कैस्टीन को बनाने का फार्मूला बताएं विल्सन ने कहा, सर हमने आपको बताने के लिए ही कैस्टीन का आविष्कार किया हैं, और निश्चय ही इसका फार्मूला हम आपको अवश्य बताएंगे लेकिन!! विल्सन समझ गए की अब प्रोफेसर कोई डिमांड रखने वाले हैं, बोलिये प्रोफेसर रुक क्यों गए? विल्सन ने कहा, सर आप काफी अनुभवी हैं और मैं समझ गया हूँ की आपने यह सोच होगा की कैस्टीन के फॉर्मूले के बदले हम आपसे धन-दौलत मांगेंगे, लेकिन मुझे और जैकोल दोनों को पैसों में कोई दिलचस्पी नही हैं। विल्सन हैरान होकर प्रोफेसर की तरफ देख रहे, तो आप क्या चाहते हैं?विल्सन ने आश्चर्य से पूछा, सर मैं चाहता हूँ की सूर्य पर सबसे पहला कदम जैकोल रखे,

ओह!! तो ऐसी बात हैं, लेकिन प्रोफेसर आपको तो पता होगा की हम बिना एस्ट्रोनॉट की डिग्री के इसे वहां जाने नही दे सकते विल्सन ने कहा, नहीं सर!! जैकोल एस्ट्रोनॉट ही बनना चाहता हैं और पिछले लंबे समय से वह इसके लिए तैयारी भी कर रहा हैं और कॉलेज खत्म होने के बाद इसके पास एस्ट्रोनॉट की डिग्री भी होगी, अच्छा....विल्सन ने कहा ठीक हैं वैसे भी हमें सूर्य में जाने के लिए काफी तैयारियां करनी हैं और कम से कम एक से डेढ़ साल तो सिर्फ सूर्य पहुंचने में लगेगा और उससे पहले कैस्टीन का इस्तेमाल करके हमें के सारी चीजें जैसे सूट, स्पेस शिप और भी काफी चीजें बनानी होंगी खैर, आप चिंता न करें सूर्य पे सबसे पहला कदम जैकोल ही रखेगा। प्रोफेसर स्टीव काफी खुश हुए और इसी के साथ उन्होंने मिस्टर विल्सन को कैस्टीन को बनाने का फार्मूला बता दिया।

(शेष अगले भाग में)

लेखक

राघव शर्मा

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