कहाँ गईं तुम नैना - 2

           
            कहाँ गईं तुम नैना (2)


एमबीए करते समय ही आदित्य ने तय कर लिया था कि वह नौकरी ना करके अपना बिज़नेस करेगा। इसलिए उसने कॉलेज में रहते हुए ही कई तरह के बिज़नेस आइडिया को स्टडी करना शुरू कर दिया था। कॉलेज में उसकी दोस्ती शीरीन भरूचा से हुई। उसकी तरह शीरीन भी औरों से हट कर कुछ करना चाहती थी।
कॉलेज से निकल कर आदित्य ने शीरीन के साथ ताजमहल की नगरी आगरा में एक ट्रैवलिंग एजेंसी शुरू की। दो सालों के भीतर ही उनका बिज़नेस चमक उठा। एक स्थानीय संस्था द्वारा आदित्य को उभरते हुए व्यवसायी के तौर पर सम्मानित किया गया।
आदित्य को सम्मान मिले दो हफ्ते ही बीते थे कि एक दिन उसके पास एक फोन आया। एक न्यूज़ चैनल दुनिया न्यूज़ की रिपोर्टर ने उससे मिलने का समय मांगा। उसका कहना था कि उसके न्यूज़ चैनल पर वह 'इनसे मिलिए' नाम का एक कार्यक्रम प्रस्तुत करती है। इस कार्यक्रम में वह उन लोगों का साक्षात्कार दिखाती है जिन्होंने अपने काम से समाज को एक नई दिशा दिखाई हो। उसका कहना था कि आदित्य ने इतने कम समय में अपने बिज़नेस में जो सफलता पाई है वह नौजवानों को प्रेरित करेगी कि वो स्वरोजगार अपना कर नए रोजगार के अवसर पैदा करें। उसने आदित्य से मिलने का समय मांगा। आदित्य ने उसे अगले दिन दोपहर को अपने ऑफिस में बुलाया।
अगले दिन आत्मविश्वास से भरी एक लड़की उसके ऑफिस में आई। अपना परिचय देते हुए बोली।
"हैलो... मेरा नाम नैना सेन है। मैं दुनिया न्यूज़ चैनल से हूँ। कल हमारी बात हुई थी।"
"हाँ.... तो मिस सेन आप मेरा इंटरव्यू कब करेंगी।"
"जब आप मुझे कुछ घंटों का समय दे सकें। आपने मेरा प्रोग्राम तो देखा होगा। मैं लोगों का इंटरव्यू बंद स्टूडियो में नहीं करती हूँ। मैं सोंच रही थी कि आपका इंटरव्यू मैं फतेहपुर सीकरी के किले में फिल्माऊँ।"
"मिस सेन जैसा आप चाहें। मैं अगले शनीवार आपको समय दे सकता हूँ।"
"तो ठीक है आदित्य जी मैं जो भी ज़रूरी औपचारिकताएं हैं तब तक उन्हें पूरा करती हूँ।"
नैना आदित्य से पहली बार मिली थी पर उसके जाने के बाद भी वह उसी के बारे में सोंचता रहा। नैना सुंदर थी। उसकी सुंदरता में एक सादगी थी। लेकिन जो चीज़ उसे सबसे अच्छी लगी थी वह था उसके भीतर का विश्वास। उसे ऐसी लड़कियां अच्छी लगती थीं जिनके भीतर आत्मविश्वास हो। नैना हिंदी बोल रही थी पर उसके बोलने में जो बंगाली लहज़ा था वह भी आदित्य को पसंद आया था।
अगले हफ्ते फतेहपुर सीकरी के किले में नैना उसका इंटरव्यू रिकॉर्ड कर रही थी। इंटरव्यू का एक हिस्सा फिल्माने के बाद वह किले में दूसरी जगह अगला हिस्सा शूट करने की तैयारी कर रही थी। तभी वहाँ मौजूद कुछ लड़कों में से एक ने उस पर छींटाकशी की। नैना बिना ध्यान दिए अपने काम में लगी रही। पर इससे उस लड़के की हिम्मत बढ़ गई। उसने फिर एक अभद्र टिप्पणी की। इस बार नैना भी भड़क गई। उसने लड़के को तमाचा लगा दिया। उस लड़के ने गुस्से में नैना का हाथ पकड़ लिया। नैना पूरी ताकत से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी।
