Mere shabd meri pahchan - 10 in Hindi Poems by Shruti Sharma books and stories PDF | मेरे शब्द मेरी पहचान - 10

मेरे शब्द मेरी पहचान - 10


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आज की कविताएँ :--)
1.) मजहब - ए - दीदार
2.) कवि होना कोई आम नहीं


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---- मजहब - ए - दीदार ----

* की ♥️ दिल दहल उठता है खुदा के बन्दों को मज़हब पर लडता देख ,
अब क्या हो गए जो पहले क्या थे विधाता के लेख ,
अपने देश में रहकर दूसरे मुल्क का गुणगान करना ये हमें हजम नहीं ,
ए गद्दारों ये पाप किसी देशद्रोही से कम नहीं ।

* जिस मुल्क के तुम वासी हो वो देश तुम्हारी शान है ,
अगर न कर सको सम्मान, अपने पेट पर लात मारे तुममे एसा हैवान है ,
ए मेरे खुदा के बन्दों मजहब तो बस एक नाम है जिसमे कोई जान नहीं ,
और दिखा दो इन फिरंगियों को जिसे लडाया करते थे मजहब पर अब ये वो मेरा हिन्दुस्तान नहीं ।

* मजहब तो बस एक ज़रिया है खुदा को पुकारने का ,
इंसानियत 🤝 ही है धर्म खुदा को धरती पर उतारने का ,
अब बतला दो इस दुनिया को वो है मजहब जिसकी ना कोई बुनियाद, ना ही कोई आधार है ,
हम सब सिर्फ हिन्दुस्तानी हैं
और हम हिन्दुस्तानियों के लिए हमारा वतन 🇮🇳 ही मजहब - ए - दीदार है । ।
मजहब - ए - दीदार है ! !
ॐ ☪︎ 卐 ✝︎ = 🇮🇳 🇮🇳

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---- कवि होना कोई आम नहीं ----

* कविता तो होती है कम शब्दों में ज्यादा बताने के लिए ,
भावों की आवश्यकता होती है कविता समझने और समझाने के लिए ,
यूँ तो हम किसी भी विषय पर लिख सकते हैं ,
मगर दिल बेकरार रहता है वतन का दीदार फरमाने के लिए ।
हिम्मत भी चाहिए होती है जनाब अपने दिल का हाल सुनाने के लिए ,
की कला भी आनी चाहिए शब्दों को पिरोकर कविता में सजाने के लिए ,
बोलने को तो लोग बोल देते हैं
की लिखना कौन सी बड़ी बात है , लिख तो हम भी सकते हैं ,
पर जनाब लिखा कर एक दिल से दिल तक तार जोड़नी पड़ती है कविता को लोगों के ज़हन में उतारने के लिए । ।

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✍🏻 ✍🏻 - - श्रुति शर्मा