Banzaran - 12 books and stories free download online pdf in Hindi

बंजारन - 12

चांदनी शालिनी की ओर इशारा करते हुए प्रीत से कहती है–" दीदी, ये मेरी दोस्त शालिनी है।"

चांदनी की बात सुन प्रीत मुस्कुराते हुए शालिनी से कहती है–" तुमसे मिलकर अच्छा लगा।"

शालिनी भी मुस्कुराते हुए जवाब देती है–" मुझे भी आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।"

ठाकर साहब प्रीत के पास आते है और उससे कहते है–" क्या तुम दोनो पहले से एक दूसरे को जानती हो?"

इस पर चांदनी जवाब देती है–" हा चाचा जी, इनका नाम प्रीत है, ये मेरी बुआ जी की लड़की है।"

चांदनी की बात सुन ठाकुर साहब के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो खुश होते हुए कहते है–" ये तो बड़ी अच्छी बात है।"

इतना कहकर वो प्रीत से कहते है–" चांदनी को हम अपनी बेटी की तरह मानते है। तुम चांदनी की बड़ी बहन हो, यानी तुम भी मेरी बेटी जैसी ही हुई। वैसे तुम अमरपुरा में कहा रुकी हुई हो?, तुम चाहो तो चांदनी के साथ हमारी हवेली में रह सकती हो।"

अपने पापा की बात सुन शालिनी भी प्रीत से कहती है–" हा दीदी, आप हमारे साथ ही रुक जाइए।"

उन लोगो की बात सुन प्रीत थोड़ी देर सोचती है और फिर मुस्कुराते हुए कहती है–" ठीक है..."

इतना कहकर प्रीत ठाकुर साहब से आगे कहती है–" चांदनी आपको चाचा जी बोलती है, इसीलिए मैं भी आपको चाचा जी कहकर ही बुलाऊंगी।"

प्रीत की बात सुन ठाकुर साहब के चहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ जाती है और वो प्रीत से कहते है–" काफी अच्छे संस्कार दिए है तुम्हारे घरवालों ने, बरना आजकल की युवा पीढ़ी पड़ लिखकर बड़ो का आदर करना ही भूल जाते है। तुमने ना सिर्फ अपना नाम कमाया है बल्कि अपने नाम के साथ साथ अपने परिवार का नाम भी रोशन किया है। मुझे गर्व है तुम पर और तुम्हारे परिवार पर।"

ठाकुर साहब की बात सुन प्रीत मुस्कुराते हुए उनसे कहती है–" जी शुक्रिया।"

इधर ठाकर साहब की बात सुन रितिक अपने दोस्तो से कहता है–" ये ठाकुर साहब एक ही डायलॉग हर किसी पर क्यूं चिपका देते है? मुझसे भी ऐसा ही कुछ बोला था।"

अमर जवाब देते हुए कहता है–" अरे देख नही रहा, वो प्रीत मैडम को पटा रहे है।"

रोमियो चिड़ते हुए अमर से कहता है–" ये क्या बकवास कर रहा ही, उमर देखी है ठाकुर साहब की, इस उम्र में वो लड़की पटाकर क्या करेंगे?, चलो मान लो अगर पट भी गई फिर, फिर आगे क्या? बाबा जी का ठुल्लू।"

करन रोमियो को समझाते हुए कहता है–" ये वो वाला पटाना नही है। वो इतने सीधे इसीलिए बन रहे है ताकि हमने जो कांड किया है वो आराम से सुलझ जाए।"

" ओह.." रोमियो को बात समझ आ जाती है और वो चुप हो जाता है।

इधर प्रीत का चहरा गंभीर हो जाता है और वो ठाकर साहब से पूछती है–" हा तो अब बताइए चाचा जी, आपके गांव की किस लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई है?"

