किशन कुमार रुद्रा के कंधे पर हाथ रखकर कहता है ।
किशन कुमार: - मेरी बेटी ने जो कहा क्या वह सच है ?
इतना सुनकर रुद्रा सुन्न पड़ जाता है वो कुछ कह नही पाता है , पर रुद्रा घबराते हूए जैसे तैसे करके कहता है ।
रुद्रा :- प...पता नही सर मै.....मैने कुछ दैखा ही नही । ( रुद्रा पि के की और दैखकर कहता है ) प....परमानंद तुझे कुछ पता है क्या ?
रुद्रा Pk का नाम ले लेता है जिससे Pk और डर जाता है , Pk घबराते हूए जवाब देता है --
पि के :- (हैरानी से कहता है) मै....मैने तो कुछ सु...सुना ही नही ।
तभी शिव नारायण उन दोनो के पास आता है और कहता है --
शिव नारायण: - अरे तब से तुम दोनो क्या दैखा नही सुना कर रहा है । मंत्री जा क्या कह रहे है उसका जवाब दे ।
शिव नारायण को गुस्सा होते दैखकर रुद्रा मासुम चेहरा बनाता है और कहता है --
रुद्रा :- बापू !
रुद्रा के मुह से बापू कहने पर शिव नारायण अपने इधर उधर दैखते हूए । और हैरानी से अपने आप से कहता है ।
शिव नारायण: - बापू.....?
रुद्रा के मुह से घबराहट से अब अलग ही भाषा निकलने लगता है जिसे सुनकर शिव नारायण भी हैरान रहता है --
रुद्रा :- बापू ! हमरा नईखे पता के इ छोकरीया का कहत रहनी । हमनी के तो कछु मालूम ना बाड़े , “अरे बापु जी, हम त कल्हे इहँ आइल बानी…और ना त हम लाइन मारल, और ना त हेलो बोलल, फिरो आज सीधे सगाई में नाम लिखाइल बा , कसम गंगा मैया के बापु , ई छोकरिया से त आज से पहिले कभी हमरा नजर तक ना टकरावनी! हम त पंडित बनके मंत्र पढ़े आइल रहीं, बाकिर इहँ त बिना पूछले हमे दूल्हा बना दिहल गइल!”
बापु हमरा खुदे बुझात नइखे बापु जी, ई प्रेम भइल कि प्रॉब्लम भइल…
दुनो में फर्क अब तक समझ में ना आइल!” , का रे परमानंद , तु भी कछु बोल ।
रुद्रा के मुह से अचनक बापू और इतना लम्बी भोजपूरी सुनकर शिव नारायण, पि के और सभी बहोत हैरान था । पि के अपना मुह खोल के बस रुद्रा की और दैख रहा था के इसने अचानक से इतना सारा भोजपूरी कैसे बोल दिया ? तब शिव नारायण कहता है ।
शिव नारायण: - ये तुझे क्या हो गया है रुद्रा । तु अचानक से भोजपूरी क्यों बोलने लगा ।
तब रुद्रा फिर से भोजपुरी मे कहता है --
रुद्रा: - ई समये में का बोलीं, कवनो भाषा समझ में नइखे आवत… सब बात त आपन-आप दिल के भीतर से निकलत बा। बापू, हमार भावना के बुझीं, ई भाषा के नइखे, ई त दिल के पुकार बा…बापू "
शिव नारायण फिर परेशान हो जाता है , कोमल तो बस रुद्रा की हालत पर मुस्कुराए जा रही थी , बाकी सबका भी वही हाल था । शिव नारायण फिर कहता है --
शिव नारायण: - ये क्या बोल रहा है तु । उधर तुने कांड कर दिया है । तुझे और कोई नही मिला ईश्क लड़ाने को , मंत्री जी की बेटी ही मिली । अब हम लोग सब मारे जाएगें ।
पि के :- तुझे और कोई नही मिला शादी तुड़वाने के लिए ।
तब कोमल अपने पापा के पास जाती है और कहती है --
कोमल :- पापा ! प्लीज आप मान जाओ ना ।
किशन कुमार: - अरे मैं कब मना कर रहा हूँ । तुम्हें जो पंसद वो मुझे भी पंसद ।
इतना बोलकर किशन कुमार शिव नारायण की और आता है । साथ मे बॉडी गार्ड अपना बंदूक लिए आ रहा था । जिससे दैखकर डर से तीनो कांपने लगता है ।
कोमल अपने पापा से कहती है --
कोमल :- पापा ! प्लीज आप मान जाओ ना ।
किशन कुमार: - अरे तो मैं कब मना कर रहा हूँ । तुम्हें जो पंसद वो मुझे भी पंसद ।
इतना बोलकर किशन कुमार शिव नारायण की और आता है । साथ मे बॉडी गार्ड अपना बंदूक लिए आ रहा था । जिससे दैखकर डर से तीनो कांपने लगता है ।
शिव नारायण Pk से कहता है --
शिव नारायण: - ये हमलोगो की और ही क्यों आ रहे है ?
