Heer-Ranjha - 10 in Hindi Love Stories by Shaziya Khan books and stories PDF | हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 10

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हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 10

एपिसोड 10: नई सुबह, कामयाबी की नई धुन



"सदियों बाद इतिहास गवाह बना है कि इस बार हीर हारी नहीं... उसने अपनी किस्मत खुद लिखी और रांझा को मुकम्मल कर दिया।"
— समीर ख़ान


वेयरहाउस के उस खौफनाक हादसे को बीते अब पूरे तीन महीने हो चुके थे। शिकागो शहर पर आज की सुबह कुछ अलग ही रंग लेकर आई थी। आसमान बिल्कुल साफ़ था, और गगनचुंबी इमारतों के शीशों से छनकर आती गुनगुनी धूप शहर की सड़कों को चमका रही थी। यह वही धूप थी जो कभी रहमान के छोटे से अपार्टमेंट की खिड़की से अंदर आया करती थी, लेकिन आज यह धूप शिकागो के सबसे बड़े और आलीशान बिज़नेस टावर के मुख्य केबिन को रोशन कर रही थी।


केबिन के आलीशान काँच के दरवाज़े पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था—"हीर मलिक: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)"।

हाँ, हीर ने भागने का रास्ता नहीं चुना। कैदो के मरने के बाद जब उसके सारे काले कारनामों, टैक्स चोरी और जाली दस्तावेज़ों की फाइलें एफबीआई और मीडिया के सामने आईं, तो पूरे बिज़नेस जगत में भूचाल आ गया था। हीर के पिता को पुलिस और कानून ने पूरी तरह बेगुनाह और कैदो की साज़िश का शिकार माना। लेकिन इस पूरे झटके से हीर के पिता मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके थे। ऐसे नाज़ुक वक़्त में, हीर ने अपनी कमज़ोरी को अपनी ताक़त बनाया। उसने रोने-धोने या शहर छोड़ने के बजाय, अपने पिता के बिखरते हुए बिज़नेस साम्राज्य की कमान खुद अपने हाथों में ले ली। आज वह शिकागो की सबसे युवा और कामयाब बिज़नेस वूमेन बनकर उभर चुकी थी।


हीर इस वक़्त अपनी बड़ी सी रिवॉल्विंग चेयर पर बैठी लैपटॉप पर कुछ फाइल्स देख रही थी। उसने सफ़ेद रंग का फॉर्मल सूट पहना हुआ था और आँखों पर वही ऐनक थी, जो उसकी आँखों की बेबाकी को और बढ़ा देती थी। तभी केबिन का दरवाज़ा खुला और ब्लैक लेदर जैकेट पहने, हाथ में गिटार केस लिए रहमान अंदर दाखिल हुआ। उसके ठीक पीछे काशिफ भी मुस्कुराता हुआ आ रहा था।


"तो... मैडम सीईओ के पास हमारे लिए थोड़ा वक़्त है, या हम अपॉइंटमेंट लेकर आएं?" रहमान ने अपनी उसी पुरानी, सादगी भरी और गहरी आवाज़ में मज़ाक करते हुए कहा।


हीर के चेहरे पर एक असीम और खूबसूरत मुस्कान खिल उठी। उसने तुरंत अपनी ऐनक हटाई और खड़ी हो गई। "रहमान! काशिफ! तुम दोनों आ गए? मैं बस तुम लोगों का ही इंतज़ार कर रही थी," हीर ने आगे बढ़कर रहमान का हाथ थामते हुए कहा। अब उनकी मोहब्बत के बीच न तो किसी विलेन का खौफ था और न ही समाज की बंदिशें।


काशिफ ने सोफे पर बैठते हुए कहा, "हीर, आज का दिन बहुत बड़ा है। रहमान के नए म्यूज़िक एल्बम 'रूहानी धुन' ने रिलीज़ होते ही पूरे अमेरिका के बिलबोर्ड चार्ट्स पर नंबर वन पोजीशन हासिल कर ली है। शिकागो के सबसे बड़े म्यूज़िक लेबल ने इसके साथ आगे के तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। हमारा रांझा अब सिर्फ सड़कों पर बजाने वाला कलाकार नहीं रहा, यह अब एक ग्लोबल रॉकस्टार है!"


यह सुनते ही हीर की आँखें खुशी से नम हो गईं। उसने रहमान की तरफ देखा, जिसकी आँखों में आज कोई उदासी नहीं थी, बल्कि अपनी कला को मुकम्मल करने का एक अनूठा गर्व था। हीर ने रहमान की इस कामयाबी में उसकी सबसे बड़ी ढाल बनकर उसका साथ दिया था। काशिफ ने अपनी दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते हुए रहमान को शिकागो के बड़े-बड़े म्यूज़िक डायरेक्टर्स से मिलवाया था, और रहमान के हुनर ने बाकी का इतिहास खुद लिख दिया।


"यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है हीर... और काशिफ, तुम्हारी इस बेमिसाल दोस्ती की वजह से," रहमान ने भावुक होते हुए कहा। उसने अपना गिटार केस से बाहर निकाला। यह वही गिटार था जो कभी तन्हाई और दर्द की धुनें पैदा करता था। रहमान ने केबिन की विशाल काँच की खिड़की के पास जाकर, जहाँ से पूरा शिकागो शहर नीचे दिखाई दे रहा था, तारों पर अपनी उंगलियाँ फेरीं।


इस बार जो धुन उस गिटार से निकली, उसमें बिछड़ने का कोई खौफ नहीं था, न ही कैदो की साज़िशों का कोई साया था। उस धुन में जीत का जश्न था, मुकम्मल प्यार का सुकून था और आने वाले एक सुनहरे कल का गहरा विश्वास था। हीर चलकर रहमान के करीब आई और उसने अपना सिर रहमान के कंधे पर रख दिया। काशिफ दूर खड़ा मुस्कुराते हुए अपनी ज़िंदगी के सबसे प्यारे दो लोगों को खुश देख रहा था।



सदियों पहले इतिहास ने हीर और रांझा को बिछड़ते और तड़पते देखा था, लेकिन आज शिकागो की इस आलीशान इमारत में इतिहास खुद को बदलते हुए देख रहा था। इस बार की हीर हारी नहीं थी, उसने अपनी तक़दीर की लकीरें खुद अपने हाथों से, अपने हौसले से दोबारा लिखी थीं। प्यार की जीत हो चुकी थी, और यह अधूरी कहानी हमेशा-हमेशा के लिए मुकम्मल हो चुकी थी।
(पूर्ण समाप्त)
लेखक _समीर खान