The Last Promise - 3 in Hindi Crime Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | The Last Promise - 3

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The Last Promise - 3

रुद्रा शिव मंदिर की और हाथ जोड़कर कहता है --

रुद्रा :- हर हर... महादेव । 

इतना बोलतल रुद्रा हाथ जोड़कर प्रणाम करता है तभी किनारे से रुद्रा को कहता है ।

पि के :- रुद्रा तु उ उ  अभी तक य...य  यहां पर है । 

रुद्रा गंगा नदी से उठते हूए कहता है । 

रुद्रा :- क्यों मुझे कहां होना चाहिए । तुम तो जानते हो ना के मैं रोज सुबह  को गंगा नदी मे स्नान करके भगवान का दर्शन करता हूँ ।  और तु इतना घबरा क्यों रहा है ?

पि के :-  तु उ उ उ  तु फिर भूल गया ना के ह...ह हमे मंत्री जी के घर ज ..जाना है वहां पर उ....उ...उनकी बेटी का वि...विवाह कराना है । 

पि के की बात को सुनकर रुद्रा अंचभित हो जाता है तब उसे याद आता है के उसे आज मंत्री जी के घर जाना है रुद्रा जल्दी से अपने कपड़े को पहने लगता है और कहता है ।

रुद्रा :- पि के , मैं तो भूल ही गया था । कम से कम तु तो याद दिला देता । मेरा बाप मुझे बहोत डाटेगां । तु एक काम कर तु जा कर बाबा को लेकर आ , मैं इधर से ही मंत्री जी के घर चला जाता हूँ ।

पि के :- अ.. अरे मुर्ख वो कबका प...पहूँच गये है । उन्होंने ही म..मुझे तुम्हें लेने भेजा है । तु मेरे साथ ही च...चल , अ.. अब चलो जल्दी ।

रुद्रा अपनी उंगली अपने दांत मे दबाते हूए कहता है ।

रुद्रा :- ओ हो अब क्या होगा , मेरा बाप मुझे मार डालेगा । चल जल्दी चल पि के । भगा गाड़ी ।

इतना बोलतर दोनो ही वहां से मंत्री जी के घर की और चला जाता है । तभी वहां पर मंत्री किशन कुमार जी आते है और शिव नारायण को ऐसे परेशान दैखकर उन से कहता है ।

किशन कुमार  :-  अरे नमस्ते शात्री जी । 


शिव नारायण: -  नमस्ते सर ।

किशन कुमार: -  क्या बात है आ...प  परेशान लग रहे हो ? सब ठीक है ना शात्री जी ? कोई परेशानी तो नही है ना ?

शिव नारायण अपनी परेशानी छुपाते हूए कहता है --

शिव नारायण: -  अ... हा हां सब ठीक है । आपके रहते क्या परेशानी हो सकती है ।

किशन कुमार: - हा हा ... हा हा । अच्छी बात है । सारी तैयारी हो गई है ना , किसी चिज की जरुरत हो तो बता दिजिएगा ।

शिव नारायण : - जी जरुर ।

मंत्री जी उ्र कहता है --

मंत्री जी :- आपको तो अब 4 दिन यही रहना है । कुछ भी दिक्कत होगी तो आप मुझे आकर बताना ठिक है । 

शिव नारायण: - जैसी आपकी ईच्छा मंत्री जी । ( हाथ जोड़कर कहता है ) ।

शिव नारायण की बात को सुनकर मंत्री जी हल्की मुस्कान देकर हंसते है । तभी वहां मंत्री जी की पत्नी रत्ना आ जाती हैै । और फिर रत्ना मंत्री जी के कान मे कुछ कहती है । जिसे सुनकर मंत्री जी कुछ परेशान हो जाता है और फिर वे वहां से रत्ना के साथ चला जाता है । 

मंत्री जी अपनी बेटी के रुम मे जाता है जहां पर उसकी बेटी कोमल थी । कोमल का पहनावा दिखता है । फिर की होंट दिखते है , कोमल किसि से नाराज होकर बहस कर रही थी ।

कोमल :- आपलोग ऐसा कैसे कर सकते हो । मुझे एक बार भी बताना जरुरी नही समझा  । 

  तभी अपनी बेटी को नाराज दैखकर किशन कुमार कहता है ।

किशन कुमार :- अरे क्या बात है । मेरी बेटी गुस्से मे क्यों है ?