पि के :- आपके लाडले बेटे के करतुत के कारण उसे और हमे सम्मानित और साथ मे हमे भी सम्मानित करने के लिए यमराज जी इधर ही आ रहे है । अपने साथ प्राण घातक अस्त्र लिए ।
किसन कुमार अपने बॉडी गार्ड को साथ शिव नारायण की और कमद बड़ाए जा रहे थे । जैसे - जैसे उनके कदम शिव नारायण के करीब आता है उन सबकी दिल की धड़कन बड़ने लगती है , अब शिव नारायण उन सबके सामने खड़ा था ।
शिव नारायण किशन कुमार को अपने सामने दैखकर डर से कांपने लगता है । उसके मुह से एक शब्द भी नही निकल रहा था ।
तब रुद्रा Pk से पूछता है --
रुद्रा :- पि के । वो अभागा कौन बा । जिसका नाम कोमल ने लिया है ।
पि के :- व....वो अभागा ... । तु.....उ... बा ।
Pk के मुह से इतना सुनकर रद्रा को झटका लगता है , रुद्रा कहता है --
रुद्रा :- क्या ... उसने मेरा नाम लिया ..? हे भगवान अब पता नही क्या होगा, ये लड़की ने हमे कही का नही छोड़ेगी । अपनी तो लग गई रे ...! अब का होई ।
तभी अशोक ये सब दैखकर गुस्से से पागल हो रहा था , उसे पता था के अगर ये सगाई नही हूई तो उसके सपने बेकार हो जाएगें । वो ये सगाई इसिलिए करा रहा था , ताकी मंत्री के घर मे इसका पहचान बन जाएगा और वो उस आड़ मे अपने काले धंधे को और आशानी से चला सकेगा । पर यो सब दैखकर उसे टेंशन होने लगी थी , तब अशोक किसन कुमार के पास जाता है और किशन कुमार से कहता है ।
अशोक :- संबधी जी । ये सब क्या है । हमे इस तरह से बैज्जत करने का क्या मतलब ।
किशन कुमार: - नही नही । मेरा ऐसा कोई मतलब नही था । दरअसल बात ये है के आखिर दोनो को साथ बिताना है और साथ मे रहने के लिए दोनो की खुशी होमा बहुत जरुरत है और जब मेरी बेटी आपके बेटे को पसंद नही करती तो ये जबरदस्ती वाली बात क्यो करना । मैं नही चाहता के हम सब फोर्सफुली इन दोनो की शादी कराऊ और फिर शादी के बाद दोनो के लाईफ मे कोई कठिनाई आए । इससे अच्छा तो यही है ना के हम बच्चो की बात सुने ?
