book review janpad Bijnor in Hindi Book Reviews by Vandna Sharma books and stories PDF | समीक्षा जनपद बिजनौर

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समीक्षा जनपद बिजनौर

समीक्षा -**पुस्तक -* जनपद बिजनौर (अशोक मधुप के लेखों का संग्रह)*प्रकाशक -* अमर उजाला  *लेखक -* अशोक मधुप*प्रकार विषय -* आंकड़ों व तथ्यों पर आधारित ऐतिहासिक व भौगोलिक जानकारी देने वाली महत्वपूर्ण पुस्तक*शैली -* वर्णनात्मक, तथ्यात्मक*लेख -* 125प्रस्तुत पुस्तक 'जनपद बिजनौर' अशोक मधुप के लेखों का संग्रह है। यह एक रोचक, ज्ञानवर्धक, ऐतिहासिक तथ्यों पर लिखी गई पुस्तक बिजनौर जिले के विषय में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती है। एक ही जगह एक ही पुस्तक में आपको बिजनौर का इतिहास, बिजनौर का भूगोल, सांस्कृतिक धरोहर व ऐतिहासिक विरासत सबकुछ पढ़ने को मिलेगा। मुझे लगता है बिजनौर से जुड़े हर व्यक्ति को बिजनौर के बारे में जानने की उत्सुकता जरूर होगी। बिजनौर जनपद के गौरवशाली इतिहास को पढ़कर आपको गर्व होगा कि हम बिजनौरी हैं।पुस्तक पढ़कर बिजनौर के विषय में रोचक जानकारी मिली। मुझे लगता है लेखक अपने समय में जरूर घुमक्कड़ रहे होंगे। क्योंकि जितना बारीकी से बिजनौर जिले के गुमनाम गांवों का वर्णन किया है, लेखक ने जिया है उन घटनाओं को, खुद साक्षी बने हैं उन जगहों के। अशोक मधुप सर अनेक वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े रहे, बिजनौर जिले में अमर उजाला के प्रभारी भी रहे। अन्वेषणता, तथ्यों की प्रमाणिकता उनकी उत्कंठ जिज्ञासा को दिखलाती है। अधिकतर तथ्य लोगों से बातचीत पर आधारित और दंत कथाओं पर आधारित है। जैसा कि अशोक मधुप खुद एक लेख में स्वीकार करते हैं कि बिजनौर जिले पर उत्कृष्ट व विस्तृत अन्वेषण की आवश्यकता है। सरकार और पुरातत्व विभाग की उपेक्षा झेलता अपनी कहानी बिजनौर स्वयं कहता है। लेकिन इसकी धरोहर को संजोने और प्रकाश में लाने के लिए यह पुस्तक एक उत्तम प्रयास है। कहीं-कहीं आंकड़ों की अधिकता बोर करती है लेकिन आंकड़े जरूरी हैं सही जानकारी के लिए। सभी युवाओं को, शोधार्थियों को और प्रतियोगिता (UPSC / IAS) की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को जरूर पढ़नी चाहिए यह पुस्तक।मेरा भी गृह जनपद बिजनौर है इसलिए पुस्तक पढ़ने में जिज्ञासा भी थी अपने जनपद को जानने की और गर्व भी हुआ जानकर मेरा बिजनौर कितने ही राज, और कितनी ही धरोहर छुपाए हुए है ।जिसकी जानकारी आधुनिक पीढ़ी को नहीं है। मुझे भी स्वयं नहीं पता था बिजनौर में इतनी सारी जगह है घूमने के लिए, इतना बड़ा महत्व है बिजनौर का ऐतिहासिक व भौगोलिक दृष्टि से। अशोक मधुप जी की लेखन शैली किस्सागोई  की है।पढ़ते हुए लगता है जैसे आपके सामने बैठकर ही कोई किस्सा सुना रहे हो। बिजनौर जिले के बारे में पढ़कर मेरा मन भी है उन सभी जगह घूमने का, लगता है मुझे पर्यटक बनना पड़ेगा। भाषा सरल है, पुस्तक पढ़कर हर बिजनौर वासी स्वयं को उससे जुड़ा पाएगा।अनायास ही मुँह से निकलेगा अरे मेरा बिजनौर ऐसा भी है, इतना महान इतिहास है। मैंने भी अपनी जिंदगी के 27 साल बिजनौर में गुजारे लेकिन यही सोचती थी कि बिजनौर में घूमने के लिए कोई जगह नहीं है। पर अशोक मधुप जी की किताब पढ़कर लगा कि अभी तो बिजनौर को जाना ही नहीं है। संक्षेप में यहीकहना चाहूँगी सभी बिजनौरवासियों को तो यहपुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए साथ ही जो विद्यार्थी देश के इतिहास में रुचि रखते हैं उन्हें भी पढ़ना चाहिए कि मेरा बिजनौर कितना बड़ाइतिहास रखता है।" ऐ मेरे शहर बिजनौर तेरे बारे में दुनिया कुछभी कहे, पर मेरे लिए तू खास है, तेरी गलियों मेंमेरा बचपन बीता वो सुनहरे दिन, वो स्कूल की यादेंजिन नए परिवर्तन को दोनों ने एक साथ देखा। "समीक्षक Dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi