Prem Ratan Dhan Payo - 48 in Hindi Fiction Stories by Anjali Jha books and stories PDF | Prem Ratan Dhan Payo - 48

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Prem Ratan Dhan Payo - 48






जानकी की नजर परी पर गयी , जो सबको उसके पास देखकर जेलेस फील कर रही थी । जानकी उसके पास आई और उसके गालों को चूमते हुए बोली " जानू सिर्फ आपकी हैं बाकी सबके लिए वो डुबलिकेट कॉपी । जाइए जाकर पढ़ाई कीजिए हम दोपहर में आपको लेने आएंगे । " परी मुस्कुराकर अपने दोस्तों के साथ वहां से चली गई ।

राघव दूर खडा ये सब देख रहा था । जानकी वापस गाडी में चली आई । राघव उसे लेकर हवेली के लिए निकल गया ।

राघव के फ़ोन की रिंग बजी तो उसने गाडी साइड में रखी । फोन दीपक का था । राघव ने जैसै ही फोन रिसीव किया दूसरी तरफ से दीपक ने कहा " सर क्या आप कुछ देर के लिए कंस्ट्रक्शन साइट पर आ सकते हैं । यहां वर्कर्स के बीच थोडी सी मिस अंडरस्टैंडिंग हो गयी हैं । "

" क्या तुम लोग इतनी सी बात नही संभाल सकते । "

" सर हमने कोशिश की लेकिन ज्यादा वक्त लगाया , तो सिचुएशन आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगी । " दीपक के ये कहते ही राघव बोला " ठीक हैं मैं अभी आता हु । " इतना बोलकर राघव ने फ़ोन काट दिया । उसने जानकी की ओर देखा जो उसी को देख रही थी । कुछ पल ठहरकर जानकी ने पलकें नीची कर ली । " क्या कोई परेशानी है । "

जानकी के ये कहते ही राघव बोला " मुझे जरूरी काम से निकलना पडेगा । इफ यू डोंट माइंड कुछ टाइम के लिए मेरे साथ चलोगी । काम जल्दी खत्म कर मैं तुम्हें घर ड्रोप कर दूंगा । "

" आपको परेशान होने की जरूरत नही हैं ‌‌। आप मुझे यही उतार दीजिए मैं घर चली जाऊंगी । "

" बिल्कुल नही ... ' राघव स्टेयरिंग पर पकड बनाते हुए बोला " मैं तुम्हें अपने साथ लेकर आया हु । तुम मेरी रिस्पोंसिबिलिटी हो । "

जानकी ने आगे कुछ नहीं कहा क्योंकि राघव की बात टालकर वो उसके गुस्से को हवा नही देना चाहती थी । राघव ने गाडी आगे बढ़ा दी ।

राघव उसी कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंचा , जहां महीने भर पहले हादसा हुआ था हालांकि बाद में सिचुएशन को संभाल लिया गया । राघव और जानकी दोनों गाड़ी से बाहर आए । काम इस वक्त रूका पडा था और मजदूरों की भीड़ इकट्ठा थी । दीपक फौरन उसके पास चला आया । वो जैसे ही राघव से कुछ कहने को हुआ की तभी उसके साथ जानकी को देख रूक गया ‌‌।

" व्हाट हैपन .... तुम कुछ बोलोगे । " राघव कि आवाज दीपक के कानों में पडी , तो उसका ध्यान वापस से उसपर गया । दीपक उसे बताते हुए बोला " सर अचानक से ही सारे मजदूरों ने काम छोड दिया ‌‌। हमने वजह पूछी तो कोई कुछ कहने को तैयार ही नही है । बार बार यही कह रहै हैं की सरकार को बुलाइए हम उन्हीं से बात करेंगे । अगर सिचुएशन इतनी खराब नही होती तो आपको बुलाना नही पडता । " राघव ने आंखों से सन ग्लासेस हटाया और एक कोल्ड एक्सप्रेसन के साथ चारों ओर नजरें दौड़ाकर सबको देखने लगा । वो मजदूरों की तरफ चल दिया । अमित और जानकी भी उसके पीछे चल दिये । राघव जैसे ही मजदूरों के पास पहुंचा तो वो सभी उठ खडे हुए ।

राघव उन सबको देखते हुए बोला " आखिर क्या समस्या है जो आप सभी ने काम बीच में रोक दिया । मैं आ गया हु आप लोग खुल कर अपनी परेशानी मुझे बता सकते हैं । '

" सामने खडे लोग आपस में ही बाते कर रहे थे । शायद किसी बात पर निर्णय ले रहे थे । उन्होंने एक उम्रदराज बुजुर्ग को आगे कर दिया । व़ह व्यक्ति हाथ जोडते हुए राघव से बोला " सरकार वैसे तो आपसे दूसरी कोई शिक़ायत नहीं । हमे बस एक परेशानी है । यहां काम करने वाली महिलाओं को काम के साथ साथ अपने छोटे बच्चों को भी संभालना पडता हैं । काम के वक्त वो घर पर बच्चों को अकेला भी नही छोड सकती । उनके लिए आप कोई समाधान निकाल सके तो बडी कृपा होगी । "

