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मुहब्बत की निगाहें

वाजिद हुसैन की कहानी -प्रेम कथा

वह घुंघराले बालों, शायराना आंखों वाला सुंदर-लंबा-चौड़ा नवयुवक था। उसकी शक्ल सूरत मुगलई थी। चाल-ढाल से ग़ुरूर टपकता था। वह ठाट- बाट से रहता, अच्छे से अच्छा कपड़ा पहनता, जेब- ख़र्च भी काफी मिलता। इसलिए उसके यार- दोस्त उसे सैफ न कहकर, नवाब सैफ कहते थे। जब कॉलेज में था तो कई लड़कियां उस पर जान छिड़ती थी, मगर वह भाव नहीं देता। आख़िर उसकी आंखें एक शोख्- हसीन लड़की, जिसका नाम नरगिस था, से लड़ गई। सैफ ने उस से मेल- जोल पैदा करना चाहा। उसे यक़ीन था कि वह उसकी गिरफ्त में आ जाएगी। वह तो यहां तक समझता था, कि नरगिस उसके क़दमों में गिर पड़ेगी और अपने भाग्य को सराहेगी कि सैफ ने मुहब्बत की निगाहों से उसे देखा। एक दिन कॉलेज लाईब्रेरी में नरगिस कोई महंगी किताब पढ़ रही थी। सैफ के पास वह किताब थी। उसने किताब नरगिस की ओर बढ़ाते हुए कहा, 'इसे आप रख लीजिए।' नरगिस ने बड़े ख़ुश्क लहजे में जवाब दिया, आपकी मदद कि मुझे कोई ज़रूरत नहीं, बहरहाल शुक्रिया अदा किए देती हूं।
सैफ को अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सदमा पहुंचा। चंद लम्हात के लिए वह अपनी खीज मिटाता रहा‌। इसके बाद उसने नरगिस से कहा, ' औरत को मर्द के सहारे की ज़रूरत होती है। मुझे हैरत है कि आपने मेरी पेशकश को ठुकरा दिया?' नरगिस का लहजा और ज़्यादा ख़ुश्क हो गया, ' औरतों को मर्द के सहारे की ज़रूरत होगी, मगर फिलहाल मुझे ऐसी कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती। आपकी पेशकश का शुक्रिया मैं अदा कर चुकी हूं, इससे ज़्यादा आप और क्या चाहते हैं?' यह कहकर नरगिस चली गई। सैफ, जो नरगिस के ख़्वाब देख रहा था, आंखें झपकता रह गया। उसने बहुत बुरी तरह शिकस्त खाई थी। इससे पहले उसकी ज़िदगी में कई लड़कियां आ चुकी थी, जो उसके इशारे पर चलती थी, मगर यह नरगिस क्या समझती है अपने आपको।' इसमें कोई शक नहीं कि ख़ूबसूरत है। जितनी लड़कियां मैंने अब तक देखी हैं, उसने सबसे ज़्यादा हसीन है। मगर मुझे ठुकरा देना यह बहुत बड़ी ज़्यादती है। मैं ज़रूर इसे हासिल करके रहूंगा चाहे कुछ भी हो जाए।' सैफ ने उसे हासिल करने के कई हथकंडे अपनाए, जो सफल साबित न हुए। सैफ तो अपने इरादों में कामयाब न हुआ। मगर तक़दीर ने उसकी मदद की। उसके अम्मी- अब्बा ने उसके लिए रिश्ता ढ़ूंढना शुरू किया। उसके अब्बा कि निगाह-ए-चयन आख़िर नरगिस पर पड़ी, जो उनके दोस्त की लड़की थी। तभी उसकी अम्मी बोली, 'लड़की वालों से कह दें, सैफ की मां रज़ामंद नहीं है।'
सैफ एकदम जज़्बाती हो गया, 'नहीं अम्मी जान ऐसा न कीजिएगा। मैं उससेे मुहब्बत करता हूं। और किसी की मुहब्बत बेकार नहीं जाती। वह मुझसे बेरूखी और रूखेपन का इज़हार कर चुकी है। मेरा मतलब है, नरगिस को यह पता न लगने दीजिए कि उसका ब्याह मुझसे हो रहा है।'
लंबे इंतजार के बाद मेंहदी की रात आ गई। सैफ जब पलंग पर सोने के लिए लेटा, तो सारी रात वह ख़्वाब देखता रहा, घोड़े पर सवार बाग में आया है, शाहाना लिबास पहने हुए। क्या देखता है कि चमन में बड़ी मुद्दत के बाद नरगिस का फूल खिला है। उसने फूल को छूने के लिए हाथ बढ़ाया, उसके हाथ में कांटा चुभ गया। वह दूर खड़ा असहनीय पीड़ा बर्दाश्त कर रहा था‌। फूल में से चंद शबनम के क़तरे टपकते देख, उसे लगा, फूल उसकी पीणा देख आंसू बहाने लगा। वह फिर से फूल की ओर गया और फूल की ख़ुशबू से गुलशन महकने लगा।
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा, सास भी तेज़ चलने लगी। घबराकर उसने मां को जगाया। उन्हें ख्वाब सुनाई और ताबीर पूछने लगा। ख़्वाब सुनकर, मां गमगीन-सी होकर बोली, 'बेटा, तेरी ज़िंदगी में पलभर के लिए कोई गम आएगा, फिर इतनी ख़ुशियां मिलेंगी कि समेट न पाएगा, बस तुझे हौसला बुलंद रखना है।
लंबे इंतजार के बाद सुहागरात आ गई। दुल्हन को फूलों से सजे कमरे में दाख़िल कर दिया गया। सैफ को भी इजाज़त मिल गई कि वह उस कमरे में जा सकता है। लड़कियों की छेड़छाड़ और रसमें सब खत्म हो गई थी। वह कमरे के अंदर दाख़िल हुआ। फूलों से सजी हुई मसहरी पर दुल्हन घूंघट काढ़े रेशम की गठरी सी बनी बैठी थी। सैफ धड़कते हुए दिल के साथ मसहरी की और बढ़ा और दुल्हन के पास बैठ गया। काफी देर तक वह अपनी बीवी से कोई बात न कर सका। उसके तसव्वुर में नरगिस की इमेज, खुश्क लड़की की थी, जो उससे बेरूखी से पेश आएगी। आख़िर उसने बड़ी जुर्रत से काम लिया और अपनी दुल्हन के चेहरे से घूंघट उठाया। बेपनाह ख़ूबसूरत, शर्मीली लड़की देखकर, वह भौचक्का रह गया। 'यह नरगिस नहीं है, कोई और ही लड़की है।' उसने सोचा।
वह खिड़की में खड़ा होकर चांद की तरफ देखकर एक आह भरता है। एक सिगरेट लाइटर से जलाता है, फिर चांद से पूछता है,'नींद क्यों नहीं आती?'
अचानक कमरे में एक आवाज़ गूंजती है, 'सुनिए, क्या अब भी नाराज़ हैं ...?' वह सिगरेट का एक कश ज़ोर से लेकर सिगरेट खिड़की से बाहर फेक देता है। उसे वही आवाज़ लगी, जो उसने लाईब्रेरी में सुनी थी। घूंघंट में से नरगिस ने कहा, 'मैं लाईब्रेरी मे आपसे किताब ले लेती, तो दिल्लगी का सामान बन जाती, बीवी न बन पाती।'
सैफ ने नरगिस का घूंघट उठाया। थोडी देर चुप रहा। फिर बोला, 'नरगिस! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।' 'मैं भी।' और उसने अपना सिर सैफ के कंधे पर रख दिया।

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