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दोस्त की शादी

Part-1दोस्त की शादी
परीक्षा का समय था सीढियों पर में चल रहीं थी।अचानक मेरा दोस्त आया और कहने लगा की मेरी शादी है 12 दिसम्बर को तुम जरूर आना। मैंने भी कह दिया। शादी उज्जैन में थी ।12 दिसम्बर को मैं जानें के लिये तैयार हो गयी। फिर मैंने उसके लिये फ्रेम खरीदी और ऑटो से अरविंदो निकल गयी। क्लास की सभी ल़डकियों ने बस कर रखी थी। तो हम सब उसी बस में जाने वाले थे। मैं थोड़ा लेट हो गयी थी। परन्तु पहुंच गयी थी फिर हम सब बस से उज्जैन रवाना हो गए। सभी लोग साथ में जा रहे थे तो बहुत आनंदमय लग रहा था। शादी रिसॉर्ट में थी। रिसॉर्ट पहुंच कर हम लोगों का टीका किया गया। उसके बाद हम अंदर पहुंचे। सभी family को अलग-अलग रूम दिये थे हम सब क्लास कि ल़डकियों को एक रूम और लडकों को एक रूम दिया गया था। हम सब फ्रेश हुए। और नीचे जाने के लिए रेडी हुए। रेडी होने के बाद सभी ने फोटो लिए। और नीचे चले गये। नीचे जानें के बाद हम सब बारातियों में शामिल हो गए और वरमाला की रसम देखने लगे। उसके बाद दूल्हा दुल्हन के साथ फोटो खिचवाया और उन्हें गिफ्ट दिया। उसके बाद हम खाना खाने चले गए। खाने में रसमलाई, शिकंजी, चाट, गराडु,पानी-पूरी, नूडल्स, मनचूरियन,कचौरी,मटरपनीर,दाल-
चावल, मेथी कि पूरी, सेव की सब्जी, गुलाब- जामुन, मूंग का
हलवा , कॉफी थी। उसके बाद हम पूरी रात जागे खूब मजे
किये। फिर दुल्हन कि विदाई देखी। और सुबह 6:00 बजे की गाड़ी से इंदौर आ गए।

Part-2 बहन की शादी
मेरी बुआ कि लड़की की शादी 25 दिसम्बर को तैैय कि गई थी शादी पक्की होने के बाद हम शादी में गए। शादी मै हम 8 दिन पहले ही चले गए थे। शादी यही इंदौर में रखी गई थी ।
मेरे घर से 5-6km दूर। जाने के बाद मेहंदी की रसम हुई। जिसमें सभी ने मेहंदी बनवायी। उसके बाद घर में
सगाई हुई सभी ने खाया। खाने में पूरी सब्जी, दाल-चावल,और
गुलाब-जामुन था सगाई के बाद हल्दी की रस्म थी हल्दी कि रस्म के बाद महिला संगीत था महिला संगीत में सभी ने
अपनी-अपनी प्रस्तुति दी।उसके बाद शादी आयी। शादी वाले दिन सभी घर से तैयार होकर गए। मैं और मेरी बहन हम स्टेज पर थे मैं और मेरी बहन भूख लगने पर हल्का-फुल्का खाकर आये। उसके वरमाला रस्म हूई। खाने में गुलाब-जामुन,मूंग का हलवा, सलाद, चाट, पानी-पूरी, दही-बड़े, मटरपनीर, मिक्स वेज, कॉफी, मनचूरियन,दाल-चावल थे। सभी मेहमान जाने के बाद रात के 2:00 बजे सभी फॅमिली मेंबर्स ने साथ खाना खाया। काफ़ी ठंड होने के कारण मेरे तो गले से खाना ही नही उतर रहा था। फिर फेरे की रस्म चालू हूई। फेरे के बाद विदाई और जूते चुराई कि रस्म हुई। जूते चुराई में जीजा जी से 25000 रुपये लिए। उसके बाद विदाई की रस्म में सब रोये और दीदी को विदा किया। दीदी के साथ मेरी बड़ी बहन और एक रिश्तेदार गयी थी। अगले दिन जीजा जी की तरफ से रिसेप्शन रखा गया था महू में सभी महू जाने के लिए रवाना हुए। महू जाकर में अपनी बहन से मिली और हमने मिलकर खाना खाया। खाना बैठ कर जिमाया
था। छोटे-छोटे चौरन लगे हुए थे। खाने में मूंग के भजिए,सब्जी-पूरी, दाल-चावल, जलेबी, रखा गया था। रात को मैं वही रुकी क्योंकि रात को वहां जागरण गोधंड था। सभी ने बहुत डांस किया। उसके बाद सुबह मैं अपने घर आ गई।