राघव ने ध्यान से उनकी बात सुनी । इसी बीच जानकी आगे आई और उस बुजुर्ग व्यक्ति से बोली " आप चिंता मत कीजिए काका ....... आपने बिल्कुल सही मांग की हैं । कार्यस्थल पर महीला मजूदूरो के लिए क्रेच व डे केयर जैसी सुविधा का होना अनिवार्य हैं । ये एक कानूनी अधिकार है । क्रेच यही भवन निर्माण के आस पास ही बनाया जाता हैं जिसमें काम कर रही महिलाए अपने बच्चों को छोड सकती हैं । वहा मौजूद टीचर उनकी पूरी देखभाल करती है । उनके पोषक आहार , टीकाकरण , शिक्षा , और शारिरिक व मानसिक विकास का बराबर ध्यान रखती हैं । अगर ऐसी सुविधाएं नही हैं तो मजदूर इसकी मा़ग कर सकते हैं । " वो बूढा व्यक्ति जानकी की ओर देख रहा था । किसी ने आगे बढ़कर उसकी बात समझी तो सही इस बात की खुशी उसके चेहरे पर नज़र आ रही थी ।

राघव ने दीपक को आवाज दी तो वो आगे चला आया । " जी सर "

" यहां इस तरह की फैसिलिटी मौजूद नही हैं , इसकी जिम्मेदारी किसे सौंपी थी तुमने ? "

" सर सुपर वाइजर को " दीपक ने कहा ।

" पहले उसे वार्निंग दो दोबारा ऐसी लापरवाही नही होनी चाहिए और जल्द से जल्द मजदूरों की मांग पूरी की जाए । " राघव की बात पर दीपक ने हा में सिर हिला दिया ।

राघव मजदूरों से बोला " आप अपनी समस्या यहां किसी से भी कह सकते हैं । आपको डरने की जरूरत नही हैं । आप लोग वापस अपने काम पर जाइए । "

सभी मजदूर राघव का धन्यवाद कर वहां से जाने लगा । वो बूढा व्यक्ति जानकी के पैरों में झुकने लगा तो जानकी ने फोरन उसे पकड़ लिया । " काका ये आप क्या कर रहे हैं ? "

" हमारे लिए तो तुम देवी स्वरूप हो बिटिया । '

" लेकिन काका मैंने तो कुछ भी नही किया । जो आपका हक था वो बताया । आप मेरे पिता समान हैं प्लीज मेरे पांव छूकर मुझे शर्मिंदा मत कीजिए । हो सके बेटी समझकर आशिर्वाद दे दीजिए । "

वो बूढा आदमी मुस्कुराते हुए बोला " वो तो हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा बिटिया । भगवान तुम्हें हमारी भी उम्र दे दो । " ये बोल वो बूढा व्यक्ति आगे बढ गया । दीपक अपने मन में बोला " इनके पास उम्र ही कितनी बची हैं जो ये बाट रहे हैं ‌‌। "

जानकी पीछे की ओर पलट तो राघव को देखकर उसने थोडा डर का अनुभव किया । राघव के चेहरे पर इस वक्त कोई एक्सप्रेसन नही थे । जानकी धीरे से बोली " हमे जो सही लगा सो हमने कह दिया । अगर हमारी बात आपको बुरी लगी हो तो हम माफ़ी चाहतें हैं । "

राघव उसकी बातों को इग्नोर करते हुए बोला " घर चले । " जानकी ने हां में अपना सिर हिला दिया । वो कुछ कदम आगे बढी ही थी , की पत्थर से उसका पैर टकराया । इससे पहले गिरती राघव ने उसकी कलाई पकड अपने करीब खींच लिया । डर और घबराहट के भाव जानकी के चेहरे पर झलकने लगे । उसकी एक कलाई राघव के हाथ में थी और दूसरा हाथ राघव के सीने पर । राघव ने एक हाथ में उसकी कलाई को पकडा हुआ था और दूसरा हाथ उसकी कमर पर था । बेशक वो उसके करीब थी । राघव उसे देखते हुए बोला " जल्दबाजी किस बात की हैं , संभलकर चलना चाहिए था न । "

" वो .... वो .... जानकी कुछ कह नही पाई बस नजरें झुका ली उसने । खूला माहौल था । दूर खडे लोगों की नज़रे उन पर चली ही गयी । जानकी धीरे से बोली " हमे छोडिए सब लोग देख रहे हैं । " जानकी के ये कहते भी राघव ने नजरें घुमाई । वाकई सबकी नजरें उनकी ओर थी । राघव ने उसका हाथ छोड़ा और कुछ कदम दूर हट गया ।