किशन कुमार के कहते ही कोमल का चेहरा दिखता है । कोमल अपने पापा के पास आती है और कहती है । 

कोमल :- क्या पापा आपने मेरी शादी फिक्स करदी और मुझे आज पता चल रहा है । पापा आप जाकर मना कर दिजिए । मैं ये शादी नही करने वाली ।

किशन कुमार: -  क्या बात है बेटा । तुम किसी और को चाहती हो क्या ?

कोमल :- ऐसा कुछ नही है पापा । पर मैं जिसे जानती नही इससे पहले कभी मिली नही और ना उसे दैखी हूँ । और आप एक ऐसे इंसान से मेरी शादी करवा रहे है । जिसे मैं जानती ही नही ।

किशन कुमार: - बेटी वो बहोत ही अच्छा लड़का है । वेल सेटेल्ड है । बहोत बड़ी बिजनेसमैन  है बेटा । तुम वहां बहोत खुश रहोगी ।

अपनी बेटी की गुस्से को दैखकर मंत्री किशन कुमार कहता है --

किशन कुमार: - बेटी वो बहोत ही अच्छा लड़का है । वेल सेटेल्ड है । बहोत बड़ी बिजनेसमैन  है बेटा । तुम वहां बहोत खुश रहोगी ।

कोमल :- पर पापा ! 

कोमल कुछ बोलती इससे पहले किशन कुमार कहता है ।

किशन कुमार: - देखो बेटा वो लोग बस आते ही होगें तुम अब मिल लेना उससे , अभी तो 3 दिन बाद शादी है , अगर तुम्हें अच्छा नही लगा तो कोई बात नही , पर मुझे पता है के तुम्हें वो बहोत पंसद आएगा । 

किशन कुमार अपनी बेटी के गालो को सहलाते हूए वहां से चला जाता है ।

तभी कुछ दैर बाद वहां पर 5 गाड़ियां आती है जिसमे अशोक और उसका बेटा राजबीर था । सभी गाड़ी से उतरता है । किशन कुमार और उसकी पत्नी रत्ना उन लोगो के स्वागत के लिए आते है । किशन कुमार अशोक के पास जाकर उनसे गले मिलता है और कहता है ।

किशन कुमार: - आईए  आईए संधी जी । स्वागत है आपका । संधी जी  आने मे कोई तकलीफ तो नही हूई ।

अशोक मुस्कुराते हूए कहता है --अंदर शोक :- अरे नही नही । तकलीफ की कोई बात नही । बस यहां तक पहूँच गया अब तकलीफ कैसा ।

अशोक की बात को सुनकर किशन कुमार हल्की मुस्कान देता है । साथ मे अशोक भी हंसता है ।

अशोक और किशन कुमार बाते कर रहे थे तभी राजबीर की नजर कोमल पर जाती है । कोमल छत के बालकनी मे खड़ी थी । कोमल की खुबशुरती को दैखकर राजबीर अपना चश्मा उतार लेता है और कोमल को बड़े गंदी नजरो से दैखता है । राजबीर कोमल के फिगर को एक टक दैख रहा था ।

कोमल राजवीर कू नजर को भांप लेती है , कोमल को ये बिलकुल भी पंसद नही आया । तभी अशोक की नजर राजबीर पर पड़ी अशोक राजबीर को दैखकर समझ गया था । किशन कुमार राजबीर को ऐसे कोमल को घुरते ना दैख ले इससे पहले अशोक राजबीर को पुकारता है ।

अशोक :-  बेटा राजबीर ...।

अशोक के बुलाने पर जब राजबीर उसे अनसुना कर देता हे और कोमल को दैखते रहता है , राजवीर इतनी खुबसूरत लड़की पहले कभी नही देखी थी , तब अशोक थौड़ा जौर से राजबीर को पुकारता है ।

अशोक :- राजबीर.... 

