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लोमड़ी का मकसद

छोटे से कस्बे के बस अड्डे के पास बहुत बड़ा और खूबसूरत बाजार था।
उस बाजार में एक लोमड़ी रहती थी, उस लोमड़ी को बाजार के दुकानदार बाजार में सामान खरीदने आने वाले ग्राहक बहुत प्यार करते थे। इस बस के बड़े बाजार में लोमड़ी को खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी, फिर भी लोमड़ी कुछ दिनों से अपने जीवन से निराश और उदास हो गई थी, क्योंकि वर्षों से लोमड़ी की मुलाकात किसी भी जानवर से नहीं हुई थी।

इस वजह से एक दिन लोमड़ी अपना दिल बहलाने के लिए कहीं घूमने की योजना बनाती है और बस अड्डे के बाजार से कहीं खूबसूरत जगह घूमने जाने से पहले अपने थैले में खाने-पीने का सामान रख लेती है जैसे नमकीन मीठे बिस्कुट दूध ब्रेड मक्खन फल फलों का जैम आदि।

और बहुत दूर तक पैदल चलने के बाद लोमड़ी को एक गांव के पास वाले जंगल में बहुत तेज प्यास लगती है, इसलिए पहले लोमड़ी अपने खाने थैला झाड़ियां के पीछे छुपाती है और फिर अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर तालाब झरना या नदी ढूंढती है, तो उसे दूर तक कोई तालाब झरना नदी दिखाई नहीं देती है।

तभी उसकी नजर एक आम के पेड़ पर जाती है, उस आम के पेड़ पर एक बंदर का बच्चा चढ़ा हुआ था, वह ऊपर से पके पके आम तोड़कर जमीन पर फेंक रहा था, उन पके हुए आमो को नीचे एक भालू का बच्चा इकट्ठा कर रहा था।

लोमड़ी ने बहुत दिनों के बाद जानवर देखे थे, इसलिए वह बहुत खुश हो जाती है और प्यार से उनके पास जाकर पूछती है? "मुझे बहुत तेज प्यास लगी है, यहां आस-पास कहीं शुद्ध ठंडा मीठा पानी पीने के लिए मिलेगा है।"

लोमड़ी को देखकर बंदर का बच्चा भी आम के पेड़ से नीचे उतरकर लोमड़ी के पास आ जाता है और जब लोमड़ी बार-बार उनसे अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी के बारे में पूछती है, तो वह दोनों बच्चे लोमड़ी को जवाब देने की जगह लोमड़ी के साथ शरारत करने लगते हैं।

बंदर का बच्चा आम खाकर गुठली लोमड़ी के आगे फेंकने लगता है और भालू का बच्चा अपनी दोनों टांगें खोलकर टांगों के बीच में से उल्टा झांक कर अपनी लाल लाल जीव निकाल कर लोमड़ी को चिढ़ता है।

उनकी इस शरारत पर लोमड़ी को क्रोध नहीं आता है, बल्कि उसे हंसी आती है।

उसी समय गांव की गाय भैंसों का झुंड वहां से गुजरता है, तो गाय भैंसों के झुंड में से एक गाय लोमड़ी को भालू बंदर के बच्चों के साथ लोमड़ी को बात करते हुए देखकर लोमड़ी के पास आकर पूछती है? "आप इनसे क्या पूछ रही हैं।"

तब लोमड़ी मुस्कुरा कर गाय से बोलती है "यह दोनों बच्चे शरारती होने के साथ-साथ बदतमीज भी हैं, मैं इनसे पानी पीने के लिए कोई तालाब झरना या नदी के बारे में पूछ रही हूं, यह जवाब देने की वजह मुसझे बदतमीजी कर रहे हैं।"

"तुम हमारे साथ चलो हम सब गाय भैंस नदी पर नहाने और ठंडा ठंडा पानी पीने जा रही है। मैं चलते-चलते इन दोनों बच्चों के बारे में तुम्हें बताती हूं।" गाय ने बोला

फिर गांव की गाय लोमड़ी को बताती है "यह दोनों बच्चे पहले ऐसे नहीं थे, एक दिन इनके माता-पिता की मृत्यु के बाद दूसरे जंगल से दो आवारा बिल्लियां आई थी, उन बिल्लियों की संगत से यह बच्चे शरारती और बदतमीज आवारा हो गए हैं।

"एक बार उन बिल्लियों ने गांव के किसी मकान की छत से रस्सी पर सूकते हुए दो लाल कपड़े चुराकर बंदर और भालू के बच्चे के गले में बांधकर इन दोनों बच्चों को उस रास्ते पर खड़ा कर दिया था, जहां से खट्टा कट्टा झगड़ालू सांड गुजर रहा था, जब सांड की नजर इन दोनों बच्चों पर नहीं पड़ी तो दोनों बिल्लियों ने सीटी मार कर इन दोनों बच्चों को सांड को दिखाया था, जब लाल कपड़ा देखकर सांड इनको टक्कर मारने उनकी तरफ दौड़ा तो उसी समय जंगली भैंसों का झुंड वहां आ गया और उन्होंने जंगली सांड को टक्कर मार मार कर जंगल से दूर भगा दिया था। यह दोनों भालू बंदर के बच्चे उछल कर भैंसों की पीठ पर बैठ गए थे।