जानकी अपना दुपट्टा ठीक करते हुए जाने के लिए मुडी तो पैरों में उसने दर्द का अनुभव किया । जानकी ने नीचे की तरफ देखा , तो पाया उसके अंगूठे से खून रिस रहा था । जानकी उसे इग्नोर कर आगे बढ गयी , लेकिन उसके कदम लडखडा रहे थे । राघव ने जब नीचे देखा तो जमीन पर कुछ खून की बूदे थी । इसी के साथ ही राघव की नज़र उसके पैरों पर गयी । " कमाल की लडकी हैं क्या इसे दर्द नही हो रहा ? " राघव तेज कदमों के साथ उसके पास चला आया । राघव ने उसे गोद में उठाया तो जानकी का मूंह खुला का खुला रह गया । " ये आप क्या कर रहे हैं ? मुझे नीचे उतारिए यहां सब देख रहे हैं । " राघव ने उसकी बातों का कोई जवाब नही दिया जिस बात से जानकी और ज्यादा चिढ गयी । राघव ने एक आदमी को कुर्सी लाने के लिए कहा । वो फौरन भागकर चेयर ले आया ‌‌। राघव ने जानकी को नीचे बिठाया और खुद घुटने के बल नीचे बैठ गया । एक बार फिर राघव ने उसे चौंका दिया । उसने जानकी के पैरों को छूने के लिए अपना हाथ बढाया , तो जानकी ने अपने पैर पीछे कर लिए । राघव उसकी ओर देखकर सख्ती से बोला ' तुम्हारे पैरों से खून रिस रहा है । पैर आगे करो अपने ‌‌। "

" नही आप हमारे पांव मत छुइए ।"

" पर क्यों .... ? "

" वो ..... जानकी बस इतना कहकर चुप हो गयी क्योंकि आगे समझ नहीं आया वो क्या कहे ?

राघव ने अपने जेब से रूमाल निकाला और जबरदस्ती उसका पैर आगे कर बांधने लगा । इनकार का कोई फायदा नही था । जानकी चुपचाप बैठी रही । रूमाल बांधने के बाद राघव उठ खडा हुआ । वो जानकी को उठाने के लिए उसकी ओर झुका तो जानकी उसे रोकते हुए बोली " नही मैं खुद चल लूगी । "

" तुम लड़कियों को नाटक करना अच्छा लगता है क्या ? बट सॉरी मेरे पास बर्बाद करने के लिए वक्त नहीं है । " ये बोल राघव ने उसे बाहों में उठा लिया और गाडी की तरफ बढ गया । दीपक जैसे ही गाडी के पीछे का डोर खोलने लगा राघव ने इशारें से मना कर दिया । दीपक ने हां में सिर हिलाया और आगे का डोर खोलकर खडा हो गया । जानकी ने ये सब देखा उसकी हैरान नजरें राघव पर ही थी । राघव दूसरी तरफ से गाडी में आकर बैठ गया । वो अपनी सीट बेल्ट लगाते हुए बोला " माना की ड्राइव में करने वाला हू लेकिन तुम्हारा ड्राइवर नही हु , इसलिए आगे बिठाया । " जवाब सुनकर जानकी ने नजरें फेर ली और कुछ न बोली । राघव उसे देखते हुए फिर से बोला " अगर तुम सीट बेल्ट लगाओ तो मैं गाडी स्टार्ट करू । " जानकी ने जब ये सुना तो तुरंत हड़बड़ाहट में सीट बेल्ट लगाने लगी । लाख कोशिशों के बावजूद भी उससे सीट बेल्ट नही लग पा रही थी । राघव ने जब उसे परेशान देखा तो उसकी ओर झुक गया । राघव को इस तरह इतने करीब देखकर जानकी चौंक गयी । वो पूरी तरह से सीट से लग चुकी थी । आंखें हैरानी से बडी हो गयी , जो उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी । उसकी दिली धड़कनें इस कदर बढ गयी थी की उनका शोर राघव के कानों तक पहुंच रहा था । उसकी चढती उतरती सांसे इसकी गवाही दे रही थी । राघव की नजरें सिर्फ़ उसके चेहरे पर थी । बडी बडी आंखें किसी को भी खुद में समा ले । भला कोई रोके भी तो खुद को कैसे ? उसके करीब होने पर राघव भी बहुत कुछ अलग महसूस कर रहा था । उसने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा और सीट बेल्ट लगाकर अपनी जगह पर वापस बैठ गया । उसके दूर जाते ही जानकी ने एक गहरी सांस ली और अपनी आंखें बंद कर ली । उसकी इस हरकत पर न जाने क्यों राघव को हंसी आ गई । राघव ने गाडी स्टार्ट कर आगे बढा दी ।

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क्या राघव और जानकी के बीच की दूरिया मिट रही हैं । प्यार का एहसास इन्हें छूकर गुजर रहा है । कैसे ये इस बात का अंदाजा लगाएंगे ? क्या अपनी फीलिंग्स को ये समझ पाएंगे ? कितना आसान होगा ये सब ?

कुछ ही तो पल साथ बिताए थे और वो दर्द का एहसास दे गया । आगे क्या होने वाला है इनकी प्रेम कहानी में ये जानने के लिए पढना न भूलें

प्रेम रत्न धन पायो

( अंजलि झा )


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