Kartvya - 4 in Hindi Moral Stories by Asha Saraswat books and stories PDF | कर्तव्य - 4

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कर्तव्य - 4

कर्तव्य (4)




वहाँ पर खेलने में बहुत आनंद आ रहा था, सभी रिश्ते के भाई-बहिनों के साथ हम खेल रहे थे । हमें खेलते हुए देख कर भाभीजी के रिश्तेदारों के बच्चे भी वही हमारे साथ खेलने लगे ।

हमें भाभीजी को सजे हुए देखने का मन था, इसलिए हम अन्य बच्चों के साथ अंदर चले गए; पूर्व भैया वहीं खेलते रहे ।

जब हम अंदर गये तो भाभीजी तैयार हो रही थी उनके पास जाने की अनुमति नहीं मिली । हमारी नई सहेलियों ने वही कमरे में बैठा दिया और बातें करने लगीं। वहाँ कुछ महिलायें भी थीं । उन्होंने हमसे बड़े प्यार से हमारे सभी घर के सदस्यों के नाम पूछे । हमने तो नहीं बताये लेकिन हमारे चाचा जी की बेटी ने घर के सभी लोगों के नाम बता दिए ।

हमें कुछ समझ नहीं आया कि नाम क्यों पूछ कर लिखे जा रहे थे ।

थोड़ी देर में ही बारात चढ़ने की तैयारी होने लगी । हम लोग बारात में शामिल होकर आनंद का अनुभव कर रहे थे । बारात में बड़े भैया घोड़ी पर सज-धज कर बैठ कर चल रहे थे । हमारा मन था कि हम बैठे, लेकिन हमें न बैठाकर पूर्व भैया को बैठाकर बड़े भैया ने पकड़ लिया।
वह बैठ कर, हमें चिड़ा रहे थे, मैं राजा , मैं राजा, मै राजा। तुम नीचे मैं ऊपर ।

बारात दरवाज़े पर पहुँची, सभी बारातियों को माला पहनाकर स्वागत किया । हमें भी माला मिल गई, हम बहुत खुश हुए । अब हमने भैया को चिडाना शुरू किया । हम राजा, हम राजा, हम राजा । भैया ग़ुस्से में थे लेकिन घोड़े पर बैठे थे इसलिए हमें कोहनी नहीं मार सकते थे। पूर्व भैया ग़ुस्से से देख रहे थे तभी फ़ोटोग्राफ़ी में उनकी ग़ुस्से वाली छवि आ गई ।

पूर्व भैया को उतार कर बड़े भैया पूजा के लिए बैठ गए । हम सभी बच्चों का झुंड दावत के स्थान पर स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे । भैया हमें खोज रहे थे ।

जिस स्थान पर बारात गई थी, वह ब्रजभाषा का क्षेत्र था । सभी अधिकतर पुरुष-महिलाएँ ब्रजभाषा में ही वार्तालाप कर रहे थे ।

दरवाज़े पर बड़े भैया पूजा में बैठ गये । वहाँ बहुत सी महिलाएँ पहले से ही बैठी थी कुछ दरवाज़े पर ही खड़ी थी । उन महिलाओं ने नाम ले-लेकर सभी को गालियाँ देनी शुरू की तो सभी अचंभित थे कि उन सब को नाम की कैसे जानकारी हुई ।

सब एक दूसरे से यही बात कह रहे थे कि नाम किसने बतायें है । पूर्व भैया ने फूफाजी को बताया कि गुड़िया अंदर गई थी, उसी ने बताया होगा । फूफाजी हमें ढूँढते हुए हमारे पास आ गये । हम सब उनसे बहुत डरते थे, जब उन्होंने हमें डॉंट लगाई तो हमारी प्लेट हाथ से छूट कर गिर गई । पूर्व भैया दूर खड़े मुस्कराकर देख रहे थे । हमें बहुत ग़ुस्सा आया लेकिन हम कुछ भी बोल नहीं पाये, अपनी सफ़ाई भी नहीं दे पाए, हमारी कोई गलती नहीं है ।

जब सब शांत हो गये तो हम डरते- डरते वहाँ गये जहॉं पर हमारी नई दुल्हन भाभीजी बैठी थी । वह सज कर बैठी थी बहुत प्यारी लग रही थी, उन्होंने हमें अपने पास बैठने के लिए स्थान दिया ।

सारी रात के कार्य क्रम थे लेकिन हमें थकान हो रही थी हम वही भाभीजी के पास ही सो गए । वहाँ से कब बिस्तर पर पहुँचे, पता ही नहीं चला । जब ऑंखें खुली तो सभी सुबह का जलपान करके वापस जाने की तैयारी कर रहे थे ।

भाभीजी की विदाई की तैयारी थी,उनके परिवार के सभी सदस्य रो रहे थे; जब हमने भाभीजी को रोते देखा तो हमें भी रोना आने लगा।

भाभीजी जब हमारे साथ बैठ गई तो हमें बहुत ख़ुशी हुई, जब हम अपने घर पहुँचे तो भाभीजी का स्वागत किया । हमारे घर में भी पूजा की तैयारी थी , बड़े भैया-भाभीजी ने एक साथ पूजा की ।

क्रमशः ✍️

आशा सारस्वत