Shri: Struggle and Love - Chapter 9 in Hindi Spiritual Stories by Janshi Saroha books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 9

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 9

हरि ने कहा —जानता हु श्री तुम क्यूं रो रही हो क्योंकि तुम्हे लगता है कि तुम्हे skin problem है तो कोई भी तुमसे प्यार कैसे कर सकता है ?😐
लेकिन श्री मेरा यकीन मानो मुझे तुम्हारे शरीर से कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तुमसे प्यार करता हु तुम्हारे शरीर से नहीं तुम्हारी आत्मा से करता हु ☺️। क्या तुम मुझे समझ सकती हो श्री मेरे मन की बात को स्वीकार कर सकती हो तुम 🫶🏻

श्री को तो अब कुछ समझ ही नहीं आया कि वो क्या कहे । 😳शायद उसके मन में भी एक सुकून था हरि की बात सुनकर लेकिन एक डर भी क्योंकि हरि ने सही कहा एक कुरूप को भला कौन ही अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहेगा ।😔
इसलिए श्री ने ये भी तह किया था कि वो कभी शादी नहीं करेगी और अब भक्ति प्रबल है  नारायण भक्ति सर्वप्रथम है वो एक साध्वी का जीवन जीएगी।🙌🏻

श्री, हरि की बात सुनकर चुप रही तो हरि ने कहा श्री तुम कुछ तो बोलो इतने दिनों में क्या तुम्हारे मन में कोई भावना उत्पन्न नहीं हुई क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करती श्री बोलो न ।🥲

श्री अपनी आंखों के आंसू पोंछ कर हरि से कहा— देखिए हरि जी हम नहीं है आपके योग्य कहने को तो आपने कहे दिया कि आपको मेरे शरीर से नहीं मेरी आत्मा से प्रेम है लेकिन आपके कहने से क्या होता है ये कलियुग है या कौन ही होगा जो मुझ जैसे कुरूप को स्वीकार करेगा 😔खैर इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता की मेरे मन में आपके लिए क्या है क्योंकि अब मेरे मन में मेरे प्रभु नारायण की भक्ति है मैं तह कर चुकी हु एक साध्वी रहने का।🧘🏻

हरि श्री की बात सुनकर थोड़ा गुस्से में आया लेकिन श्री की बात को भी समझ रहा था जिस लड़की ने बचपन से ही अपमान सहा हो उसके मन मे ऐसे ही विचार आएंगे ।🥲
हरि ने कहा श्री पहली बात तो ये कि तुम अपने आपको कुरूप कहना बंद करो मेरी आंखों से देखो श्री तुम इस संसार की सबसे सुंदर लड़की हो 😌

श्री ने इसे एक व्यंग्य समझ कर हँस दी 🥲😂 जिसमें बहुत दर्द था । श्री— अच्छा 🥲😂

हरि ने कहा श्री सच में तुम खूबसूरत हो तुम्हारा दिल सुंदर है जो किसी के पास नहीं श्री समझो शारीरिक सुंदरता तो एक दिन खत्म हो जाएगी लेकिन मन की सुंदरता कभी खत्म नहीं होती।🫶🏻 

श्री ,हरि की बात सुन कर शांत हो गई और कहा हरि जी लेकिन मेरे फैसले का क्या जो मैने लिया है आप भी तो मेरी बात समझिए। मैं आपकी भावनाओं की कदर करती हु लेकिन मैं शायद चाह कर भी आपको अपने जीवन मे शामिल नहीं कर सकती । क्योंकि मैं किसी के भी आने वाले वंश का भविष्य खराब नहीं कर सकती क्योंकि जो मैने सहा वो किसी और को सहने नहीं दे सकती हरि कृपा कर आप  हमारी बात को समझे 😔। और और अब तो बस प्रभु नारायण ही मेरे प्राण है 😌उनके शिवाय मुझे कोई नहीं चाहिए 🙌🏻

हरि श्री की बात सुन कर उसके कमरे से बाहर आ गया अब उसकी आंखों में भी आसू थे।🥲
अन्दर श्री भी अब बेड पर लेट कर फुट फूट कर रो रही थी।
क्योंकि अंदर ही अंदर वो भी चाहती थी हरि को अपनाना लेकिन अपनी समस्या को उसके ऊपर नहीं थोपना चाहती थी।

हरि अपने कमरे मे आ गया थोड़ी देर रो लेने के बाद उसने फैसला लिया कि वो श्री वो ये एहसास दिलाएगा कि शारीरिक सुंदरता कुछ नहीं होती जिसका मन सुंदर वो ही योग्य है उसके प्यार के ।🫶🏻🥰

दूसरी तरफ श्री अपना बैग पैक कर चुकी थी और अगले दिन अपने घर की और जा रही थी ।🙂

अगले दिन...

