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जिन्नजादी - भाग 19

जिन्नजादी 19

हिना युसूफ अली से कहती है।
इस पाखंडी तांत्रिक ने
अपनी अघोरी शक्तियों से
हमें बहुत तकलीफ बहुत दुख दिया है।
आप बताओ अब इसके साथ क्या करें ?

युसूफ अली कहता है
इस अघोरी तांत्रिक ने मेरे हिना को कैद करने की जुर्रत की है।
उस पर बहुत सितम किए।
कुश्ती ज्ञान लेने की कोशिश की
इस तांत्रिक को मैं कभी माफ नहीं कर सकता।

अगर तुम मुझसे सच्चा प्यार करती हो
तो इसे ऐसी मौत मारना
कि उसका अंजाम देखकर दुनिया की रूह कांप उठे।
फिर किसी अघोरी तांत्रिक की
ऐसी गुस्ताखी करने की जुर्रत ना हो।

हिना कहती है
मेरे प्यार की कसम
अब देखो मैं इसका क्या हश्र करती हू।
इतना कहकर
हिना तांत्रिक बंगाल शास्त्री के पास जाती है।
हिना को अपने पास आते देखकर
तांत्रिक बंगाल शास्त्री
डर के भाग जाने लगता है।

हिना उसका हाथ पकड़ लेती है।
और एक ही पल में उसका हाथ उखाड़ लेती है।
दर्द के मारे तांत्रिक बंगाल शास्त्री
जोरो से रोने लगता है।
हिना से दया की भीख मांगता है।
लेकिन उसकी गलती की माफी नहीं थी।
वह सिर्फ सजा का हकदार था।

हिना उसका दूसरा हाथ पकड़ कर।
उसको भी उखाड़ देती है।
तांत्रिक बंगाल शास्त्री का दर्द के मारे बुरा हाल होता है।
वह जमीन पर गिर जाता है।
हिना को फिर भी उस पर रहम नहीं आता।
हिना उसका सर पकड़ कर।
गर्दन से अलग कर देती है।
तांत्रिक बनकर शास्त्री की मौत हो चुकी होती है।

लेकिन हिना यह जानती थी
यह तांत्रिक कोई मामूली तांत्रिक नहीं
यह बहुत ही बड़ा अघोरी तांत्रिक है
इसके जिस्मों के हिस्से को ऐसी ही छोड़ा
यह फिर से अपनी शक्ति से
जिंदा हो सकता है।

हिना अपनी तिलिस्मी आग से
तांत्रिक बंगाल शास्त्री के जिस्म को पूरी तरह जलाकर खाक कर देती है।

हिना तांत्रिक बंगाल शास्त्री का
पूरी तरीके से खात्मा कर देती है।
तांत्रिक बंगाल शास्त्री
हिना के तिलिस्मी आग से
जलकर खाक हो जाता है।।

हिना की सारी मुसीबते अब
ख़त्म हो चुकी होती हैं।
युसूफ अली हिना के करीब आता है
और हिना को अपने सीने से लगा लेता।
हिना भी युसूफ अली के बाहों में
पूरे शिद्दत से समझ आती है।
घंटों तक हो एक दूसरे के बाहों में खो जाते हैं।

युसूफ अली सीना से कहता है
अब हमारी सारी मुसीबतें सारी तकलीफ सारे दुख दर्द खत्म हो चुके हैं।
अब हम घर चलते हैं
बीती सारी बातें भुला कर
नए तरीके से जिंदगी की शुरुआत करते हैं। एक दूसरे के साथ खुशी से जिंदगी गुजारते हैं।

हिना युसूफ अली की बात को काटते हुए करती है।
अब हमारा एक साथ रहना
अब नामुमकिन है।
मैं चाह कर भी आपके साथ नहीं रह सकती।
मैं बहुत मजबूर हूं हो सके तो मुझे माफ कर देना।
अब मुझे जाना होगा हमेशा हमेशा के लिए
अब हम दोबारा कभी नहीं मिल सकते।

