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ननिहाल

हमेशा की तरह इस साल भी मैं अपने ननिहाल जा रही थी। बस मैं बैठने के बाद वही खिड़की वाली सीट पर बैठना 10:00 बजे बाद गाड़ी का होटल पर रुकना और खाना खाना। उसके बाद सुबह 6:00 बजे का इंतजार करना और हरियाली को निहारना खूब लुभाता था। 7:00 बजे तक गाड़ी का फिर होटल मैं रुकना और गरमा गर्म पोहे का लुत्फ उठाना बहुत ही आनंदमय लगता था। महाराष्ट् पहुँचने के बाद 8:00 बजे बस का चाँदनी चौक पर रुकना। और अपने गांव के लिए रवाना होना। एक घंटे बाद फिर बस का बस स्टैंड पर रुकना और हम ऐसे ही पैदल निकल गए।नानी के यहां जाने के लिए हालांकि गाड़ी से भी जाया जा सकता था। लेकिन हमें नानी की बहन का घर उसी नगर मैं आता था उस नगर का नाम मिरज गांव था। हम थोड़ी देर वहां रुकने के बाद लिफ्ट लेकर नानी के गांव पहुँच गए। मिट्टी का घर होने कारण वहां बहुत आनंदमय लगता था खाना खाने और आराम करने के बाद हम खेत की ओर निकले और हरे भरे खेतों का आनंद उठाने लगे।ताजी हरी मिर्च, ग्वार फली, प्याज, भुट्टे, सुरजने कि फली, अनार का बाग ये सब खेतों मैं लगा हुआ था। पाइप से कुए का ठंडा ठंडा पानी जिससे हमने हाथ पैर धोए। और घर के लिए निकल। शाम को 6:00 बजे घर पहुंचे और नानी ने चूल्हे पर सबके लिए चाय बनाई और सभी ने चाय पी। फिर नानी खाना बनाने लगी। खाना खाने के बाद ममी ने एक कहानी सुनायी जो कि रियल कहानी पर आधारित है नानी के गांव की गांव से कुछ ही दूरी पर एक भूत बंगला है वहां पर सब रात को खाना खाने के बाद 10:00 बजे पत्ते खेलने जाते थे। एक दिन की बात है एक गांव के ब्राह्मण वहां पर पत्ते खेलने गए। हार जाने पर वो कहने लगे कि 12:00 बजने से पहले मुझे उठा देना। तो सभी ने बोला ठीक है हम आपको 12:00 बजने से पहले उठा देंगे। क्योंकि कहा जाता है कि वहां पर 12:00 बजने के बाद भूतों का परिवार आता है तो ऐसा कहकर ब्राह्मण सो जाते हैं सभी वहां से चले जाते हैं और ब्राह्मण को नहीं उठाते हैं ये सोचकर कि सही मैं यहां भूत है या नहीं। जैसे ही 12:00 बजते है वहां भूतों का परिवार आना चालू हो जाते हैं कोई ब्राह्मण के बाल खींच रहा हैं हाथ नोच रहा कोई पैर नोच रहा है इस तरह सभी ब्राह्मण को परेशान करने लग जाते हैं इसके बाद ब्राह्मण देखते है यहां तो भूत आ गए। और उन लोगों ने उन्हें उठाया नहीं। ऐसे मैं ब्राह्मण सभी के एक-एक बाल तोड़ कर कुए मैं फेंक देते है और उसमे मिट्टी डाल देते है सुबह 4:00 बजने तक सभी भूत चले जाते हैं और बाल नहीं निकाल पाते।अगले दिन रात को ब्राह्मण और सभी लोग वहां पहुंचते और ब्राह्मण से पूछते ब्राह्मण यहाँ पर कोई भूत नहीं है ना तो ब्राह्मण बोलते है नहीं यहाँ तो कोई भूत नहीं है आज रात हम सब यही सोयेंगें। तो सभी बोलते है ठीक है आज हम यही सोयेंगें।सभी वहां सो जाते है और ब्राह्मण उठ कर चले जाते है सुबह होते ही देखते है सभी मरे हुए मिलते हैं