हरि सुबह जल्दी उठ गया और श्री वही अपना नियम पालन कर रही थी अपने पाठ योग आसन वगैरह।
हरि श्री को देख रहा था श्री की आंखे बंद थी लेकिन उसने महसूस कर लिया था कि हरि उसे देख रहा है उसने अपने पाठ और योग आसन पूरे किए। 
किचेन में पानी पीने चली गई 

हरि भी उसके पीछे आ गया श्री से बोला तो अब तो जा रही हो आखरी बार अपने हाथ की चाय तो पिला दो मस्त मसाले वाली 😋श्री ने एक नजर हरि को देखा और चाय बनाने लगी।

हरि वही स्लिप पर बैठ गया श्री को देखने लगा।😌
श्री को आभास हुआ तो उसने धीरे से कहा हरि आप हमे ऐसे मत देखिए ..🤨
हरि ने कहा कैसे..🙃
श्री चिढ़ गई उसने कहा देखिए आप सब जानते है हम क्या कहे रहे है ऐसे मत देखिए आप हमे ।🤨

हरि ने कहा अरे भई ये कहा लिखा है कि हम किसी को देख भी नहीं सकते (मुस्कुराकर बोला )☺️
श्री ने जल्दी चाय बनाई और उसको पकड़ा दी वहां से जाने लगी 😶‍🌫️
हरि भी उसके पीछे आने लगा श्री पीछे मुड़ी और बोली क्या चाहिए आपको 🤨

हरि – तुम ..🥰
श्री– क्या ये आप क्या कहे रहे है हरि जी 🤨
हरि– अरे पहले पूरी बात तो पूरी सुनो मेरा मतलब था आज तो तुम जा रही हो तो कोई लेने आएगा क्या या मैं छोड़ आऊ मैं तो ये पूछ रहा था ये नहीं कहे रहा था कि मुझे तुम चाहिए ( हंसते हुए बोला) 😅😂

श्री को चिढ़ाने के लिए इतना काफी था उसने कहा देखिए हरि जी हम सब जानते है कि आप क्या कहे रहे थे ज्यादा भोले मत बनिए 🤨और रही बात की मैं किसके साथ जाऊंगी तो सुनिए मेरा भाई आयेगा मुझे लेने आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।🤨
हरि ने कहा अरे यार.. मेरा मतलब श्री इसमें परेशान होने वाली क्या बात है मैं तो बस यूं ही ..😶‍🌫️

श्री उसकी बात सुने बिना डाइनिंग टेबल
पर आ गई और वह बैठ कर खाना खाने लगी सीता आंटी ने कहा बेटा अब तो जा रही हो इतने दिनों से तो अब मुझे तुम्हारी आदत हो गई कुछ दिन और रह जाती बेटा  श्री ने कहा आंटी इतने दिनों मे तो मुझे भी आप सब की आदत हो गई लेकिन अपने घर भी तो जाना ही पड़ेगा क्योंकि अब रिजल्ट आयेगा तो अपने परिवार में ही देखना चाहती हु रिजल्ट को ।☺️
लेकिन भगवान ने चाह तो दुबारा मिलेंगे आप चिंता मत करो आंटी ।☺️
आंटी श्री की बात सुन कर मुस्कुरा दी और बोली हाँ बस जल्दी ही वो समय आए जब हम फिर तुमसे मिले बिटिया ।☺️

हरि भी अपने मम्मी और श्री की बात सुन रहा था मुस्कुरा रहा था ये सोचकर शायद अब फिर मिलना हो जाए कभी भगवान ने चाह तो 🥰

अब तो सीता आंटी को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि हरि श्री को पसंद करता है उन्हें तो श्री 
कब से पसंद थी हाँ पहले उन्हें उसके शरीर को देख कर मन में थोड़ा दर्द हुआ था कि जो कुछ भी हरि की दादी ने तह किया शायद वो न हो । 

लेकिन अब उन्हें भी ये समझ आ रहा था कि शरीर की सुंदरता से ज्यादा मन की सुंदरता महत्वपूर्ण होती है ।
😌🫶🏻

धन्यवाद 🙏🏼 
🙏🏻🙌🏻🕉️