प्रीत की सवाल सुन ठाकर साहब शालिनी की ओर देखने लगते है और फिर गहरी सांस लेते हुए कहते है–" प्रीत बेटा, वो दरअसल जिस लड़की की मैं बात कर रहा था, वो हमारी बेटी है।"

प्रीत हैरानी के साथ कहती है–" मतलब वो लड़की शालिनी है।"

इतना कहकर प्रीत शालिनी की ओर देखने कहती है और इधर शालिनी भी हा में अपना सिर हिला देती है।

उसके बाद शालिनी पूरा किस्सा प्रीत को सुना देती है कि कैसे उस रात मनोज उसे जबरदस्ती अपने साथ ले गया था और कैसे रितिक ने उसकी जान बचाई ?

शालिनी की बात सुनकर प्रीत काफी ज्यादा हैरान थी और गुस्सा भी। प्रीत गुस्से के साथ कहती है–" आज कल के मर्दों को हो क्या गया है?, कोई अबला लड़की दिखी नही कि आ जाते है मौके का फायदा उठाने।"

जब शालिनी प्रीत को वो सब बता रही थी तो इधर रितिक की जान तो उसके हलक में ही आ गई थी। उसे डर का था कि सारा किस्सा सुनने के बाद प्रीत उसी पर शक करेगी और हुआ भी वही।

प्रीत शालिनी से कहती है–" हम्म तो तुम्हे बचाने के चलते रितिक ने उस मनोज को जान से ही मार डाला।"

ये सुनकर तो रितिक का कलेजा ही बाहर आ गया और साथ ही अमर करन और रोमियो की जान भी उनके हलक में आ गई थी। तभी चांदनी घबराते हुए आगे आती है और प्रीत से कहती है–" नही प्रीत दीदी, रितिक ने उस लड़के को नही मारा है। वो तो हमारे साथ ही वापस आ गए थे।"

शालिनी भी चांदनी का साथ देते हुए कहते है–" हा प्रीत दीदी, चांदनी सही कह रही है, रितिक तो हमारे साथ ही वापस आ गया था।"

चांदनी को अपनी ओर से बोलता देख रितिक की जान में जान आती है और साथ ही उसके चहरे पर एक प्यारी सी स्माइल आ जाती है।

दोनो लड़कियों की बात सुन प्रीत कुछ देर सोचती है और फिर कहती है–" वैसे है कहा ये महानुभाव? जिसने तुम्हारी जान बचाई है।"

प्रीत का सवाल सुन दोनो लड़किया उन चारो की ओर देखने लगती है। तभी रितिक अपना सर खुज़ाते हुए आगे आता है और प्रीत से कहता है–" हाय.."

रितिक की हरकत देख प्रीत उसे घुरकर देखती है और फिर कहती है–" तुम मुझे दीदी कहकर बुला सकते हो।"

प्रीत की बात सुनकर रितिक बुरा सा मुंह बना लेता है और पलटकर कुछ नही कहता है। प्रीत ने नोटिस किया था कि जब उसने रितिक को दोषी ठहराया तो कैसे चांदनी घबरा गई थी और प्रीत समझ गई कि कुछ तो बात है जो वो नही जानती है, इसीलिए उसने रितिक से उसे दीदी बोलने को कहा था और जैसा कि प्रीत के सोचा था हुआ भी वही, रितिक दीदी बोलने में हिचकिचा रहा था।

रितिक की हालत देख प्रीत मन ही मन हस्ती है और फिर रितिक से कहती है–" तुम जंगल से वापस आने के बाद कहा गए थे?"