हिना की यह बात सुनकर
युसूफ अली को गहरा सदमा लग जाता है।
उसकी हालत ऐसी हो जाती है
जैसे सातों आसमान एक साथ उसके ऊपर गिर गए हो।
उसकी आंखों से अश्कों की धारा बहने लगती है।

युसूफ अली खुद को संभालते हुए
सीना से कहता है
तुम ऐसा क्यों कह रही हो मेरी जान
मुझसे कोई गलती हो गई है क्या ?
अगर मेरी किसी बात से तुम्हें दुख पहुंचा हो।
तो मुझे माफ कर दो।
तुम्हें जो सजा देनी है मुझे दो
तुम्हारी हर सजा मुझे मंजूर है।
लेकिन इस तरह मेरा साथ छोड़कर मत जाओ
मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता।

हिना की हालत युसूफ अली की तरह ही होती है।
हिना की भी आंखें अश्कों से नम होती है।
हिना युसूफ अली से कहती है
मैं भी आपके बिना जिंदा नहीं रह सकती
लेकिन मुझे जाना होगा मैं मजबूर हूं।
आप हमेशा अपना ख्याल रखना

इतना कह कर हिना वहां से गायब हो जाती है।
हिना को वहां से गायब होता देखकर
युसूफ अली बहुत जोर जोर से रोने लगता है।
चिल्ला चिल्ला कर वह हिना को
बुलाने लगता है।
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
हिना हमेशा के लिए उसे छोड़कर जा चुकी थी।

युसूफ अली पूरे तरीके से टूट चुका होता है।
रो-रो कर उसका बुरा हाल होता है।
रो-रोकर वह बेहोश होकर वही गिर जाता है।
जब उसकी आंखें खुलती है
वह खुद को अपने घर अपने कमरे में पाता है।
उसे समोसे देर नहीं लगती की ही हिना ने ही उसकी मदद करके उसे घर पहुंचा है।

युसूफ अली अपने कमरे से बाहर आता है।
युसूफ अली को देखकर
उसके मां-बाप बहुत खुश होते हैं
वह युसूफ अली से कहते हैं
तुम कब आए बेटा ?
सब ठीक है ना ?
तुमने अपनी ये क्या हालत बना रखी है ?
हमारी बहू हिना कहां है ?
वह ठीक तो है ना ?
तुम उसे अपने साथ लाने गए थे
तुमने उसे अपने साथ क्यों नहीं लाया ?
सब कुछ ठीक है ना ?

युसूफ अली खामोश रहता है
उसके मां-बाप बार-बार हीना का जिक्र करने लगते हैं।
दर्द बर्दाश्त ना होकर
युसूफ अली जोर जोर से रोने लगता है।
अपने बेटे को रोता हुआ देखकर
युसूफ अली के मां-बाप
उसे हौसला देते हुए कहते हैं
क्या हुआ बेटा सब कुछ ठीक है ना ?
कहीं हिना को कुछ हुआ तो नहीं ?

युसूफ अली ना में सर हिलाता है।
उसके मां बाप कहते हैं
तो क्या बात है हमें बताओ ?
हिना ने मुझे धोखा दिया है
छोड़ कर चली गई वो मुझे हमेशा के लिए
अब वह कभी लौट कर नहीं आएंगी।
उसके बिना मैं कैसे जी पाऊंगा
इस बात का उसने ख्याल भी नहीं दिया।
अब मुझे जीना नहीं है
मुझे हिना चाहिए
वरना मैं मर जाऊंगा।

इतना कहकर युसूफ अली
दीवारों पर अपना सर जोरों से पटकने लगता है।
उसका सर फट कर खून बहने लगता है।
उसके मां-बाप उसे रोकने की बहुत कोशिश करते हैं।
लेकिन यूसुफ अली के बेइंतहा दर्द के आगे सारी कोशिशें नाकाम हो जाती है।