अशोक के चिल्लाने पर राजवीर का ध्यान अपने पापा पर आया , राजवीर कहता है --

राजबीर: - जी .. जी पापा ।

अशोक :- बेटा अपने होने वाले ससुर के पैर छुओ ।

राजबीर: - जी जी पापा ।

अशोक के कहने पर राजबीर हल्की मुस्कान के साथ किशन कुमार के पैर को छुने जाता है । तो किशन कुमार राजबीर का हाथ पकड़ कर कहता है ।

किशन कुमार: - अरे बस बस रहने दो बेटा । हमेशा खुश रहो । आईए आप सब अंदर चलिए ।

किशन कुमार के कहने पर सभी अंदर जाने लगते है तभी अशोक का फोन रिंग होने लगता है । अशोक फोन को दैखता है , जिसमे उसके खबरी मंगरु का फोन था । इस समय पर मंगरु की फोन दैखकर अशोक हैरान था , अशोक किशन कुमार से कहता है ।

अशोक :-  संम्धी जी आप चलिए मैं एक कॉल अटेंड करके आता हूँ ।

किशन कुमार: - जैसी आपकी इच्छा । 

किशन कुमार राजबीर और बाकी सबको अंदर जाने के लिए बोलता है ।

किशन कुमार: -  आओ बेटा आपलोग चलो ।

किशन कुमार के कहने पर राजबीर और बाकी सभी अंदर जाने लगता है । राजबीर एक बार फिर कोमल को दैखने के लिए छत की और दैखता पर तब तक कोमल वहां पर नही  थी । वो जान बुझकर छिप गयी थी । 

राजवीर वहां से चला जाता है , तब कोमल वही पर छिपकर थी , उसके जाने के बाद कोमल बाहल आती है और धिरे से कहती है --

कोमल :- ये किस लड़के को पापा ने मेरे लिए चुन लिया है , दैखने मे तो एक दम गवांर लगता है , कैसे गंदे तरीके से मुझे घुर रहा था , पता नही सभी लड़कियों के साथ भी ये ऐसा ही करता है । भगवान मुझे इस लड़के से बचा लो ।

इतना बोलकर कोमल अपने दोनो हाथो को जौड़कर भगवान को प्रणाम करता है और वहां से अदर चली जाती है ।

कोमल अंदर जाकर गुस्से से अपने कमरे मे जाकर बैठ जाती है , कोमल अपना फोन निकालती है और अपनी दोस्त निधी को कॉल करती है --

निधी फोन रिसिव करती है और उधर से निधी की आवाज आती है --

निधी :- हाय ... कोमल कैसी है तु ?

कोमल :- कुछ ठिक नही है यहां पर निधी ।

कोमल की बात को सुनकर निधी घबरा जाती है और निधी से पूछती है --

निधी :- क्यों क्या हो गया ? सब ठिक तो है ना ?

कोमल :- अरे पापा ने मुझसे पूछे बिना ही मेरी शादी तय कर दी है ।

निधी इतना सुनकर खुशी से कहती है --

निधी :- वाव , शादी , क्या बात है कोमल , Congratulations .

कोमल नाराज होकर कहती है --

कोमल :- क्या Congratulations . मुझे ये शादी ही नही करनी ।

निधी :- शादी नही करनी पर क्यों ?

कोमल निधी को सब बोलकर सुनाती है --

कोमल :- उसकी मजर बहोत गंदा है निधी , वो तो मुझे ऐसै दैख रहा था जैसे कभी लड़की ही नही दैखी ।

निधी :- अरे लड़को का यही होता है , और वैसे भी तु तो है ही इतनी प्यारी के तुझे जो भी दैखेगा वो तो बस दैखते ही रह जाएगा ।

कोमल :- दैखने का भी एक नजरिया होता है निधी , तु मेकी बात को समझ नही रही है , मुझे ये लड़का ठिक नही लग रहा है , पता नही पापा के ये कहां से मिल गया ।

निधी :- लड़का सही नही लगा क्या ?

कोमल :- नही यार , वो मुझे बहोत गंदे तरिके से दैख रहा था ।

निधी :- हम्म .. तब तो कुछ करना पड़ेगा । 

कोमल :- कुछ सौच निधी , वरना पापा मुझे उस जानवर के साथ बांध देंगे । 

निधी :- तु एक काम कर.... तु ना अपने पापा से कह दो के तु किसी और से प्यार करती हो । 

कोमल :- क्या ये Idea काम करेगा ?

निधी :- 100% काम करेगा । 

कोमल :- पर लड़का भी तो होना चाहिए । किसका नाम बोलु ।

निधी :- अब ये तेरा प्रॉब्लेम है , तु दैख किसी ऐसे लड़के को । अच्छा अब मैं फोन रखती हूँ , लड़का मिल जाए तो बता देना । बाॉय ....

इतना बोलकर निधी फोन काट देती है और कोमल निधी के बात पर परेशान हो जाती है और कहती है --

कोमल :- अब ये नया लड़का कहां से लाउं ।

To be continue....