आदित्य को यह सब अच्छा नहीं लगा। वह उठा और उस लड़के से नैना का हाथ छुड़ा लिया। उसने उस लड़के को धमकी दी कि चुपचाप वहाँ से चला जाए नहीं तो पुलिस के हवाले कर देगा। यह सुन कर वह लड़का वहाँ से चला गया। आदित्य नैना से बोला।
"मिस सेन आप ठीक तो हैं ना ? अगर आप चाहें तो बाकी इंटरव्यू हम बाद में कर लेंगे।"
"मैं ठीक हूँ आदित्य जी। कामकाजी लड़कियों को अक्सर ऐसे बदतमीज़ मिल जाते हैं। हम निपट भी लेते हैं। हम अपना काम जारी रखेंगे।"
नैना ने इंटरव्यू का दूसरा हिस्सा भी अच्छी तरह से पूरा कर लिया। जब वह इंटरव्यू टीवी पर आया तो बहुत सारे लोगों ने उसे देखा। आदित्य अचानक स्टार बन गया। लोग फोन कर उसे बधाई देने लगे। 
उस दिन जिस तरह से नैना ने उस स्थिति को संभाला था उसे देख कर आदित्य बहुत प्रभावित हुआ था। वह बार बार शीरीन से उसकी तारीफ करता रहता था। शीरीन उसके दिल का हाल समझ रही थी। एक दिन वह कॉफी शॉप में शीरीन के साथ बैठा कॉफी पी रहा था। अपनी आदत के अनुसार वह नैना के बारे में बात करने लगा। शीरीन मुस्कुरा कर बोली।
"आदित्य मुझे लगता है कि तुम्हें नैना से प्यार हो गया है।"
शीरीन की बात सुन कर आदित्य झेंप गया। दरअसल इधर कई दिनों से हर वक्त वह नैना के बारे में ही सोंचता रहता था। उसे भी लगने लगा था कि वह नैना को चाहने लगा है। 
"आदित्य तुम नैना से अपने दिल की बात क्यों नहीं कहते हो ?"
"पहले ये तो जान लूँ कि उसके मन में भी कुछ है या इंटरव्यू के बाद सब खत्म हो गया।"
"और वो पता कैसे चलेगा ? मेरे साथ कॉफी पीकर।"
आदित्य शीरीन का इशारा समझ गया। उसने तय कर लिया कि वह जल्द ही नैना से मिलने की राह ढूंढ़ेगा। 
आदित्य ने नैना से मिलने की राह ढूंढ़ ली। उसने नैना को फोन कर कहा कि उसके इंटरव्यू ने उसे स्टार बना दिया है। वह चाहता है कि उसे डिनर पर ले जाकर उसका शुक्रिया अदा करे। जो हाल आदित्य का था लगभग वैसा ही हाल नैना का भी था। उसने आदित्य का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। 
नैना दिल्ली में थी और आदित्य आगरा में। अतः तय हुआ कि दोनों ही एक दूसरे से मिलने के लिए दूरी तय करेंगे। आगरा और दिल्ली के रास्ते के बीच में एक रेस्टोरेंट था। दोनों ने वहीं मिलने का फैसला किया। 
नैना कुछ पहले पहुँच कर आदित्य की प्रतीक्षा कर रही थी। करीब दस मिनट के बाद वह भी वहाँ पहुँच गया। एक दूसरे का हालचाल पूँछने के बाद दोनों आपस में बातें करने लगे। आदित्य ने नैना का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह सचमुच अपने काम में बहुत माहिर है। नैना ने भी उसकी तारीफ करते हुए कहा कि उसने तो बस अपना काम किया। लोगों को इंटरव्यू पसंद आया क्योंकी उसका व्यक्तित्व ही बहुत प्रभावशाली है। कुछ ही देर में वेटर आकर ऑर्डर ले गया।
खाते हुए दोनों एक दूसरे के परिवार के बारे में बात करने लगे। नैना ने बताया कि उसके पिता सरकारी कर्मचारी थे। जिसके कारण देश के विभिन्न भागों में उनका स्थानांतरण होता रहता था। अतः उसकी परवरिश देश के विभिन्न भागों में हुई। दसवीं कक्षा से ही उसने पत्रकारिता के क्षेत्र में आने का मन बना लिया था। मास कॉम की डिग्री लेने के बाद उसने कुछ दिन लखनऊ के एक न्यूज़ चैनल में काम किया। साल भर पहले ही उसे दुनिया न्यूज़ जैसे बड़े चैनल में काम करने का मौका मिला। उसकी योग्यता पर यकीन कर चैनल ने उसे 'इनसे मिलिए' कार्यक्रम प्रस्तुत करने का मौका दिया। चैनल में काम करते हुए वह बहुत खुश है। 
आदित्य ने भी उसे अपने परिवार के बारे में बताया। उसके पिता दिल्ली के एक कॉलेज में प्रोफेसर थे। उसकी माँ दस साल पहले ही गुजर गई थीं। उसके पिता दिल्ली में अपने फ्लैट में रहते हैं। वह अपने बिज़नेस के कारण आगरा में रहता है। 
उसके बाद दोनों इधर उधर की बातें करने लगे। आदित्य गौर कर रहा था कि नैना उसके साथ खुल कर बात कर रही थी। ऐसा नहीं लग रहा था कि वह औपचारिकता निभाने के लिए उसके साथ डिनर करने आई थी। जो हाल उसका था लगभग वही हाल नैना का भी था। 
चलते समय नैना को उसकी कार तक छोड़ने गया। कार में बैठते हुए नैना बोली।
"तो आप डिनर करा कर मेरा शुक्रिया अदा करने के लिए ही इतनी दूर ड्राइव करके आए थे।"
उसकी बात के भाव को आदित्य समझ गया। उसने भी उसी अंदाज़ में नैना की आँखों में झांक कर कहा।
"आप भी तो सिर्फ डिनर करने इतनी दूर नहीं आईं थीं।"
आदित्य का जवाब सुन कर नैना मुस्कुरा दी। उसके बाद दोनों एक दूसरे को देख कर हंस दिए। दोनों को ही एक दूसरे की भावना का पता चल गया था। लेकिन आदित्य कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था। उसके बाद नैना और वो कई बार मिले। कभी नैना आगरा गई तो कभी आदित्य दिल्ली। कभी दोनों ही उस रेस्टोरेंट में मिले जहाँ पहली बार मिले थे।
कॉलबेल बजने से आदित्य के विचारों का तांता टूट गया। उसने उठ कर दरवाज़ा खोला। सामने एक लड़की खड़ी थी।
"हैलो.... मैं चित्रा माथुर.."
आदित्य ने उसे अंदर आने को कहा। वह नैना को लेकर बहुत परेशान था। उसने बिना समय गंवाए सीधे पूँछ लिया।
"चित्रा तुमने मिसेज़ चटर्जी को मेरा नंबर दिया। तुम्हारे पास मेरा नंबर कैसे आया ? तुमने खुद मुझे फोन कर नैना के बारे में क्यों नहीं बताया ? क्या तुम्हें पता है कि वह छुट्टी लेकर कहाँ गई थी ?"
आदित्य के इस उतावलेपन से चित्रा को यह एहसास हो गया कि वह नैना को लेकर बहुत चिंतित है। वह भी नैना के गुम हो जाने से परेशान थी।
"आदित्य मुझे भी तुम्हें कुछ बताना है। मैं जो बता रही हूँ उसे सुनो। तुम्हारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे।"
चित्रा ने अपनी बात कहना शुरू किया.....
             

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