Pyar bhara Zehar - 14 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार भरा ज़हर - 14

एपिसोड 14 ( काव्य का आना ! )

राघव को समझ नहीं आ रहा था , की काश्वी इस तरह रियेक्ट क्यूँ कर रही थी | राघव ने फिर ध्यान दिया , की काश्वी उसी के पिच्छे कुछ देख रही थी | राघव जब पिच्छे मुदा , तो उसके पिच्छे सिर्फ सीड़ियाँ ही थीं | ध्यान से सोचने के बाद , राघव को समझ में आया की , काश्वी क्या कहना चाहती है | राघव कुछ बोलता , उससे पहले ही काश्वी बोल पड़ी | 

काश्वी :: "राघव इतनी सारी  सीड़ियाँ ?" मंदिर के मेन द्वार तक पहुंचने के लिए , राघव काश्वी को गोद में उठाकर , कम से कम सौ सीड़ियाँ चढ़ा होगा | ओर काश्वी को फील भी नहीं हुआ , की राघव ने इतनी देर उसे उठा कर रखा था | फिर राघव हस्ते हुए , ओर काश्वी को परेशान करते हुए बोला | 

राघव :: "हाँ , मेरे हातों में बहुत दर्द हो रहा है , तुम कितनी भारी हो ..." राघव की बात सुन , काश्वी का मुह चड़ गया | राघव अपनी बाजुओं को सिद्ध करते हुए , काश्वी को गिल्टी फील करवा रहा था | फिर काश्वी आगे बोली | 

काश्वी :: "छोड़ो ... चलें दर्शन कर लेते हैं |" उसके बाद , दोनों मन्दिर के अंदर चले गये | दर्शन कर , जब दोनों वापिस आ जाने को हुए , तो पहले दोनों ने पंडित जी का आशिरवाद लिया | ओर पंडित जी ने काश्वी की शादी की पोटली , माता रानी के चरणों में चढ़ा दी | ओर दोनों को , हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद दिया | 

राघव इस मंदिर में पहले भी आ चूका था | पर फिर जैसे ही , काश्वी मन्दिर की सीड़ियाँ उतरने को हुई , मानो उसकी आँखों के सामने कुछ दृश्य आने लगे हों | कश्वी को मन्दिर के साइड वाले आंगन में , तुलसी का पौधा देख , ऐसा लग रहा था , मानो उसी ने वो पौधा वहां पर लगाया हो |

राघव ने काश्वी को अपना सर पकड़ते हुए देखा , तो वो परेशान होते हुए , काश्वी के पास आकर बोला | 

राघव :: "क्या हुआ , तुम ठीक तो हो ?" राघव को खुद के लिए परेशान होते देख , काश्वी जल्दी से बोली | 

काश्वी : "अरे नहीं नहीं , कुछ नहीं | चलें !" फिर राघव ने काश्वी का हाथ पकड़ा , ओर दोनों मन्दिर से निकल गये | आज पूरे दिन में , बहुत कुछ अजीब हुआ था | पहले तो अचानक से रंजना जी का , दोनों को मन्दिर दर्शन के लिए भेजना | उसके बाद , शादी की पोटली को चढ़ाना | राघव ओर काश्वी का एक्सीडेंट | गाडी के टायर पर लगा खून | फिर , काश्वी को किसी के होने का एहसास का होना | ओर अब , अब मन्दिर जाना पहचाना लगना | 

घर जाते समय , काश्वी के दिमाग में ही सब बातें चल रहीं थी | उसे समझ नहीं आ रहा था , की वो सांप आखिर गया कहा , ओर वो खून किसका था ? ओर आखिर क्यूँ वो तुलसी का पौधा , उसे जाना पहचाना लग रहा था | ये सब बातें सोचते हुए , काश्वी के सर में तेज़ दर्द होने लगा था | 

