Wajood - 5 in Hindi Fiction Stories by prashant sharma ashk books and stories PDF | वजूद - 5

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वजूद - 5

भाग 5

काकी वो शहर है अपना गांव नहीं। वहां बहुत काम होता है वक्त नहीं मिला होगा कमल को, इसलिए नहीं आ सका होगा।

ऐसे ही बात करते हुए सुखिया काकी का घर आ जाता है शंकर थैला घर के अंदर रखता है और काकी के पैर छूकर फिर अपने घर के लिए रवाना हो जाता है।

आ गया क्यों बुलाया था प्रधान जी ने ? कुसुम ने शंकर से प्रश्न किया।

वो पंचायत कार्यालय की छत टूट गई है। उसकी मरम्मत करना है। बारिश आने वाली है तो कार्यालय में पानी भर जाएगा। शंकर ने जवाब दिया।

ठीक है। कुसुम ने कहा और फिर अपने काम में व्यस्त हो गई।

शंकर भी जो काम छोड़कर गया था उस काम को पूरा करने में जुट गया। कुछ ही दिन बीते थे, एक दिन शंकर, हरी और कुसुम शाम को खाना खा रहे थे। तब कुसुम ने हरी से कहा-

सुनिए अगले मंगलवार को आप थोड़ा समय निकाल लेंगे क्या ?

हरी ने पूछा- क्यों क्या हुआ ?

हो जाएगा अगर आप थोड़ा वक्त निकाल ले तो। कुसुम ने कहा।

क्या हो जाएगा भागवान बताओ तो सही।

मेरे बेटे की शादी। उसकी दुल्हन घर आ जाए अगर आप अपने काम से थोड़ा सा वक्त निकाल लें।

अरे इस काम के लिए तो मेरे पास वक्त ही वक्त है।

तो फिर ठीक है मंगलवार को हम पास के गांव में जाएंगे वहां के पूर्व प्रधान की लड़की है उमा। बहुत अच्छी लड़की है। मेरे भाई के ससुराल के पास ही उसका घर है। उन्हीं लोगों ने बताया कि वो लड़की हमारे शंकर के लिए बहुत अच्छी रहेगी। तो मैं सोच रही हूं कि एक बार हम चलकर देख आते हैं लड़की अच्छी लगी तो रिश्ता पक्का कर आएंगे।

ठीक है मंगलवार को मैं खेत पर नहीं जाउंगा हम गांव चलेंगे।

इस बीच शंकर ने कहा- हम कह रहे हैं हम शादी नहीं करेंगे।

चुपकर सारा जीवन अपनी भाभी से ही काम कराएगा क्या। अरे मुझे भी तो कोई चाहिए ना। मेरे भैया खेत चले जाते हैं तू दिन भर काम करता है मैं किससे बात करूं। मेरे काम में भी हाथ बंटा देगी तेरी दुल्हनिया।

पर भाभी...

चुपकर मैंने कहा ना। अब तेरी दुल्हनिया आएगी घर में ये मेरा और तेरे भैया का फैसला है।

शंकर इसके बाद कुछ नहीं बोलता है और चुपचाप खाना खाने लगता है। कुछ देर के बाद सभी सोने के लिए चले जाते हैं।

कुसुम ने हरी से कहा- मेरे भाई ने पता किया था लड़की बहुत अच्छी है और हमारे शंकर के साथ उसकी जोड़ी भी खुद जमेगी। पंचायत के पूर्व प्रधान है उसके पिताजी तो शादी भी अच्छे से हो जाएगी। उनका कहना है कि इकलौती लड़की है इसलिए कोई अच्छा घर देख रहे हैं। हमारे शंकर से अच्छा लड़का उन्हें कहा मिलने वाला है।

हां, शंकर तो बहुत सीधा लड़का है। बस लड़की उसे संभालने वाली मिल जाए तो मेरी काफी चिंता कम हो जाएगी। हरी ने कुसुम की बात का जवाब देते हुए कहा।

मैंने तो तय कर लिया है कि उमा को ही अपनी देवरानी बनाकर लाउंगी। कुसुम ने कहा।

एक बार उनके घर चलकर बात कर लेते हैं फिर जैसी बात होगी उस हिसाब से तय कर लेंगे। हरी ने फिर कहा।

मेरे भाई ने वैसे तो सारी बात कर ली है वो लोग तैयार भी है। बस हमें उनसे मिलना है। कुसुम ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा।

ठीक है तो चलते हैं और मिल आते हैं- हरी ने कहा।

आने वाली ठंड में दोनों की शादी कर देंगे।

हां यही ठीक रहेगा। तब दूसरी फसल भी तैयार हो जाएगी तो कुछ रूपया भी हमारे हाथ में होगा।

रूपए की चिंता आप मत कीजिए। मैंने कुछ रूपए जोड़कर रखे हैं, उनसे नई दुल्हन के लिए गहने बन जाएंगे। प्रधान जी से कुछ मदद ले लेंगे तो शादी ही निपट जाएगी। कुसुम ने अपनी बात खत्म की।

ठीक है पहले बात करके आते हैं फिर आगे के बारे में सोचेंगे। हरी ने अपनी बात कही। इसके बाद दोनों सो गए।

करीब एक महीना गुजर गया था। गांव के कुछ किसान पास के एक शहर में बीज और खाद लेने जा रहे थे। उन्होंने हरी से पूछा तो उसने भी उनके साथ जाने की रजामंदी दे दी। यह बात हरी ने कुसुम को बता दी। जिस दिन सभी किसान शहर जाने वाले थे उससे कुछ रोज पहले सुखराम काका हरी के पास आए और वो उसे अपने साथ दूसरे शहर लेकर जाना चाहते थे। क्योंकि वहां उनकी कुछ अनाज की बोरी उतारकर चढ़ाना थी। हरी ने जाने में असमर्थता जताई तो सुखराम काका थोड़ा दुखी हो गए। फिर उन्होंने हरी से शंकर को ले जाने के लिए कहा। पहले हरी ने मना कर दिया कि शंकर भी चला जाएगा तो कुसुम घर में अकेली रह जाएगी। तो सुखराम काका ने कहा कि कुसुम तेरी काकी यानि कि उनके घर पर रह जाएगी। वैसे भी एक दिन जाना है और दूसरे दिन उन्हें वापस आ जाना है। सिर्फ एक रात की बात है तो कसुम उनके घर पर रूक जाएगी। इस पर हरी ने हां कह दिया। शंकर और हरी को जाने में अभी सात दिन का समय बाकि था।

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