उसके मां-बाप को उसकी यह हालत देखी नहीं जाती।
वह उसे संभालने की कोशिश जारी रखते हैं।
लेकिन उस पर किसी भी बात का असर नहीं होता।
युसूफ अली के सर से बहुत खून बहने लगता है।
आखिरकार उसका जिस्म जवाब देता है।
वह बेहोश होकर वहीं पर गिर जाता है।

युसूफ अली के मां-बाप
बहुत डर जाते हैं
वह उसे होश में लाने की बहुत कोशिश करते हैं
लेकिन युसूफ अली होश में नहीं आता।
वह उसे उठाकर उसके कमरे में ले जाकर
बिस्तर पर सुला देते हैं।
और वैद्य को बुलाते हैं।

कुछ ही समय में वैद्य वहां आ जाता है।
युसूफ अली की नफ्स पकड़कर
उसकी हालत का जायजा लेता है।
उसके मां-बाप से कहता है
युसूफ अली बहुत खून बहने के कारण कोमा में जा चुका है।
अब उसका बच पाना नामुमकिन है।
आप कोई दवाई काम नहीं आएंगी
मुझे माफ करना मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता।
अब आप बस खुदा से दुआ करो
कोई चमत्कार ही उसे अब बचा सकता है।
इतना कहकर वैद्य वहां से चला जाता है।

युसूफ अली के मां-बाप रोने लगते हैं।
दूसरे दिन उसकी बहने भी आ जाती है।
ऐसे ही कुछ दिन गुजर जाते हैं।
लेकिन यूसुफ अली की हालत में
कोई सुधार नहीं होता।
वह धीरे-धीरे मौत के करीब पहुंचने लगता है।

युसूफ अली के घरवालों से उसकी हालत देखी नहीं जाती।
लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकते थे।
युसूफ अली की बहन अपने घरवालों से कहती हैं
भाई को अब सिर्फ भाभी ही बचा सकती है।
वह तो एक जिन्न है।
जिन्न बहुत ही शक्तिशाली होते हैं
वह कुछ भी कर सकते हैं।
भाभी ही है जो भाई को मौत के मुंह से वापस ला सकती है।
हमें भाभी को बुलाना चाहिए।
उसके बात से घरवाले सब सहमत हो जाते हैं।

सब लोग मिलकर हिना को बुलाने की कोशिश करते हैं।
बहुत दुआएं बहुत मिन्नतें करने लगते हैं।
हफ्तों का वक्त गुजर जाता है
लेकिन वह अपनी कोशिशें नहीं छोड़ते।
दिन-रात वह हिना को बुलाने की कोशिश करते हैं।
एक दिन उनकी कोशिश रंग लाती है।

हिना उनके सामने आती है
हिना को देखकर सभी की उम्मीद जगती है।
युसूफ अली की मां
हिना से कहती है।
ऐसी क्या गलती हुई हमसे
जिसकी बेटा तुमने हमें इतनी बड़ी सजा दे दी।
अपनी बेटी से बढ़कर मैंने तुम्हें माना था।
कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि तुम हमारे साथ इतना बड़ा धोखा कर सकती हो।
युसूफ अली को ऐसा तड़पते छोड़ सकती हो।

मुझे आप भी यकीन नहीं हो रहा
कि तुम ऐसा कर सकती हो
तुम्हारी आंखों में मैंने युसूफ अली के लिए
सच्ची बेइंतहा मोहब्बत देखी है।
यह सब फरेब नहीं हो सकता
एक मां की आंखें कभी झूठ नहीं बोल सकती।
मुझे लगता है तुम्हारी कोई बड़ी मजबूरी है
जिसके कारण तुमने इतना बड़ा फैसला लिया है।
मैं यह भी जानती हूं जो हालत युसूफ अली की है
वही हालत तुम्हारी भी है।
ऐसी क्या मजबूरी है जिसके कारण इतने दुख दर्द तुमने अपने हक में ले लिए है।
बताओ मुझे।