राघव को पता था , की काश्वी के लिए मन्दिर आना , मुश्किल होगा | क्यूंकि काश्वी के पिछले जनम की बहुत जरूरी पल इसी मन्दिर में बीते थे | राघव को आज भी , वो सारे पल बहुत अच्छे से याद थे | पर राघव को , इन सब खुशियों का बर्बाद करने वाली ईदें भी याद थीं | आज भी राघव को याद था , की कैसे , उन दोनों को उन्ही के अपनों ने धोखा दिया था | ओर दोनों को मार कर , जुदा कर दिया था | पर शायद भोलेनाथ , का कोई ओर ही इरादा था , भगवान् कभी भी अपने भगतों के साथ कुछ बुरा नहीं होने देते | 

इस जनम , भी इन दोनों की जोड़ी एक साथ है | फर्क सिर्फ इतना है , की काश्वी को अभी तक कुछ भी अपने पिछले जानम का याद नहीं है | पर राघव अब ये सोच रहा था , की वो ऐसा क्या करे , जिससे काश्वी को पुरानी यादें याद आ जाएं | तभी राघव के दिमाग में कुछ आता है | जिसके बाद , राघव एक नजर काश्वी की ओर देखता है , ओर फिर घर की ओर गाड़ी ले जाता है | ओर राघव मन ही मन खुद से बोलता है | 

"मुझे पूरा यकीन है काश्वी , जो मैं अब करने वाला हूँ , उससे तुम्हे हमारे पुराने जनम के बारे में सब याद आ जायेगा | हे भोलेनाथ , मेरी मद्दत करना | ताकि मैं , काश्वी को सब याद दिला सकूं |" 

ओर काश्वी तो कहीं ओर ही खोई हुई थी | कब दोनों घर पहुंच गये , काश्वी को पता ही नहीं चला | जैसे ही काश्वी गाडी से उतरी , उसका पैर मुडा , ओर जैसे ही वो गिरने ही वाली थी , राघव ने उसे थाम लिया | फिर राघव काश्वी से बोला | 

राघव :: "ध्यान कहा है तुम्हारा | देख के चलो |" 

काश्वी :: "थैंकयु |" ओर फिर सीधे खड़े होते हुए , काश्वी ने देखा की , राघव के पिच्छे एक लड़की कड़ी थी | जो बड़े ध्यान से उन दोनों को देख रही थी | काश्वी कुछ बोलती , उससे पहले ही वो लड़की भाग कर राघव से आकर गले लग गई | ओर राघव को गाल पर किस करते हुए , बोली | 

"ओ , रघु , आई मिस्ड यू अ लॉट |" राघव यूँ अचानक से किसी के किस करने से , दंग रह गये था | ओर उसे गुस्सा आने लगा था | पर राघव को जब लगा की ये आवाज़ कुछ जानी पहचानी है , तो उसने ध्यान से उस लड़की की ओर देखा , ओर फिर स्माइल के साथ बोला | 

राघव :: "ओर काव्य , तुम हो ?" काव्य ने राघव को देखा , ओर फिर एक नजर काश्वी की ओर मारी , ओर फिर नाम चिढाते हुए राघव से बोली | 

काव्य :: "तो ये लड़की तुम्हारी बीवी बनी है |" काश्वी को ना जाने क्यूँ वो लड़की कुछ ठीक नहीं लग रही थी | ओर काश्वी को समझ नहीं आ रहा था , की क्या मतलब बीवी बनी है | वो राघव की बीवी है | राघव को समझ नहीं आ रहा था , की क्या बोले | इसलिए वो चुप रहा | 

क्या लगता है दोस्तों , क्या काव्य का काश्वी ओर राघव की ज़िन्दगी में आना , कोई शुभ संकेत है , या कोई अन्होने के आने का आगाज़ ? ओर क्या करने की सोच रहा है राघव , जिससे काश्वी की पुरानी ज़िन्दगी की यादें वापिस आ जाएं ? 

जाने के लिए  बने रहिए मेरे साथ |