Mere shabd meri pahchan - 7 in Hindi Poems by Shruti Sharma books and stories PDF | मेरे शब्द मेरी पहचान - 7

मेरे शब्द मेरी पहचान - 7


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---- बस यही मेेेरा अरमान है ----

जिस मुल्क का करता हर कोई सम्मान हो ,
होकर उस देश की वासी जिसे खुद पर अभिमान हो ,
जो मेरा देश इस पूरी दुनिया की शान हो ,
जो देश सिर्फ मेरी ही नही हम सब की जान हमारी पहचान हो ,
वो और कोई नहीं सिर्फ मेरा हिन्दुस्तान है ,
रहे आबाद मेरा देश बस यही मेरा अरमान है ।

जहाँ स्वर्ग समान धरती और ऊपर नीला आसमान हो ,
जिसकी ज़मीन पर ही जन्नत का विश्राम हो ,
जहाँ साक्षात ईश्वार का धाम हो ,
जो देश हम सब की आन बान और शान हो ,
कभी कोई गम ना हो मेरे इस वतन को ,
एसे महान देश का वासी होना बात खास है ना कोई आम है ,
रहे आबाद मेरा हिन्दुस्तान बस यही मेरा अरमान है ।

मेरे इस देश के जवानों द्वारा उन आताताई आतंकियों का भी कल्याण हो ,
दुनिया भर में सिर्फ शान्ती और आराम हो ना की कोई आतंकी कामरान हो ,
यही इच्छा है की हर बार हिन्दुस्तान ही मेरी मातृ भूमि , मेरी जन्म भूमी , मेरी कर्म भूमी का नाम हो ,
सारे जगत , सारे ब्रह्माण्ड में हिन्दुस्तान का गुण गान हो ,
यही मेरा सृष्टि के पालन हार को फरमान है ,
रहे आबाद मेरा हिन्दुस्तान बस यही मेरा अरमान है । ।
बस यही मेरा अरमान है । ।

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---- उसी ने यहां तक पहुंचाया है ----

की खुद पर भरोसे ने ही मुझे अकेले चलना सिखाया है ,
जिसे नहीं है खुद पे भरोसा वो एक कदम भी बढ़ा न पाया है ,
कुछ पाने की चाहत ने ही मुझे यहाँ तक पहुंचाया है ,
मुझ में इस कला का दान ऊपर वाले ने ही सुझाया है ,
जिस ने दिये हैं प्राण अब उसी ने ही मुझे अपने हाथ को थमाया है ,
जो सिर्फ एक बार नहीं हर बार किसी ना किसी रूप में मेरा प्रेरणास्रोत बनकर आया है ,
उसने ही मेरे इन लफ्जों को ढाल एक कविता में सजाया है ,
अभी मंजिल तक पहुँची नहीं मगर जिस दिन पहुंचुंगी ,
उस दिन भी यही मेरे बोल होंगे ,
की
मेरा लिखना एक संयोग , मेरी चाहत , मेरी कला , मेरे विचार ,मेरी भावनाएं अथवा कम उसी की माया है ,
आज तक जो कुछ भी पाया है सिर्फ उसी की ही बदऔलत कमाया है ,
वो सिर्फ मेरी ही नहीं हम सब के जीवन का साया है ,
अब और क्या कहूँ मैं ,
मुझे इस मंजिल , इस मुकाम तक भी उसी ने पहुँचाया है । ।
उसी ने ही पहुँचाया है । । ।

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✍🏻 ✍🏻- - - श्रुति शर्मा

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