रितिक जवाब देते हुए कहता है–" मैं सीधे घर चला गया था।"

" अच्छा, तो फिर ये चीज कब्र के पास कहा से आई? जरा गौर से देखो इसे, हो सकता है तुम इसे पहचानते हो।"

प्रीत के हाथ में एक बटन था जो माखनलाल को कब्र के अंदर से मिला था। प्रीत ने नोटिस किया था कि ये बटन रितिक की शर्ट के बटनों से मैच करता है और रितिक की शर्ट का एक बटन भी गायब है।

बटन को देख रितिक हड़बड़ाने लग जाता है। उसे समझ नही आ रहा था कि उसके साथ ही ये सब क्यों होता है?, अब वो ये भी नहीं कह सकता कि उसके दोस्तों ने उसे कब्र में गिरा दिया था, क्योंकि अगर उसने ये कहा तो उन दोनो लड़कियों की बात झूठी साबित हो जाएगी और रितिक कभी नही चाहेगा की कोई उसकी चांदनी को झूठा कहे।

रितिक को कुछ ना कहते देख ठाकुर साहब आगे आते है और प्रीत से कहते है–" हम बताते है, दरअसल कुछ दिनो पहले तक उस जगह पर कोई कब्र नही थी, फिर अचानक से वहा पर किसी ने कब्र खोद दी। हमे लगा किसीने किसी की लाश को ठिकाने लगाया होगा इसीलिए गांव का सरपंच होने के नाते हमारा फर्ज बनता था कि हम मुजरिम को ढूंढे और उसको सजा दे इसलिए हमने ही इन बच्चों की मदद ली थी उस कब्र को खोदने में और ये पता करने के लिए कि वो लाश किसकी है और शायद तभी ये बटन इसकी शर्ट से टूटकर वहा गिर गया हो।"

पूरी बात सुनकर प्रीत समझ जाती है कि मामला क्या है? प्रीत एक और सवाल करती है–" अच्छा.. तो कुछ मिला क्या उस कब्र में?"

ठाकुर साहब जवाब देते हुए कहते है–" नही बेटा, वहा हमे कुछ नही मिला, वो पूरी कब्र ही खाली थी, हमने उस कब्र को ऐसे ही रहने दिया और अगले दिन देखा तो वहा मनोज की लाश पड़ी थी।"

प्रीत कहती है–" हम्म.. आप लोग चिंता मत कीजिए, बॉडी को पोस्टमार्टम करने भेजा है, मुजरिम ने जरूर अपने निशान उसके शरीर पर छोड़े होंगे।"

प्रीत की बात सुन रितिक अपने हाथ देखने लग जाता है और प्रीत से कहता है–" मेरे निशानों का क्या होगा?"

रितिक की बात सुन प्रीत अपना माथा पीट लेती है और वो रितिक से कहती है–" माखनलाल से कह दूंगी वो तुम्हारे फिंगर प्रिंट ले ले। तुम्हारे फिंगरप्रिंट के सिवा जिसके भी निशान उसकी बॉडी पर होंगे, वही असली कातिल होगा।"

" जी..." रितिक हा में अपना सिर हिला देता है।

उसके बाद प्रीत पुलिस स्टेशन के लिए निकल जाती है।

रितिक ठाकुर साहब के पास आता है और उनसे कहता है–" आज्ञा दीजिए ठाकुर साहब, हम भी चलते हैं।"

ठाकुर साहब हा में अपना सिर हिला देता है, उसके बाद वे लोग भी हवेली से बाहर चले जाते है।

हवेली से बाहर निकलकर रोमियो चिड़ते हुए उन लोगो से कहता है–" आज तो मरवा ही दिया था तुम लोगो ने, अगर वो प्रीत मैडम चांदनी की रिश्तेदार ना निकलती तो हम लोग जेल में सड़ रहे होते।"

रितिक जवाब देते हुए कहता है–" ऐसे कैसे जेल में होते है, जब हमने कुछ किया ही नहीं है तो किस बात की सजा।"

इस पर करन कहता है–" रोमियो सही कह रहा है, ये पुलिस वाले सबूत देखते है और सारे सबूत हमारे ही खिलाफ थे। जब मनोज की बॉडी पर तेरे हाथो के निशान मिलते तो गारंटेड हम लोग जेल के अंदर होते।"