हिना रोने लगती है
रोते-रोते वह अपने परिवार वालों से कहती है।
मुझे इस बात का पूरा इल्म था
मेरी सच्चाई आपको पता चल गई है
कि मैं एक जिन्नजादी हू।
आप कभी मुझे कबूल नहीं करोगे।
मैंने अपनी सच्चाई छुपाकर
आपको बहुत बड़ा धोखा दिया है।
आपके सामने आने की
मेरी हिम्मत नहीं हुई।
आप मुझसे नफरत करोगे
आप सबकी नफरत मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पाएगी।
इसलिए मैंने दिल पर पत्थर रखकर
दूर जाने का फैसला कर लिया।

युसूफ अली की मां गुस्से से कहती है
तुम होती कौन हो फैसला करने वाली
किसने हक दिया तुम्हें इतना बड़ा फैसला लेने का।
तुम मुझे अपनी मां कहती हो ना
क्या तुम्हें अपनी मां पर यकीन नहीं था
कि तुम्हारी मां तुम्हारा साथ देगी।
बस कहने के लिए ही मुझे मां कहती हो।

हां मुझे बुरा लगा कि तुमने हमसे सच्चाई छुपाई लेकिन इसका यह मतलब नहीं
कि हम तुमसे नफरत करेंगे तुम्हें अपनी जिंदगी से बेदखल कर देंगे।
तुम्हारी यह थोड़ी बिल्कुल गलत है।
तुम बहुत ही अच्छी बीवी
बहुत ही अच्छी बहू हो
हमें बस इतना ही काफी है।
हमें कोई फर्क नहीं पड़ता
कि तुम इंसान हो या जिन्नजादी हो।

अब हमें छोड़कर जाने की गुस्ताखी की
तो हम तुम्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
वादा करो मुझसे तुम कभी हमें छोड़कर नहीं जाऊंगी।
तुम्हारी जुदाई पाकर युसूफ अली अब मौत के करीब पहुंच चुका है।
मुझे तुम्हारी जरूरत है
बचा लो उसे उसकी हालत के जिम्मेदार सिर्फ तुम हो।
बचा लो अपने शोहर को
वरना खुदा भी तुम्हें माफ नहीं करेगा।

हिना कहती है
मैंने क्या कर दिया
जल्दबाजी में फैसला लेकर मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी।
मुझे माफ कर दो
इतना कहकर हिना युसूफ अली के करीब जाती है।
यूसुफ अली मरने की हालत में बिस्तर पर पड़ा होता है।

हिना उसके सर पर हाथ रख देती है।
और चमत्कार होता है
युसूफ अली के सारे घाव गायब हो जाते हैं।
एक ही पल में वह ठीक हो जाता है।
वह अपनी आंखें खोलता है।
हिना को अपने पास देखकर
उसे अपने गले लगा लेता है।
दोनों एक दूसरे से गले मिलकर
रोने लगते हैं।
लेकिन यह आशू खुशी के आंसू थे।

हिना यूसुफ अली से कहती है
बहुत सताया है मैंने आपको
मुझे माफ कर दो
अब मैं कभी आपको छोड़कर नहीं जाओगी
हर पल मैं आपके साथ रहूंगी।
एक पल भी आपके नजरों से दूर नहीं होंगी।
मुझे माफ कर दो
मैंने बहुत दिल दुखाया है आपका।

युसूफ अली हिना से कहता है
कोई बात नहीं जान
तुम वापस आ गई यही मेरे लिए बहुत बात है।
आप मुझे किसी बात की कोई शिकायत नहीं।

सब कुछ ठीक हो जाता है
युसूफ अली और हिना खुशी-खुशी अपने शरीफ परिवार के साथ
रहने लगते हैं।।

समाप्त।।

धन्यवाद दोस्तों।।

लेखक।।

मुस्ताक अली शायर।।