तब अशोक चिड़ते हूए कहता है --
अशोक :- ये सब कहने की बात है संधी जी । एक बार शादी हो जाए तो सब ठिक हो जाता है । हमारे जमाने मे भी तो ऐसा ही हूआ करता था और फिर शादी के बाद प्यार हो ही जाता है । जैसे हम लोगो का हूआ था । और वैसे भी इस पंडित की ओकात ही क्या है , हमारे सामने ।
अशोक से इतना सुमकर पि के को गुस्सा आ जाता है । वो कुछ कहता के तभी रुद्रा उसे रोक लेता है । तब किशन कुमार कहता है --
किशन कुमार: - बात औकात की है ही नही अशोक जी। बात तो संस्कार की है । जो आपके बेटे मे है ही नही और मुझे लगता है वो आप मे भी नही है , क्योकी जिस तरह के शब्दों का उपयोग आपने अभी शिव नारायण जी के लिए किया वो कोई शरीफ इंसीन तो कभी नही कर सकता , अच्छा हूआ शादी से पहले ही आपलोगो का नेचर हमे पता चल गया । इसिलिए बात को और आगे ना बड़ा कर आपलोग जा सकते है ।
किशन कुमार के इतना कहने पर अशोक कहता है ।
अशोक :- ये आप ठिक नही कर रहे मंत्री जी । हमे इस तरह से बेईज्जत करके आप सही नही कर रहे है ।
अशोक की बात पर किसन कुमार अशोक के करीब जाकर कहता है --
किशन कुमार: - धमकी दे रहे है । देखिए आप हमारे मेहमान है और हम आपसे बदतमीजी से पेेस आना नही चाहते । इसिलिए बेहतर होगा के आप खुद यहां से चले जाओ । और आईंदा से अपनी शक्ल मुझे फिर कभी मत दिखाएगा ।
अशोक :- इसे धमकी नही चेतावनी समझे मंत्री जी , इस मामुली इंसान के लिए आपने मुझे .. अशोक को बेईज्जत किया , इसका पछतावा तो आपको एक दिन जरुर होगा।। चल बेटा ।
वो जाने लगता है तो किसन कुमार अशोक को रोकते हूए कहता है --
किसन कुमार: - जरा रुकिए ...! ये जो आपने अभी कहा ना के मुझे पछतावा होगा ... आपको क्या लगता है के आप जैसे छोटे मानसिकता वाले लोगो के घर मैं अपनी बेटी को ना भेज कर पछताउगां , नही अशोक जी , अगर आप ऐसा सौच रहे है तो सपने मे हो , और सपने अक्सर टुट जाते है । हां.... पर मुझे ऐसा लगता है के आपको पछतावा जरुर हो रहा है ।
अशोक :- ये तो समय ही बताएगा मंत्री जी । चलो बेटा ।
इतना बोलकर अशोक अपने बेटे राजबीर को वहां से लेकर जाने लगता है तो राजबीर किशन कुमार और कोमल की और गुस्से से दैखते हूए वहां से चला जाता है ।
शिव नारायण मंत्री जी के पास चुपचाप खड़ा था वो क्या बोले कुछ समझ मे नही आ रहा था । तब मंत्री जी उनके पास जाता है और हाथ जौड़कर कहता है --
किशन कुमार: - संम्धी जी । यहां पर जो कुछ भी हूआ उसका मुझे जरा सी भी भनक नही थी और बच्चो ने कब एक दुसरे को पंसद कर लिया , इसका भी पता मुझे नही चला ।
किसन कुमार शिव नारायण के सामने हाथ जोड़ते है और कहते है --
किसन कुमार: - संम्धी जी , अब जब बच्चो ने एक दुसरे को चुन लिया है तो ... क्या आपको रिश्ता मंजूर है ? पर आप चितां मत किजिये अरेंजमेंट ये सब ... सब मैं दैख लूगां आप बस इस शादी के लिए हां कर दिजिए और कार्यक्रम को आगे बड़ाए ।
To be continue......
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