Prem Ratan Dhan Payo - 45 in Hindi Fiction Stories by Anjali Jha books and stories PDF | Prem Ratan Dhan Payo - 45

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Prem Ratan Dhan Payo - 45





सुबह का वक्त , रघुवंशी मेंशन

सुबह जब धूप की किरणें राघव के चेहरे पर पडी तो उसकी नींद टूट गयी । जानकी किसी बच्चे की तरह उसके कंधे पर सर रखकर सो रही थी । उसने अपने दोनों हाथों से राघव की बांह पकड रखी थी । राघव ने आस पास नजरें घुमाई , तो देखा सुबह हो चुकी थी और वो छत पर ही सो चुका था । धूप की वजह से जानकी की भी नींद टूट गयी । खुद को जब उसने राघव के इतने करीब पाया , तो तुरंत उससे एक फासला बनाते हुए दूर हो गयी । जानकी अपना दुपट्टा संभालते हुए उठ खडी हुई । " सॉरी हमें पता नही चला हम कब यहां सो गए । " इतना बोल जानती भागती हुई वहां से चली गई । इससे पहले राघव कुछ कहता जानकी वहां से जा चुकी थी । राघव भी उठकर नीचे चला आया । इस वक्त सुबह के छः बज रहे थे , इसलिए कोई भी जगा नही था । राघव अपने रूम में चला गया ।

जानकी तैयार होकर नीचे आई । पहले उसने पूजा खत्म की और फिर किचन में चली आई । वो ज्यादा जल्दी आ गयी थी , इसलिए वहां सिवाय उसके और कोई नही था । जानकी ने परी के लिए नाश्ता तैयार किया । करूणा उठ चुकी थी । हाॅल में आते हुए उसने संध्या को आवाज लगाई । संध्या हमारी चाय । "

जानकी ने सुना तो खुद से बोली " संध्या तो अभी तक आई नही । पता नही आज क्यों देर हो गयी । एक काम करती हूं मैं ही भाभी मां के लिए चाय बना देती हूं । " ये सब खुद से कहते हुए जानकी ने पतीले में पानी चढ़ाया । कुछ ही देर में वो चाय बनाकर बाहर चली आई ‌‌। " भाभी मां चाय "

करूणा उसके हाथों से कप लेते हुए बोली " जानू आप क्यों चाय लेकर आई संध्या कहा हैं ? "

" वो अभी नही आई भाभी मां , हम किचन में थे तो सोचा हम ही आपके लिए चाय बना देते हैं । "

करूणा मुस्कुराते हुए चाय पीने लगी । एक घूंट अन्दर जाते ही उसने आंखें मूंद ली । " करूणा मुस्कुराते हुए बोली " सचमुच जानू मैंने आज से पहले ऐसी चाय कभी नही पी । बहुत अच्छा चाय बनाती हो आप । " जानकी उसकी बातों पर मुस्कुरा दी । करूणा का ध्यान घडी पर गया जिसमें सात बज रहे थे । करूणा जानकी से बोली " संध्या अभी तक नही आई । जानू देवर जी का भी कॉफी पीने का वक्त हो गया हैं । क्या आप उनके लिए कॉफी बना दोगी ? "

करूणा के ये कहते ही जानकी सोच में पड गयी । उसे इस तरह खोए हुए देख करूणा बोली " क्या हुआ जानू ? "

जानकी सिर झुकाकर बोली " हम कॉफी तो बना देंगे , लेकिन वो ..... जानकी बस इतना ही कह पाई थी की तभी करूणा बोली " चिंता मत करो देवर जी नाराज़ नही होंगे । " जानकी उसकी बातों पर हामी भरकर किचन में चली गई । जानकी ने राघव के लिए कॉफी रेडी की और उसे देने उसके कमरे में चली आई । उसने दरवाज़ा नोंक किया । नीचे आने के बाद राघव सो गया था । बैठे बैठे बेचारे की कमर जो अकड गयी थी । राघव इस वक्त बेड पर सो रहा था । जैसे ही दरवाजा नोंक करने की आवाज राघव के कानों में पडी तो उसने करवट बदल ली " कम इन "

राघव के ये कहते ही जानकी अंदर चली आइ । पायलो की आवाज राघव के कानों में पडी , तो उसने आंखें खोल ली । जब से जानकी इस घर में आई थी , तब से ये आवाजें हवेली में गूंजने लगी थी । धीरे धीरे राघव भी इस आवाज को पहचानने लगा था । वो पेट के बल लेटा हुआ था । उसने एक बार भी मुड़कर जानकी की ओर नहीं देखा । जानकी टेबल पर कॉफी का कप रखते हुए बोली " राघव जी आपकी कॉफी । " उसकी आवाज सुनने के बाद ही राघव ने उसकी ओर देखा । बिखरे बाल चेहरे पर घिर आने के कारण वो काफी क्यूट लग रहा था । जानकी की पलकें झुकी हुई थी । अंदर से डर भी रही थी की राघव उसे कुछ सुना न दे । राघव उठकर बैठ गया । उसने उसे जाने के लिए नही कहा बस चुपचाप टेबल से कप उठाकर कॉफी पीने लगा । जानकी चोर नज़रों से उसे देख रही थी । जब राघव उसकी ओर देखता वो झेंप जाती ।