"और एक बार यह दोनों जंगली बिल्लियां इन दोनों भालू बंदर के मासूम बच्चों को अपने जंगल खेलने के लिए साथ ले गई थी और जब जंगल में खेलते खेलते रात हो गई तो अपने जंगल की सड़क के किनारे अंधेरी रात में भालू बंदर के बच्चों को छोड़कर अपने जंगल में भाग गई थी। यह दोनों बच्चे रोड के किनारे बैठ कर गाड़ी मोटरों के हॉन और रोशनी से रात भर डर-डर कर रोते रहे थे।

और सुबह हमारे जंगल का गधा चाचा जो रोज सुबह की सैर करने जाता है, तो उसकी नजर इन दोनों बच्चों पर पड़ी तो यह दोनों बच्चे भाग कर रो रो कर गधे चाचा गधे चाचा कहकर उससे चिपट गए थे।
और गधा चाचा भालू बंदर के बच्चों को अपनी पीठ पर बिठाकर जंगल में लाया था।

"गधे चाचा को उनकी सारी बात सुनकर उन दोनों आवारा बिल्लियों पर इतना गुस्सा आया था कि एक दिन जब वह आवारा बिल्लियां गधे चाचा को नदी के किनारे खेलती हुई मिल गई थी, तो गधे चाचा ने उनको पीठ पीठ कर अपने जंगल से भागते हुए कहा था कि आज के बाद तुम दोबारा इस जंगल में दिखाई दी तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा।

"और फिर गधे चाचा से पिटाई खाने के बाद दोनों आवारा बिल्लियां दूर जाकर गधे चाचा को गालियां देकर यह कहकर भाग गई थी कि हम इस जंगल में दोबारा आएंगी देखते हैं तू हमारा क्या करता है।

"और कुछ दिन भालू बंदर के बच्चों के पास खेलने ना आने के बाद वह दोनों बिल्लियां दोबारा इस जंगल में आने लगी थी।

"एक बार तो उन आवारा बिल्लियों ने बुखार में तपते हुए भालू बंदर के बच्चों को अपने साथ बारिश गर्मी के मौसम में इतना खिलाए कि दोनों बच्चे खेलते खेलते बेहोश हो गए थे।


आपस में बातें करते-करते लोमड़ी और गाय को पता नहीं चलता है कि कब नदी आ गई है। नदी में ठंडा मीठा पानी पीते हुए लोमड़ी भालू बंदर के बच्चों के बारे में ही सोच रही थी। अब उन बच्चों पर दया के साथ-साथ लोमड़ी के मन में उनके लिए ममता उमड़ रही थी।

तभी भालू बंदर के बच्चे वहां खेलते खेलते आ जाते हैं, उनको देखकर गाय लोमड़ी दोनों बहुत खुश हो जाती हैं।

भालू बंदर के बच्चों को लोमड़ी अपने पास बुलाकर पूछती है? "तुम दोनों हमारे साथ खेलोगे।" दोनों बच्चे सर हिला कर हां कहते हैं। और गाय लोमड़ी भालू बंदर के बच्चे शाम तक नदी के किनारे खूब खेलते हैं।

और शाम होने पर गाय अपने गांव की तरफ जाती है और लोमड़ी उसी जगह जाती है, जहां उसने खाने-पीने का अपना थैला झाड़ियां के पीछे छुपाया था।

वापस जाते वक्त भालू गाय की पीठ पर उछाल कर बैठ जाता है और बंदर का बच्चा लोमड़ी की पीठ पर उछलकर बैठ जाता है।

जहां लोमड़ी ने अपना खाने के समान का थैला छुपाया था, उस जगह लोमड़ी भालू बंदर के बच्चों को लेकर जाती है और गाय को तीनों हाथ लाकर विदा करते हैं।

लोमड़ी भालू बंदर के बच्चों से पूछती है? "क्या तुम दोनों को भूख लगी है।"

तो दोनों एक साथ कहते हैं "हां बहुत तेज भूख लगी है।" फिर लोमड़ी अपने थैले से फल ब्रेड बिस्कुट नमकीन आदि खाने का सामान भालू बंदर के बच्चों को खाने के लिए देती है।

इतना स्वादिष्ट भोजन उन्होंने जीवन में पहली बार खाया था, इसलिए वह अंधाधुंध खाते हैं और खाते-खाते जब उन्हें नींद आने लगती है, तो बंदर का बच्चा अपने हाथ में सेब पकड़ कर और भालू का बच्चा मीठे चॉकलेटी बिस्किट पड़कर लोमड़ी के पास ही सो जाते हैं।

लोमड़ी बंदर के बच्चे के छोटे-छोटे हाथों से सेब निकलती है और भालू के बच्चे के छोटे-छोटे हाथों से चॉकलेटी बिस्किट निकलती है, तो लोमड़ी को यह देखकर बहुत दुख होता कि दोनों बच्चों के हाथों में जख्म थे और उन जख्मों से लहू बह रहा था।

लोमड़ी दोनों बच्चों के हाथों के जख्म को साफ करके खुद भी सो जाती है।

और उसी समय दोनों आवारा बिल्लियां सीटी मार मार कर भालू बंदर के बच्चों को आधी रात को खेलने के लिए जगाती हैं और जब भालू बंदर के बच्चे गहरी नींद से जाग कर आवारा बिल्लियों के पास खेलने के लिए जाते हैं, तो लोमड़ी वहां पहुंचकर दोनों बिल्लियों को बहुत पीटती है और दोनों बिल्लियों को पीट-पीट कर अधमरा करके जंगल से भगा देती है।

और भालू बंदर के बच्चों से कहती है "मुझे जीने का मकसद मिल गया है आज से मैं तुम्हारी अच्छी परवरिश की पूरी जिम्मेदारी ईमानदारी से उठाऊंगी।"
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