अमर उन लोगो को चुप कराते हुए कहता है–" अब छोड़ो भी ये सब, जो होना था हो गया, मैं तो ये सोच रहा हूं कि मनोज को मारा किसने है? एक बजे तक तो हम लोग ही वहा पर मौजूद थे और तूने कहा कि मनोज से तेरी हाथा पाई रात के बारह बजे हुई थी, फिर ये मनोज जंगल में क्या कर रहा था?, इस पर घर नहीं जाया गया।"

करन जवाब देते हुए कहता है–" घर कैसे जाता बेचारा? इस रितिक ने उसे मार मारकर बेहोश जो कर दिया था।"

अमर सर हिलाते हुए कहता है–" हा ये भी सही है।"

रितिक एक लंबी आह भरते हुए कहता है–" मुझे लगता है ये काम बंजारन का है, वो आजाद हो चुकी है।"

रितिक की बात सुन सब लोग शौक हो जाते है और वे कहा थे वही रुक जाते है।

अमर शौक होते हुए रितिक से पूछता है–" ये तू क्या कह रहा है?"

रोमियो घबराते हुए रितिक से कहता है–" क्या कहा?, बंजारन आजाद हो गई है।"

रितिक हा में अपना सिर हिलाते हुए कहता है–" हा.. वो आजाद हो गई है और पूरा गांव जानता है कि मनोज को बंजारन ने ही मारा है।"

करन कहता है–" तुझे कैसे पता कि वो आजाद हो गई है।"

रितिक हकलाते हुए जवाब देता है–" वो मैने ही उसे आजाद किया है।"

रितिक की बात सुनकर सब लोग और भी ज्यादा हैरान हो जाते है। अमर कुछ देर सोचते हुए उससे कहता है–" अच्छा तो तभी तू उस रात गहबराया हुआ लग रहा था।"

रितिक हा में अपना सर हिला देता है। अमर आगे कहता है–" क्या हुआ था उस रात?"

रितिक कहता है–" यहां नही, पहले घर चलो, अगर किसी ने सुन लिया तो बेकार में ही बवाल खड़ा हो जाएगा।"

करन सहमति जताते हुए कहता है–" हा, रितिक सही कह रहा है, अगर इस गांव में किसी को पता चला कि बंजारन को रितिक ने आजाद किया है तो वे लोग रितिक का पता नही क्या करेंगे?"

अब लोग कारण को बातों में हामी में अपना सर हिला देते है। रोमियो कहता है–" मुझे तो बहुत जोरो की भूख लगी है, पहले चलकर कुछ खा लेते है।"

" भूख तो मुझे भी लगी है।" अमर भी रोमियो का साथ देते हुए कहता है। रितिक हा में अपना सर हिलाते हुए कहता है–" ठीक है फिर, पहले हम कुछ खा लेते है।"

रोमियो कहता है–" चलो मैं तुम्हे एक ढाबे पर ले चलता हूं, वो बहुत हीं बढ़िया खाना बनाता है।"

सब लोग हा में अपना सिर हिला देते है। उसके बाद वे लोग गांव के बीच से होते हुए उसी नदी वाली जगह पर पहुंच जाते है जहा रोमियो की मुलाकात कमली से हुई थी।

वही पर एक छोटा सा ढाबा बना हुआ था। वो ढाबा बास की लकड़ी से बना हुआ था। बाहर ही कई सारी मेजे और कुर्सियां पड़ी हुई थी और सामने का नजारा ऐसा था कि खुला आसमान और आसमान में नजर आती विशाल पहाड़िया। नदी पार ही एक खुल मैदान था जिसमें हिरन घास खा रहे थे। उस जगह की सुंदरता देख तो सभी लोग शौक हो गए थे। अमर कहता है–" बॉब यार, कितनी सुंदर जगह है ये।"

रोमियो कहता है–" ये तो कुछ भी नही है, जब तू इन पहाड़ियों पर जाएगा तब तो तुझे और भी ज्यादा मजा आएगा।"

वे लोग पास ही की एक मेज पर बैठ जाते है और रोमियो खाने का ऑर्डर करने चला जाता है।