राघव ने कॉफी खत्म की और उसकी तरफ खाली कप बढ़ाकर कहा " तुम जा सकती हो । " शब्द बेहद ही सरल थे । न तीखापन न अपना पन । जानकी के मन में ढेरों सवाल उठ रहे थे । " न तो मेरे कॉफी को खराब कहा और न ही तारीफ की । इन्हें मैं काम्पलीकेटेड कहु तो गलत नही होगा । " जानकी ने अपने सवालों को विराम दिया और खाली कप लेकर जाने लगी । वो दरवाजे तक पहुंची ही थी , की तभी पीछे से राघव की आवाज आई ‌‌। " मुझे हर सुबह इसी वक्त यही कॉफी चाहिए वो भी तुम्हारे हाथों से । " राघव ये बोलकर वाशरूम में चला गया ।

" जानकी ने फिर खुद से सवाल किया " ये मेरी सजा हैं या फिर मेरे कॉफी की तारीफ । " ये बोल जानकी ने पीछे पलटकर देखा तो राघव वहां नही था । जानकी भी कमरे से बाहर चली गई । जानकी किचन में आई तो उसे संध्या दिखाई दी । जानकी ने खाली कप सिंक के पास रखा और उससे पूछते हुए बोली " कहां थी तू अब तक और तुझे आने में इतनी देर क्यों हो गयी ? "

" आज मेरी नींद जल्दी खुल गयी थी इसलिए मंदिर चली गई । बस वही से लौटने में देरी हो गयी । वैसे तू राघव भैया के कमरे में कॉफी लेकर गयी थी न । उन्होंने कही डांटा तो नही । "

जानकी सिंक में पडे बर्तनों को साफ करते हुए बोली " मैंने कौन सी गलती कर दी जो वो मुझे डाटेंगे और वैसे भी वो बस बाहर से सख्त दिखते हैं । अंदर से वैसे बिल्कुल नही हैं । "

संध्या मुस्कुराते हुए बोली " बडी जल्दी जान गयी भैया को । चलो तुमने भैया को रावण से राम तो समझा । " जानकी भी उसकी बातों पर मुस्कुरा दी । दोनों बातें कर ही रहे थे की तभी उन्हें बाहर से कुछ शोर सुनाई दिया । दोनों किचन से निकलकर बाहर चली आई ‌‌। बाहर कुछ लोग हॉल में खडे थे और एक लडकी करूणा से बाते कर रही थी ।

जानकी उन्हें देखते हुए संध्या से बोली " क्या ये सब समायरा के दोस्त हैं ? "

" शायद वही हैं । मैं सबको तो नही जानती ‌‌वो जो भाभी से हाथ मिला रही हैं न वो समायरा की खास दोस्त है कीर्ति । " संध्या ने कहा ।

" तो इनमें से समायरा कौन हैं ? "

" कोई भी नही । " संध्या ने कहा तो जानकी उसकी ओर देखने लगी । राघव भी नीचे आ चुका था । कीर्ति हाथ हिलाते हुए बोली " हाय राघव " ।

राघव ने कोई जवाब नही दिया बस हल्की सी स्माइल पास कर दी । कीर्ति अपने दोस्तों से बोली " हे गाइज ये हैं हमारे समायरा के होने वाले पती मिस्टर राघव सिंह रघुवंशी । " ये कहकर कीर्ति राघव को सबसे मिलवाते हुए बोली " राघव ये हमारे फ्रेंड्स हैं ज्योति , तानिया , अखिल एंड ऋषभ ..... ऋषभ मेरा कजिन हैं ।‌ वो भी हमारे साथ दिल्ली घूमने गया था । हम लोग उसे फोर्स करके यहां ले आए । "

समायरा के सारे दोस्तों ने राघव से हाथ मिलाया । राघव ने भी फारमेलिटि पूरी की । जानकी का ध्यान सीढ़ियों के ऊपर खडी परी पर गया , जो हाथों में छोटे से मंकी को पकडे दूसरे हाथ से आंखें मींच रही थी । जानकी उसके पास चली गयी और उसे गोद में उठाकर सीढ़ियां उतरने लगी । इसी बीच बाकी सबकी नजरें उसपर पडी । कीर्ति करूणा से बोली " भाभी मैं तो इस घर में सबको जानती हूं लेकिन आज से पहले इस लडकी को यहां कभी नही देखा । "

" ये हमारी परी की नयी केअर टेकर हैं जानकी । महिना भर हुआ हैं इन्हें काम संभाले । "

सब लोग नोर्मल थे लेकिन ऋषभ की नजरें बस जानकी पर ठहरी हुई थी । उसके बगल में खडे अखिल ने उसे कोहनी मारते हुए कहा " आंखें नीची करो उसे नजरों से खाने का इरादा हैं क्या ? " उसके ये कहते ही ऋषभ झेंप गया ।

