दोपहर की रोशनी धीरे-धीरे ढल रही थी, लेकिन पेड़ के आसपास समय जैसे ठहर गया था मंडल पूरा हो चुका था। चारों दिशाओं में रखे दीपक बिना हवा के भी स्थिर जल रहे थे और उनके बीच खड़े लोग अब समझ चुके थे कि आगे जो होगा, वो साधारण नहीं होगा।
तांत्रिक ने अपने थैले से काले कपड़े में लिपटा एक छोटा यंत्र निकाला उसने उसे सावधानी से मंडल के केंद्र में रखा ठीक उस जगह जहाँ डिब्बा रखा था आरव ध्यान से देख रहा था
आरव- ये क्या है?
तांत्रिक- ये स्थिर करेगा जो बाहर आना चाहता है
कबीर ने धीमे स्वर में कहा
कबीर- और अगर ये काम न करे?
तांत्रिक ने उसकी तरफ देखा बिना किसी भाव के
तांत्रिक- तब हम नहीं ये जगह बचेगी या नहीं ये तय करेगा
मीरा ने धीरे से गहरी सांस ली अब उसके चेहरे पर भी तनाव साफ था
पेड़ के तने में जो दरार पड़ी थी वो अब और फैल रही थी
अंदर से काली परछाईं जैसे बाहर धकेल रही हो लेकिन कोई अदृश्य ताकत उसे रोक रही थी तांत्रिक ने दोनों सहायकों को संकेत दिया
तांत्रिक- शुरू करो
दोनों ने एक साथ मंत्रोच्चारण शुरू किया
“ॐ नमो भैरवाय… ॐ नमो भैरवाय…”
मंत्र की गूंज धीरे-धीरे वातावरण में फैलने लगी आरव और उसकी टीम मंडल के बाहर खड़े थे लेकिन उनकी नजर एक पल के लिए भी पेड़ से हट नहीं रही थी
अचानक पेड़ के अंदर से एक तीखी चीख निकली ऐसी आवाज जो कानों से ज्यादा सीधे दिमाग पर असर कर रही थी निशा ने अपने कान बंद कर लिए
निशा- ये… ये क्या है
रोहित पीछे हट गया
रोहित- ये वही है जो मेरे पीछे था
तांत्रिक ने बिना रुके मंत्र की गति बढ़ा दी।
तांत्रिक- नजरें मत हटाना ये तुम्हें तोड़ने की कोशिश करेगा।
उसी समय पेड़ के तने से काली धुंध निकलने लगी धीरे-धीरे वो धुंध आकार लेने लगी एक टेढ़ा-मेढ़ा, विकृत शरीर लंबा और असामान्य रूप से झुका हुआ वो पूरी तरह बाहर नहीं आ पा रहा था लेकिन उसका आधा हिस्सा अब स्पष्ट दिख रहा था मीरा ने धीरे से कहा
मीरा- ये… पूरी तरह बंधा नहीं है
कबीर- और पूरी तरह आज़ाद भी नहीं
आरव ने अपनी नजरें उस आकृति पर टिकाईं
आरव- बीच में फंसा हुआ है
अचानक उस आकृति की आँखें खुलीं पूरी काली और सीधी रोहित पर रोहित का शरीर जैसे जम गया।
रोहित- ये मुझे देख रहा है
तांत्रिक ने तुरंत ऊँची आवाज में कहा
तांत्रिक- मंडल के अंदर मत आना!
लेकिन उसी पल कुछ अजीब हुआ रोहित एक कदम आगे बढ़ा जैसे किसी ने उसे खींचा हो मीरा ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया
मीरा- रोहित! होश में रहो!
रोहित की आँखें खाली हो गई थीं
रोहित- वो बुला रहा है
कबीर ने बिना देर किए अपनी जेब से राख निकाली और रोहित के माथे पर लगा दी
कबीर- वापस आ!
रोहित अचानक झटका खाकर पीछे गिर गया उसकी साँसें तेज हो गईं
रोहित- मैं… मैं अंदर जा रहा था
पेड़ के पास खड़ी वो आकृति अब हल्की-हल्की हँसी की आवाज निकाल रही थी तांत्रिक ने मंत्र रोक दिया कुछ सेकंड के लिए सब शांत हो गया फिर उसने धीरे से कहा
तांत्रिक- ये अकेला नहीं है
आरव ने तुरंत पूछा
आरव- मतलब?
तांत्रिक- जो इसे नियंत्रित कर रहा है वो पास है
जैसे ही उसने ये कहा मंडल के बाहर पीछे की तरफ सूखी पत्तियों पर किसी के चलने की आवाज आई
चर्र… चर्र…
सबने एक साथ पीछे देखा और इस बार वो परछाईं भागी नहीं वो खड़ा था लंबा, दुबला शरीर, काले कपड़े, बिखरे बाल और आँखें जिनमें एक अजीब शांति थी तांत्रिक ने उसे देखते ही गहरी सांस ली
तांत्रिक- आखिर सामने आ ही गया
आरव की आवाज ठंडी हो गई
आरव- यही है?
तांत्रिक ने सिर हिलाया
तांत्रिक- हाँ यही है जिसने इसे बाँधा था
वो आदमी धीरे-धीरे आगे बढ़ा और मंडल से कुछ दूरी पर रुक गया उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी
अजनबी तांत्रिक- तुमने मेरे काम में दखल दिया है
कबीर ने धीरे से कहा
कबीर- और तूने गलत जगह पर काम किया है साले
अजनबी तांत्रिक की नजर अब आरव पर गई
अजनबी तांत्रिक- ये तुम्हारा खेल नहीं है दूर रहो।
आरव- अब है
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी रही फिर अजनबी तांत्रिक ने पेड़ की तरफ देखा और बस अपनी उँगलियाँ हल्का सा घुमाईं
अगले ही पल पेड़ के अंदर की वो आकृति जोर से तड़पी
मंडल के दीपक एक साथ कांप उठे तांत्रिक ने तुरंत ऊँची आवाज में मंत्र शुरू किया
तांत्रिक- ॐ ह्रीं क्लीं…!
अजनबी तांत्रिक मुस्कुराया
अजनबी तांत्रिक- देखते हैं तुम्हारा बंधन मजबूत है या मेरा
हवा अचानक भारी हो गई मंडल के अंदर और बाहर दो अलग-अलग शक्तियाँ टकराने लगीं और पहली बार
ये साफ हो गया ये लड़ाई अब खत्म होने से पहले बहुत कुछ तोड़ेगी शायद… किसी को भी बख्शे बिना....