करूणा कीर्ति से बोली " समायरा आप लोगों के साथ नही आई । कहां हैं वो ? "

" वो क्या हैं न भाभी कुछ जरूरी काम आ पडा था , इसलिए वो दिल्ली में ही रूक गयी । वैसे भी हफ्ते भर बाद हौली हैं वो तब तक पहुंच जाएगी । " कीर्ति ने कहा ।

करूणा संध्या को आवाज लगाते हुए बोली " संध्या ज़रा सुरेश से कहो इन सबके लिए जल्दी से रूम तैयार करे । "

" जी भाभी ये बोल संध्या वहां से चली गई । सब लोग हॉल में बैठकर ही बाते करने लगे । जानकी परी से बोली " क्या आपने ब्रश किया ? "

परी ने तुरंत न में सिर हिला दिया । जानकी उसे वापस उसके कमरे में ले जाते हुए बोली " चलिए हम आपको पहले तैयार करते हैं फिर नाशता करेंगे । आज आपके लिए यममी और ब्यूटीफुल सा नाश्ता तैयार किया है । "

" सच्ची लेकिन क्या बनाया हैं आपने ? "

" वो हम आपको ऐसे नही बताएंगे । वो आपको खाकर टेस्ट करके बताना पडेगा । " जानकी परी से बाते करते हुए सीढ़ियों से ऊपर जा रही थी । वही ऋषभ की नजरें सिर्फ़ और सिर्फ़ उसका पीछा कर रही थी ।

कुछ ही देर में उन सभी का रूम रेडी करवा दिया गया । सुरेश ने उन सभी का सामान उनके कमरो में रखवा दिया । सब लोइ एक साथ नाश्ते की टेबल पर मिले । जानकी भी परी को तैयार कर नीचे ले आई थी । जानकी ने परी को राघव के बगल वाली चेयर पर बिठाया और खुद उसके साइड वाली चेयर पर बैठ गयी ।

" जानू बताओ न आपने मेरे लिए कौन सा यममी वाला नाश्ता बनाया हैं । " परी के ये कहने पर जानकी ने उसका नाश्ता उसके प्लेट में सर्व किया । परी उसे देखते हुए बोली " ये तो बहुत ब्यूटीफुल हैं क्या हैं ये ? "

" मैं ऐसे केसे नाम बता दू आप टेस्ट करके बताइए । " ये कहते हुए जानकी ने उसे थोडा सा खिलाया । जानक ने जब उससे पूछा की उसे कैसा लगा तो परी परी बोली " सब यममी.... ये क्या हैं ? "

जानकी हंसते हुए बोली " आपको अभी भी नही पता चला । ये उपमा हैं । "

" ऊं .... " परी ने ऊं शब्द थोडा लंबा खींचा क्योंकि उपमा शब्द उससे बोला नही जा रहा था । जानकी उसे पानी पिलाते हुए बोली " आप रहने दीजिए । हम बाद में प्रेकटिस करेंगे फिर आपको इसका नाम याद हो जाएगा । अभी आप पहले नाश्ता फिनिश कीजिए । ' ये बोल जानकी उसे खिलाने लगी । बाकी सब अपने खाने में व्यस्त थे , लेकिन ऋषभ का ध्यान खाने पर नही सिर्फ और सिर्फ जानकी पर था । उसका हंसना , बाते करना , उसकी आवाज सब कुछ उसे बहुत प्यारा लग रहा था ।

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रात का वक्त , ठाकुर भवन




आज कुंदन का जन्मदिन था जो की हमेशा खास तरीके से मनाया जाता था । नारायण जी आज के दिन अपने बेटों को किसी चीज की रोक टोक नही करते थे । इसलिए वो अपने कमरे में चले गए । दिशा इस शोर शराबें से हमेशा दूर ही रहती थी , इसलिए वो अपने कमरे में ही बंद रही । हवेली के अंदर कोई शोर शराबा न हो इसलिए पार्टी हवेली के पिछले हिस्से में रखी गयी थी । रागिनी और उसके साथ नाचने गाने वाली लड़कियों का ग्रू्प आया हुआ था ।

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समायरा के दोस्तों से मुलाकात हो गयी । कुछ वक्त बाद उससे भी हो जाएगी अब राघव और जानकी के बीच ये कौन सी बला हैं ?

ऋषभ की नजरें बार बार जानकी पर जा रही हैं ? आखिर उसके इरादें क्या हैं ? कही उसे जानकी पसंद तो नहीं आ गयी ? अगर ऐसा हुआ तो उसका क्या होगा ? कही कैमिस्ट्री बनते बनते न बिगड जाए । आगे जानने के लिए जरूर पढ़िए मेरी नोवल तब तक के लिए इजाजत दीजिए कल मिलेंगे नये एपिसोड के साथ

प्रेम रत्न धन पायो

( अंजलि झा )


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